Kanpur KIT Student Protest: छात्र आंदोलन ने पकड़ा उग्र मोड़, कानपुर के KIT में हुई तोड़फोड़ और आगजनी की घटना
Kanpur KIT Student Protest: उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित केआईटी यानी कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में सोमवार को हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कॉलेज प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। लंबे समय से चला आ रहा असंतोष अचानक उग्र प्रदर्शन में बदल गया, जिसमें तोड़फोड़ और आगजनी तक की घटनाएं सामने आईं। छात्रों का कहना है कि ऑटोनामस कॉलेज का झांसा देकर उनसे अधिक फीस वसूली गई और अब उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले ने (Kanpur student protest) को प्रदेश भर में चर्चा का विषय बना दिया है।

ऑटोनामस का दावा, लेकिन नियमों में भारी गड़बड़ी
छात्रों के आरोपों के मुताबिक कॉलेज प्रशासन ने सत्र 2024-25 में खुद को ऑटोनामस बताकर दाखिले किए। इस आधार पर सामान्य कॉलेजों की तुलना में अधिक फीस ली गई। लेकिन बाद में सामने आया कि न तो परीक्षा पैटर्न स्पष्ट था और न ही विश्वविद्यालय से सही तरीके से इनरोलमेंट कराया गया। छात्रों का कहना है कि ऑटोनामस होने के नाम पर 70 अंकों की जगह सिर्फ 30 अंकों की परीक्षा कराई गई, जबकि विश्वविद्यालय का नियम अलग है। यही अनियमितता (autonomous college issue) इस पूरे विवाद की जड़ बन गई।
बीटेक, बीसीए और एमसीए छात्रों पर पड़ा असर
इस विवाद का असर सिर्फ एक कोर्स तक सीमित नहीं रहा। बीटेक के साथ-साथ बीसीए और एमसीए के छात्र भी इससे प्रभावित हुए हैं। छात्रों का आरोप है कि ऑटोनामस के कारण इस सत्र के कई छात्रों का विश्वविद्यालय में इनरोलमेंट तक नहीं हो पाया। इससे उनकी डिग्री, परीक्षा और भविष्य तीनों पर सवाल खड़े हो गए हैं। यही कारण है कि (academic future) को लेकर छात्रों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।
नए छात्रों की बढ़ी मुश्किलें
इस साल नए दाखिला लेने वाले छात्र भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने ऑटोनामस कॉलेज मानकर विषयों का चयन किया और उसी के अनुसार पढ़ाई भी की। अब कॉलेज और विवि की ओर से उन पर विश्वविद्यालय के सिलेबस के अनुसार परीक्षा देने का दबाव बनाया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि अचानक नियम बदलने से उनका पूरा साल बर्बाद होने का खतरा है। यह स्थिति (education crisis) का गंभीर उदाहरण बन चुकी है।
हंगामा, तोड़फोड़ और आगजनी तक पहुंचा विरोध
सोमवार को छात्रों का गुस्सा उस वक्त चरम पर पहुंच गया, जब उन्होंने कॉलेज परिसर में जमकर नारेबाजी, तोड़फोड़ और हंगामा किया। देर शाम नए कॉन्फ्रेंस रूम में आग लगा दी गई, हालांकि कॉलेज प्रशासन की कोशिशों से आग पर काबू पा लिया गया। इस दौरान कॉलेज निदेशक के साथ धक्कामुक्की की भी खबर सामने आई। हालात बिगड़ते देख (campus violence) की आशंका और गहरा गई।
पुलिस और प्रशासन को संभालनी पड़ी स्थिति
स्थिति बेकाबू होने की सूचना मिलते ही एसडीएम नर्वल विवेक मिश्रा, एसीपी चकेरी अभिषेक पांडेय समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को शांत कराने की कोशिश की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एकेटीयू से भी उच्च स्तरीय टीम कॉलेज पहुंची। यह हस्तक्षेप (administrative action) हालात को काबू में लाने के लिए जरूरी माना गया।
AKTU टीम ने सुनी छात्रों की पीड़ा
एकेटीयू के कुलपति प्रो. राजीव कुमार, डीएसडब्ल्यू प्रो. ओपी सिंह और डिप्टी रजिस्ट्रार आयुष श्रीवास्तव भी मौके पर पहुंचे। छात्रों ने विश्वविद्यालय टीम के सामने अपनी पूरी समस्या रखी। उनका कहना था कि कॉलेज की गलती के कारण कुछ छात्रों के दो साल तो कुछ के तीन साल तक बर्बाद होने की नौबत आ गई है। साथ ही, अधिक फीस के चलते आर्थिक बोझ भी बढ़ा है। विवि टीम ने आश्वासन दिया कि (AKTU assurance) के तहत छात्रों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
हॉस्टल में बंद रहीं छात्राएं, गेट पर फूटा गुस्सा
विवाद के दौरान कॉलेज प्रशासन ने हॉस्टल में रह रही छात्राओं को अंदर ही रोक दिया, जिससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। काफी देर बाद छात्राएं बाहर निकल सकीं। इसके बाद मुख्य गेट पर छात्रों और छात्राओं ने मिलकर जमकर नारेबाजी की। छात्राओं का कहना था कि इस पूरे मामले में उनकी कोई गलती नहीं है, फिर भी उन्हें सजा भुगतनी पड़ रही है। यह स्थिति (women students protest) को लेकर भी सवाल खड़े करती है।
‘हमारी क्या गलती, फिर सजा क्यों?’
छात्राओं ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कॉलेज के नियमों के अनुसार फीस दी, पढ़ाई की और परीक्षा भी दी। अच्छे अंक आने के बावजूद अब बैक-पेपर का डर दिखाया जा रहा है। पहले वर्ष के लिए बैक-पेपर कराने का आश्वासन भी दिया गया है, लेकिन मेधावी छात्रों को डर है कि इससे उनकी मार्कशीट पर दाग लग जाएगा। अंतिम वर्ष के छात्रों का कहना है कि इस पूरे विवाद से उनका प्लेसमेंट प्रभावित होगा। यही चिंता (placement impact) छात्रों के आक्रोश की सबसे बड़ी वजह बन गई है।
भविष्य पर संकट और जवाबदेही की मांग
केआईटी के छात्र अब सिर्फ समाधान नहीं, बल्कि जवाबदेही भी चाहते हैं। उनका साफ कहना है कि अगर कॉलेज प्रशासन ने गलत जानकारी देकर दाखिले किए हैं, तो कार्रवाई विश्वविद्यालय और संबंधित एजेंसियों को करनी चाहिए। छात्रों का भविष्य दांव पर लगाकर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह मामला (education accountability) की गंभीर जरूरत को उजागर करता है।



