Bus Fire Accident in Dehradun: मौत के मुंह से लौटे 40 छात्र, देहरादून में धूं-धूं कर जली टूरिस्ट बस, आंखों के सामने खाक हुए सपने
Bus Fire Accident in Dehradun: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में गुरुवार की दोपहर उस वक्त दहशत फैल गई जब तमिलनाडु से आए 40 छात्र-छात्राओं की बस आग का गोला बन गई। शिमला बाईपास स्थित सेंट ज्यूड चौक के पास हुई इस (Major Fire Accident) ने हर किसी का दिल दहला दिया। गनीमत यह रही कि जैसे ही बस से धुआं उठना शुरू हुआ, चालक की तत्परता और छात्रों की सूझबूझ से सभी 45 यात्री समय रहते बाहर निकल आए। यह हादसा इतना भयानक था कि बस देखते ही देखते लपटों से घिर गई, जिससे वहां मौजूद छात्राओं के बीच चीख-पुकार मच गई और कई छात्राएं सदमे में रोने लगीं।

सीपीयू निरीक्षक की जांबाजी ने टाला बड़ा खतरा
हादसे के वक्त मौके पर मौजूद सीपीयू निरीक्षक नरेश कुमार भौर्याल ने अपनी टीम के साथ मोर्चा संभाला और स्थिति को बिगड़ने से रोका। उन्होंने तत्काल (Emergency Traffic Management) लागू करते हुए शिमला बाईपास तिराहे से जेंट ज्यूड चौराहे के बीच वाहनों की आवाजाही बंद करा दी। पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बस के शीशे तोड़ दिए ताकि अंदर गैस का दबाव न बने और कोई बड़ा विस्फोट न हो। साथ ही अग्निशमन विभाग को सूचित किया गया, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम शुरू किया।
नई बस और शॉर्ट सर्किट का घातक मेल
आरटीओ डॉ. अनीता चमोला के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने जली हुई बस का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि बस बिल्कुल नई थी और इसी साल मार्च में ही इसका पंजीकरण हुआ था। बस के फिटनेस, बीमा और परमिट जैसे (Vehicle Safety Documents) पूरी तरह वैध पाए गए। प्रारंभिक जांच में यह बात निकलकर आई है कि आग की शुरुआत संभवतः शॉर्ट सर्किट की वजह से हुई थी। हालांकि बस में अग्निशमन उपकरण मौजूद थे, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन पर काबू पाना मुश्किल हो गया।
राख में तब्दील हुई छात्रों की सारी पूंजी
तमिलनाडु से भारत भ्रमण पर निकले इन कॉलेज छात्रों के लिए यह दौरा किसी बुरे सपने में तब्दील हो गया। जब बस की सीटों के नीचे बने केबिन से आग की लपटें उठीं, तो वहां रखे छात्रों के सभी बैग जलकर खाक हो गए। इन (Student Belongings Loss) में उनके कपड़े, जरूरी दस्तावेज और दैनिक उपयोग का सारा सामान शामिल था। सामान जल जाने के कारण छात्र अब खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उनकी महीनों की तैयारी और यादें चंद मिनटों में राख के ढेर में बदल गईं।
परिजनों को दी सकुशल होने की सूचना
हादसे के बाद बस में सवार सभी 40 छात्र-छात्राओं ने सबसे पहले अपने घर पर फोन कर परिजनों को अपनी कुशलता की जानकारी दी। तमिलनाडु से हजारों किलोमीटर दूर (Travel Security Concerns) के बीच अपने बच्चों के सुरक्षित होने की खबर पाकर माता-पिता ने राहत की सांस ली। हालांकि, अपनी आंखों के सामने अपना कीमती सामान जलते देख छात्र काफी देर तक सदमे में रहे। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने छात्रों को ढांढस बंधाया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया।
मुजफ्फरनगर से बुलाई गई दूसरी बस
हादसे के बाद छात्रों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए ट्रैवल एजेंसी ने आनन-फानन में मुजफ्फरनगर से दूसरी बस का इंतजाम किया। सीपीयू निरीक्षक ने बताया कि (Passenger Transportation Logistics) के तहत नई बस के देहरादून पहुंचने पर सभी छात्रों को एफआरआई परिसर भेजा गया। छात्रों को एफआरआई में एक निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन मानसिक तनाव और सामान की कमी के चलते उनकी बॉडी लैंग्वेज में भारी निराशा देखी गई।
अधूरा रह गया मनाली घूमने का सपना
यह छात्र दल तमिलनाडु से जयपुर और फिर वहां से हरिद्वार पहुंचा था। हरिद्वार से देहरादून आने के बाद इनका अगला पड़ाव मनाली था। लेकिन इस (Tourism Itinerary Disruption) के कारण अब आगे का दौरा रद्द होने की कगार पर है। पास में कपड़े और अन्य जरूरी सामान न होने के कारण छात्र अब वापस लौटने का मन बना रहे हैं। जिस उत्साह के साथ वे देश की सभ्यता और रहन-सहन को समझने निकले थे, उस पर कुदरत के इस कहर ने पानी फेर दिया है।
फायर टेंडर ने कड़ी मशक्कत के बाद बुझाई आग
पटेलनगर सीबीएस के अधिकारियों ने जानकारी दी कि आग पर काबू पाने के लिए दो फायर टेंडर लगाने पड़े। जब तक आग बुझाई गई, तब तक बस की सीटें और अंदर का पूरा ढांचा जल चुका था। (Firefighting Operations Success) के बावजूद बस को होने वाले नुकसान को नहीं बचाया जा सका। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और ट्रैवल एजेंसी से भी इस तकनीकी खराबी के संबंध में पूछताछ की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।



