उत्तराखण्ड

Uttarakhand Road Accident: कब्रगाह बनीं कोहरे की चादर में लिपटी उत्तराखंड की सड़कें, 4 ने मौके पर तोड़ा दम

Uttarakhand Road Accident: उत्तराखंड की हसीन वादियों में इन दिनों छाई घनी धुंध काल बनकर सड़कों पर उतर आई है। मंगलवार की रात राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुए दर्दनाक हादसों ने पांच परिवारों के चिराग बुझा दिए। प्रकृति का यह (Weather Hazards) का रूप इतना भयानक था कि विजिबिलिटी शून्य होने के कारण वाहन चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। ऋषिकेश से लेकर रुड़की तक, सड़कों पर सिर्फ चीख-पुकार और बिखरा हुआ खून ही नजर आ रहा था, जिसने प्रशासन की सुरक्षा तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है।

Uttarakhand Road Accident
Uttarakhand Road Accident

ऋषिकेश में मौत का भयावह मंजर

ऋषिकेश में मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी, जिसने देखने वालों की रूह कंपा दी। एक तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से इतनी जोर से जा घुसी कि कार के परखच्चे उड़ गए। इस (Fatal Car Crash) के पीछे की मुख्य वजह घना कोहरा बताया जा रहा है, जिसकी वजह से चालक को सामने खड़ा विशालकाय ट्रक दिखाई ही नहीं दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार की छत शरीर से अलग होकर दूर जा गिरी और उसमें सवार चार लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

क्षत-विक्षत शव और सड़क पर बिखरा खून

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद का नजारा किसी डरावनी फिल्म जैसा था। कार सवार चारों लोगों के शरीर के अंग सड़क पर इधर-उधर बिखरे हुए थे और चारों तरफ खून का सैलाब उमड़ पड़ा था। स्थानीय लोगों ने (Emergency Services) को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। मृतकों की पहचान चंद्रेश्वरनगर और गुमानीवाला के निवासियों के रूप में हुई है। पुलिस को कार को ट्रक के नीचे से निकालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि लोहे का ढांचा पूरी तरह पिचक चुका था।

उजड़ गए हंसते-खेलते दो परिवार

जैसे ही हादसे की खबर मृतकों के परिजनों तक पहुंची, पूरे इलाके में मातम पसर गया। अपनों को खोने का गम और उनके क्षत-विक्षत शरीरों को देखने की मजबूरी ने परिवारों को बुरी तरह तोड़ दिया है। पुलिस ने (Post Mortem Examination) के लिए शवों को अस्पताल भेज दिया है, लेकिन उन घरों में अब कभी वैसी रौनक नहीं लौटेगी। रोते-बिलखते परिजनों का आरोप है कि अगर सड़क पर सही संकेत और लाइटों की व्यवस्था होती, तो शायद उनके अपने आज उनके बीच होते।

रुड़की में भी कोहरे ने ली जान

ऋषिकेश के अलावा रुड़की में भी घने कोहरे ने अपना कहर बरपाया है। यहां हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों में एक बाइक सवार ने अपनी जान गंवा दी, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है। कोहरे के कारण (Bike Accidents) की बढ़ती संख्या ने दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अस्पताल में भर्ती घायल युवक की हालत नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर उसे बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोहरे की मार ने सड़कों को बेहद असुरक्षित बना दिया है।

मनसा देवी फाटक: मौत का डेंजर जोन

ऋषिकेश का मनसा देवी फाटक क्षेत्र अब दुर्घटनाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील बन चुका है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस इलाके में पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन (Traffic Safety Measures) के नाम पर यहां कुछ भी ठोस नहीं किया गया है। रेलवे फाटक के पास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होना और सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े होने वाले ट्रक इन हादसों का मुख्य केंद्र बने हुए हैं, जिन पर लगाम कसना अब अनिवार्य हो गया है।

रफ्तार और लापरवाही का जानलेवा गठजोड़

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कोहरे के साथ-साथ वाहन की अत्यधिक गति भी इस विनाशकारी हादसे का एक बड़ा कारण थी। सर्दियों के मौसम में (High Speed Driving) किसी आत्महत्या से कम नहीं है, क्योंकि गीली और धुंधली सड़कों पर टायर अपनी पकड़ खो देते हैं। पुलिस अधिकारियों ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे सीमित गति में ही चलें और फॉग लाइट्स का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।

व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

इन हादसों ने देहरादून से लेकर ऋषिकेश तक के प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या सिर्फ कोहरे को दोष देकर पल्ला झाड़ लेना काफी है? सड़कों पर (Road Infrastructure) की कमियां और ब्लैक स्पॉट्स की पहचान न होना सरकारी तंत्र की बड़ी विफलता को दर्शाता है। अगर समय रहते दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाए गए होते, तो शायद पांच जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। अब समय है कि प्रशासन कागजों से निकलकर जमीन पर सुरक्षा पुख्ता करे।

भविष्य के लिए सतर्कता ही एकमात्र विकल्प

उत्तराखंड में ठंड का प्रकोप अभी और बढ़ने वाला है, जिसका मतलब है कि कोहरा और भी घना होगा। ऐसे में (Safe Driving Habits) को अपनाना ही खुद को बचाने का एकमात्र जरिया है। रात के समय सफर करने से बचें और यदि अनिवार्य हो, तो वाहन की हेडलाइट्स और इंडिकेटर्स को दुरुस्त रखें। याद रखें, आपकी थोड़ी सी जल्दबाजी आपके परिवार को उम्र भर का दर्द दे सकती है। सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि जीवन के प्रति आपकी जिम्मेदारी भी है।

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