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Mental Health Tips: अंधेरी सुरंग में फंसी आत्मा को मिलेगा सुकून, गौर गोपाल दास ने बताए बेचैनी से बाहर निकलने के अचूक मंत्र…

Mental Health Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर ऐसे पल आते हैं जब इंसान का मन बिना किसी ठोस कारण के बेचैन हो जाता है और दिल पर एक अनजाना भारीपन छा जाता है। हम अपनी भावनाओं को (Emotional Well-being) की खातिर दबाने की कोशिश तो बहुत करते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर वह चिंता हमें खोखला करती रहती है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास कहते हैं कि एंग्जायटी से भागना कोई समाधान नहीं है, बल्कि यह समझना जरूरी है कि हमारा मन हमसे क्या कहना चाहता है।

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स्वयं के प्रतिबिंब को निहारना है पहला कदम

मानसिक शांति की यात्रा की शुरुआत हमेशा आत्म-मंथन से होती है, जिसे गौर गोपाल दास ‘रिफ्लेक्ट’ करना कहते हैं। जब भी आप खुद को (Anxiety Management) के संघर्ष में अकेला पाएं, तो एक पल के लिए रुकें और अपने भीतर झांकें। अपनी मनःस्थिति को बिना किसी पूर्वाग्रह या निर्णय के महसूस करना ही वह पहली सीढ़ी है, जो आपको उथल-पुथल से बाहर निकालकर स्थिरता की ओर ले जाती है।

भावनाओं की स्वीकार्यता में छिपा है आधा समाधान

अक्सर हम अपनी घबराहट को अपनी कमजोरी मान लेते हैं और इसी वजह से और ज्यादा तनाव में आ जाते हैं। गौर गोपाल दास के अनुसार, (Mental Peace Strategies) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अपनी भावनाओं को ‘एक्सेप्ट’ यानी स्वीकार करना है। खुद से यह कहें कि इस समय ऐसा महसूस करना पूरी तरह सामान्य है और यह कोई स्थायी स्थिति नहीं है जो हमेशा बनी रहेगी, क्योंकि स्वीकार्यता ही मन के बोझ को हल्का करने का जादू रखती है।

अंतरात्मा से सवाल और बेचैनी की असल वजह

जब आप अपनी भावनाओं को स्वीकार कर लेते हैं, तब समय आता है उस जड़ तक पहुंचने का जो आपकी अशांति का कारण बनी हुई है। शांत मन से किया गया (Self-Inquiry Process) आपको यह समझने में मदद करता है कि यह चिंता किसी पुरानी सोच की वजह से है या आने वाले कल के किसी डर के कारण। जैसे ही आपको समस्या का मूल कारण स्पष्ट होता है, आपके मस्तिष्क को नियंत्रण का एक सुखद एहसास मिलने लगता है।

खुद के प्रति करुणा और पोषण का भाव

हम अक्सर दूसरों के प्रति तो बहुत दयालु होते हैं, लेकिन मुश्किल घड़ी में खुद को ही कोसने लगते हैं, जो कि पूरी तरह गलत है। गौर गोपाल दास सलाह देते हैं कि (Self-Care Routine) को अपनाकर आप अपने मन को वह जरूरी पोषण दे सकते हैं जिसकी उसे दरकार है। चाहे वह पर्याप्त नींद लेना हो, अपनी पसंद का संगीत सुनना हो या किसी भरोसेमंद मित्र से दिल की बात साझा करना, ये छोटी-छोटी चीजें आपके जख्मी मन पर मरहम का काम करती हैं।

दयालुता से खिल उठेगा आपके भीतर का विश्वास

अपने प्रति कठोर होने के बजाय खुद को प्यार देना सीखें, क्योंकि एक थका हुआ मन केवल करुणा से ही फिर से ऊर्जित हो सकता है। जब हम (Spiritual Guidance) के मार्ग पर चलते हुए खुद के साथ एक गहरा और दयालु रिश्ता कायम करते हैं, तो जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियां भी छोटी लगने लगती हैं। याद रखें कि हर अंधेरी रात के बाद सवेरा निश्चित है, बस आपको खुद पर विश्वास बनाए रखना है।

मुश्किल पलों में संतुलन बनाए रखने की कला

जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते रहेंगे, लेकिन जरूरी यह है कि आप उन पलों में खुद को संभालना सीखें। इन चार सरल स्टेप्स का (Mindfulness Practice) आपके जीवन में वह संतुलन ला सकता है जिसकी तलाश हर कोई कर रहा है। यह प्रक्रिया रातों-रात चमत्कार नहीं करती, लेकिन धीरे-धीरे आपके स्वभाव में वह शांति भर देती है जो आपको हर विपरीत परिस्थिति में अडिग रहने की शक्ति प्रदान करती है।

गौर गोपाल दास के विचारों का सार

अंततः, मानसिक स्वास्थ्य कोई मंजिल नहीं बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसे हर दिन सींचना पड़ता है। गुरु जी के बताए (Holistic Healing) के ये सूत्र केवल शब्दों का समूह नहीं हैं, बल्कि वे जीवन जीने की एक नई दृष्टि प्रदान करते हैं। जब आप अपनी एंग्जायटी को दुश्मन समझने के बजाय उसे एक संदेशवाहक के रूप में देखना शुरू करते हैं, तो आपके भीतर का भय समाप्त होने लगता है और आप एक खुशहाल जीवन की ओर कदम बढ़ाते हैं।

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