Dehradun Nagar Nigam: देहरादून नगर निगम की अनूठी पहल: शहर में लगी पहली ऑटोमेटिक प्लास्टिक क्रशर मशीन
Dehradun Nagar Nigam: उत्तराखंड की राजधानी को कूड़े के ढेर से निजात दिलाने और देवभूमि को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में देहरादून नगर निगम ने एक बड़ा कदम उठाया है। नगर निगम प्रशासन ने शहर की पहली अत्याधुनिक ऑटोमेटिक प्लास्टिक क्रशर मशीन का सफल प्रक्षेपण किया है। गुरुवार को नगर निगम कार्यालय के मुख्य द्वार पर इस मशीन का औपचारिक उद्घाटन किया गया। फिलहाल इसे एक परीक्षण यानी ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है ताकि इसकी कार्यक्षमता और जनता की प्रतिक्रिया का आकलन किया जा सके। इस मशीन के जरिए इस्तेमाल की जा चुकी प्लास्टिक की बोतलों को मौके पर ही नष्ट कर उन्हें दोबारा उपयोग में लाने लायक बनाया जाएगा।

शहर के 50 प्रमुख स्थलों पर बिछेगा मशीनों का जाल
नगर निगम की यह योजना केवल एक मशीन तक सीमित नहीं रहने वाली है। आने वाले तीन से चार महीनों के भीतर प्रशासन ने शहर के अलग-अलग कोनों में ऐसी करीब 50 और मशीनें स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इन मशीनों को लगाने के लिए उन जगहों का चयन किया गया है जहाँ लोगों की भीड़ सबसे ज्यादा होती है। इनमें मुख्य रूप से बस अड्डे, रेलवे स्टेशन, पर्यटन केंद्र, विश्वविद्यालय परिसर, सार्वजनिक पार्क और सरकारी कार्यालयों के बाहर के क्षेत्र शामिल हैं। नगर निगम का मानना है कि इन मशीनों की सुलभता बढ़ने से लोग सड़कों पर बोतलें फेंकने के बजाय उन्हें इस क्रशर में डालना पसंद करेंगे, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण पर लगाम लगेगी।
कचरे से कंचन: रिसाइकिल प्लास्टिक से बनेगा घर का सामान
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ मॉडल है। क्रशर मशीन में डाली गई बोतलों को बारीक टुकड़ों में तब्दील कर दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद जो प्लास्टिक सामग्री एकत्रित होगी, उसे रिसाइकिल कर नए उत्पाद बनाए जाएंगे। नगर निगम की योजना है कि इस प्लास्टिक कचरे से मजबूत और टिकाऊ फर्नीचर जैसे कुर्सियां, मेज, छोटे गमले और घरों में इस्तेमाल होने वाले सजावटी सामान तैयार किए जाएं। इससे न केवल शहर का कूड़ा कम होगा, बल्कि बेकार समझी जाने वाली प्लास्टिक से नई और उपयोगी वस्तुओं का निर्माण भी संभव हो सकेगा।
बिना सरकारी निवेश के पीपीपी मॉडल पर शुरू हुआ प्रोजेक्ट
आर्थिक रूप से यह पूरी परियोजना नगर निगम के लिए बेहद राहत भरी है क्योंकि इसमें सरकारी खजाने से कोई बड़ा निवेश नहीं किया गया है। यह पूरा सिस्टम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल पर काम कर रहा है। ‘मनसा फैसिलिटी एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी इन मशीनों का संचालन और रखरखाव देख रही है। कंपनी ही प्लास्टिक को रिसाइकिल करने का जिम्मा उठाएगी और उसके बाद नगर निगम उनसे तैयार कच्चा माल खरीद सकेगा। इस मॉडल से बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के शहर को आधुनिक तकनीक का लाभ मिल रहा है।
सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ निर्णायक अभियान
देहरादून की नगर आयुक्त नमामि बंसल के अनुसार, यह पहल ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ के खात्मे की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि फिलहाल ट्रायल के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद शहर के बाकी हिस्सों में इसे विस्तार दिया जाएगा। वहीं, मेयर सौरभ थपलियाल ने इस मौके पर कहा कि नगर निगम का मुख्य उद्देश्य देहरादून को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ बनाना है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इस मशीन का अधिक से अधिक उपयोग करें ताकि सड़कों और नालियों में प्लास्टिक जमा न हो और पर्यावरण सुरक्षित रहे।



