Uttarkashi: बर्फीला सन्नाटा! गंगोत्री नेशनल पार्क में पानी भी ठिठुरा, जंगल में बिछे कैमरा जाल
Uttarkashi: गंगोत्री धाम में इन दिनों तापमान लगातार नीचे गिर रहा है। नदी-नाले और झरने पूरी तरह से जम चुके हैं, जिससे यहां का प्राकृतिक दृश्य बेहद मनोहारी हो गया है। हालांकि, यह गिरता तापमान सिर्फ दृश्य सौंदर्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और वन्यजीव गतिविधियों पर भी असर डाल रहा है। इस प्रकार की स्थिति climate change की वास्तविकता को दिखाती है और पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के बदलाव की चेतावनी देती है।

बर्फ और पानी की व्यवस्था
गंगोत्री धाम के आसपास नदी-नाले जमने के कारण पानी की आपूर्ति एक चुनौती बन गई है। स्थानीय लोग और पर्यटक बर्फ को आग में पिघलाकर पीने और दैनिक जरूरतों के लिए उपयोग कर रहे हैं। यह दिखाता है कि प्राकृतिक संसाधनों का सही प्रबंधन और उनका सतत उपयोग कितना महत्वपूर्ण है। गंगोत्री में इस तरह की तैयारी natural resources के संरक्षण और प्रभावी उपयोग का उदाहरण है।
नेशनल पार्क में सुरक्षा उपाय
शीतकाल में गंगोत्री नेशनल पार्क में वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। गोमुख, केदारताल ट्रैक और नेलांग घाटी में करीब पचास ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की मदद से पार्क अधिकारियों को अवैध शिकार की घटनाओं पर नजर रखने और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। यह पहल wildlife conservation के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दुर्लभ वन्यजीवों की निगरानी
पार्क में लगाए गए ट्रैप कैमरों से स्नो लेपर्ड, भरल, भूरा भालू, कस्तूरी मृग और अन्य दुर्लभ प्रजातियों की गतिविधियों पर निगरानी की जाती है। इससे वन्यजीवों की जनसंख्या और उनके आवासीय क्षेत्रों का अध्ययन किया जा सकता है। ऐसे कदम endangered species की सुरक्षा और उनके संरक्षण के लिए क्रांतिकारी साबित हो रहे हैं।
ऊंचाई पर कार्यरत कर्मचारियों की मेहनत
वन विभाग के कर्मचारी समुद्रतल से 10 से 13 हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रैप कैमरों को स्थापित कर रहे हैं। शीतकाल और बर्फबारी की कठिन परिस्थितियों में भी उनकी मेहनत जारी रहती है। यह पहल न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बल्कि environmental monitoring के लिए भी महत्वपूर्ण है।
ट्रैक और घाटियों में निगरानी
गोमुख ट्रैक और नेलांग घाटी में लगाए गए ट्रैप कैमरे पार्क अधिकारियों को इन क्षेत्रों में वन्यजीव गतिविधियों पर पूरी जानकारी देते हैं। इससे अवैध शिकार रोकने में मदद मिलती है और जंगल के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में सहायता मिलती है। यह कार्य forest management के तहत एक आदर्श उदाहरण बन चुका है।
भविष्य की तैयारी और संरक्षण
Uttarkashi के गंगोत्री नेशनल पार्क में की जा रही यह निगरानी और ट्रैप कैमरों की स्थापना भविष्य में वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इससे न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी संरक्षित रहेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ecological protection का संदेश भी जाएगा।



