Thiruvananthapuram Civic Battle: थरूर के गढ़ में सेंध! तिरुवनंतपुरम निगम चुनाव में कांग्रेस का हुआ पतन
Thiruvananthapuram Civic Battle: केरल में दो चरणों में हुए स्थानीय निकाय चुनावों की आज मतगणना जारी है। इस गिनती में सबसे ज्यादा नजरें राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर टिकी हुई हैं, जहां कुल 101 वार्ड हैं। तिरुवनंतपुरम नगर निगम के लिए पहले चरण में 9 दिसंबर को मतदान हुआ था, जिसमें 70.91 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह आंकड़ा राज्य की शहरी राजनीति में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है (Kerala Local Elections)।

शुरुआती रुझान: BJP की मजबूत मौजूदगी
मतगणना के शुरुआती रुझानों में तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। सुबह 10:40 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 101 वार्डों में से BJP 22 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। वहीं, लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) 16 वार्डों में और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) 11 वार्डों में आगे चल रहा है। हालांकि अभी गिनती जारी है और तस्वीर पूरी तरह साफ होना बाकी है (Thiruvananthapuram Election Trends)।
बहुमत का आंकड़ा और सत्ता की जंग
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ता हासिल करने के लिए 52 वार्डों में जीत जरूरी है। यही वजह है कि हर बढ़त और हर सीट राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम बन गई है। BJP पिछले करीब 10 वर्षों से केरल की राजधानी की शहरी निकाय में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया है। इस बार के रुझान पार्टी के लिए उम्मीद जगाने वाले माने जा रहे हैं (Municipal Majority Mark)।
शशि थरूर का संसदीय क्षेत्र, इसलिए बढ़ा महत्व
तिरुवनंतपुरम नगर निगम का चुनाव सिर्फ स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र कांग्रेस के दिग्गज नेता और वरिष्ठ सांसद शशि थरूर का संसदीय क्षेत्र भी है। ऐसे में यहां के नतीजों को कांग्रेस की साख से जोड़कर देखा जा रहा है। UDF के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है, जबकि BJP और LDF दोनों इसे राजनीतिक विस्तार के अवसर के रूप में देख रहे हैं (Shashi Tharoor Constituency)।
2020 के नतीजे: LDF का दबदबा
अगर 2020 के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों पर नजर डालें, तो तिरुवनंतपुरम नगर निगम में LDF का दबदबा साफ नजर आता है। उस चुनाव में LDF ने 52 वार्ड जीतकर निगम पर कब्जा किया था। BJP के नेतृत्व वाले NDA को 33 वार्ड मिले थे, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF महज 10 वार्डों पर सिमट गया था। यही आंकड़े इस बार के मुकाबले को और दिलचस्प बनाते हैं (Kerala Election History)।
इस बार भी त्रिकोणीय मुकाबला
2024 के स्थानीय निकाय चुनावों में भी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में मुख्य रूप से LDF, NDA और UDF के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। कोई भी गठबंधन दूसरे से बहुत पीछे नहीं दिख रहा, जिससे साफ है कि अंतिम नतीजे बेहद रोमांचक हो सकते हैं। शहरी मतदाता विकास, सुशासन और वैकल्पिक राजनीति जैसे मुद्दों पर मतदान करता नजर आया है (Triangular Political Contest)।
LDF का मजबूत संगठनात्मक ढांचा
LDF ने इस चुनाव में सभी 101 वार्डों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। गठबंधन में CPI(M) ने 70 सीटों पर, CPI ने 17 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। इसके अलावा केरल कांग्रेस (एम) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तीन-तीन सीटों पर चुनाव लड़ा। जनता दल (सेक्युलर) ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जबकि अन्य छोटे घटक दलों को एक-एक सीट दी गई (LDF Seat Sharing)।
NDA की पूरी ताकत मैदान में
NDA ने भी तिरुवनंतपुरम नगर निगम की सभी 101 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। इस गठबंधन में BJP ने सबसे ज्यादा 96 सीटों पर चुनाव लड़ा। वहीं भारत धर्म जन सेना (BDJS) को 3 सीटें मिलीं। केरल कामराज कांग्रेस और शिवसेना को एक-एक सीट पर उम्मीदवार उतारने का मौका दिया गया। NDA की रणनीति शहरी वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने पर केंद्रित रही है (NDA Election Strategy)।
UDF के सामने बड़ी चुनौती
कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के लिए यह चुनाव आसान नहीं माना जा रहा। 2020 के कमजोर प्रदर्शन के बाद गठबंधन पर दबाव है कि वह अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल करे। हालांकि शशि थरूर जैसे नेताओं की मौजूदगी के बावजूद, शहरी मतदाताओं में पार्टी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है (UDF Performance Pressure)।
नतीजों से तय होगी केरल की शहरी राजनीति की दिशा
तिरुवनंतपुरम नगर निगम के नतीजे न सिर्फ राजधानी की सत्ता तय करेंगे, बल्कि केरल की शहरी राजनीति की दिशा भी संकेत देंगे। अगर BJP अपनी सीटें बढ़ाने में सफल रहती है, तो इसे राज्य में पार्टी के बढ़ते प्रभाव के तौर पर देखा जाएगा। वहीं LDF की जीत उसके शासन मॉडल को मजबूती देगी, जबकि UDF के लिए यह चुनाव राजनीतिक पुनरुत्थान का अवसर बन सकता है (Kerala Urban Politics)。



