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Pakistan Beep App Launch: डिजिटल जासूसी के खौफ से कांपा पाकिस्तान, क्या ड्रैगन की राह पर चलेगा पड़ोसी मुल्क…

Pakistan Beep App Launch: दुनिया भर में संचार का सबसे बड़ा जरिया बन चुके वॉट्सऐप को लेकर पाकिस्तान ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने तकनीकी जगत में हलचल मचा दी है। पाकिस्तान सरकार का मानना है कि विदेशी मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल से देश की संप्रभुता और गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा खतरे में है। इस (Digital Sovereignty) को बरकरार रखने के लिए अब एक स्वदेशी विकल्प की तलाश पूरी हो गई है। हुकूमत को डर है कि संवेदनशील डेटा बाहरी देशों के सर्वर पर स्टोर होने से जासूसी की संभावनाएं प्रबल हो जाती हैं, जिसे रोकने के लिए अब वॉट्सऐप को अलविदा कहने की तैयारी है।

Pakistan Beep App Launch
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बीप: पाकिस्तान का अपना नया डिजिटल हथियार

सुरक्षा चिंताओं के बीच पाकिस्तान ने ‘बीप’ (BEEP) नाम से एक स्थानीय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह ऐप महज एक चैटिंग सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि पाकिस्तान की (Indigenous Technology) का एक बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। नेशनल इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बोर्ड द्वारा तैयार किया गया यह ऐप अगले दो महीनों के भीतर आधिकारिक रूप से लॉन्च होने के लिए तैयार है। सरकार का लक्ष्य है कि विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कम की जाए और देश की आंतरिक सूचनाओं को देश की सीमाओं के भीतर ही सुरक्षित रखा जाए।

चीन के वीचैट की तर्ज पर बुना गया जाल

पाकिस्तान ने अपने इस नए ऐप को पूरी तरह से चीन के मशहूर वीचैट की तर्ज पर विकसित किया है। जिस तरह चीन ने बाहरी दुनिया के ऐप्स को बैन करके अपना (Cyber Security Ecosystem) तैयार किया है, पाकिस्तान भी उसी नक्शेकदम पर चल रहा है। इस स्वदेशी ऐप को सरकारी कामकाज के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा ताकि आधिकारिक संवाद के लिए किसी अमेरिकी या अन्य विदेशी कंपनी की मदद न लेनी पड़े। यह कदम दर्शाता है कि पाकिस्तान अब अपनी तकनीकी नीतियों को पूरी तरह से चीनी मॉडल में ढाल रहा है।

जून 2026 तक पूरे देश में होगा अनिवार्य

नेशनल असेंबली की स्टैंडिंग कमेटी ने इस प्रोजेक्ट के लिए एक विस्तृत समयसीमा निर्धारित की है। कमेटी के अनुसार, जून 2026 तक यह (National Messaging Platform) पाकिस्तान के हर सरकारी कर्मचारी और विभाग तक पहुंच जाएगा। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि अचानक से होने वाले तकनीकी बदलावों से कामकाज प्रभावित न हो। शुरुआत में इसे केवल उच्च स्तरीय संवेदनशील विभागों में इस्तेमाल किया जाएगा और बाद में इसे पूरे सरकारी तंत्र का हिस्सा बना दिया जाएगा।

डेटा सर्वर की लोकेशन बना सबसे बड़ा सिरदर्द

पाकिस्तान सरकार के इस कड़े फैसले के पीछे सबसे बड़ा तर्क सर्वर की लोकेशन को लेकर है। कमेटी के चेयरमैन सैयद अमिनुल हक का कहना है कि वॉट्सऐप का सर्वर पाकिस्तान से बाहर स्थित है, जिससे (Data Privacy Laws) के उल्लंघन का खतरा बना रहता है। जब जानकारी देश के बाहर प्रोसेस होती है, तो उस पर स्थानीय कानून का कोई नियंत्रण नहीं रहता। बीप ऐप के मामले में इसके सर्वर पूरी तरह से पाकिस्तान की सरजमीं पर होंगे, जिससे सरकार को डेटा पर पूर्ण नियंत्रण और निगरानी की शक्ति मिलेगी।

जासूसी और सूचना लीक होने का सता रहा है डर

सरकारी संस्थानों में वॉइस कॉल, वीडियो कॉल और मीडिया शेयरिंग के दौरान अक्सर गोपनीय रणनीतियों पर चर्चा होती है। पाकिस्तान का दावा है कि विदेशी ऐप्स के माध्यम से (Espionage Threats) लगातार बढ़ रहे हैं। बीप ऐप को इसी जासूसी के डर को खत्म करने के लिए एक कवच के तौर पर पेश किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक देश का अपना प्लेटफॉर्म नहीं होगा, तब तक संवेदनशील जानकारियां लीक होने की आशंका हमेशा बनी रहेगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए नया डिजिटल प्रोटोकॉल

बीप ऐप का प्राथमिक उद्देश्य केवल संदेश भेजना नहीं, बल्कि सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। इसके लिए एक सख्त (Communication Protocol) तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत कर्मचारियों को आधिकारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए केवल बीप का ही उपयोग करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि कार्यक्षमता में भी सुधार होगा क्योंकि यह ऐप विशेष रूप से प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

मेटा की एकाधिकार चुनौती और पाकिस्तान का जवाब

मेटा के मालिकाना हक वाले वॉट्सऐप को लेकर न केवल पाकिस्तान बल्कि दुनिया के कई अन्य देश भी प्राइवेसी को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। पाकिस्तान ने इस (Big Tech Monopoly) को चुनौती देते हुए अपना रास्ता अलग करने का निर्णय लिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वह अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगी, भले ही इसके लिए उसे वर्षों पुराने वैश्विक प्लेटफॉर्म को छोड़ना पड़े। यह निर्णय आने वाले समय में पाकिस्तान की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सुरक्षा ढांचे को एक नई दिशा दे सकता है।

तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर एक साहसी कदम

किसी भी विकासशील देश के लिए अपना मैसेजिंग ऐप बनाना एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है, लेकिन इसकी सफलता इसके यूजर इंटरफेस और स्थिरता पर निर्भर करेगी। पाकिस्तान की यह (Technological Independence) की कोशिश कितनी सफल होगी, यह तो वक्त ही बताएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बीप ऐप वीचैट की तरह सफल रहता है, तो यह पाकिस्तान के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल सुरक्षा के लिहाज से बल्कि देश के आईटी सेक्टर के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

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