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Employment Termination Lawsuit: क्या टॉयलेट ब्रेक भी छीन सकता है आपकी रोजी-रोटी, चीन में ‘चार घंटे’ के बाथरूम ब्रेक ने शख्स की नौकरी पर गिराई गाज

Employment Termination Lawsuit: आधुनिक कॉर्पोरेट दुनिया में काम के बीच छोटे ब्रेक लेना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य माना जाता है। विशेषज्ञ अक्सर सुझाव देते हैं कि (Workplace Productivity Improvement) के लिए कर्मचारियों को थोड़े समय का विश्राम मिलना चाहिए ताकि वे नई ऊर्जा के साथ काम कर सकें। कई देशों में तो इसके लिए बाकायदा कानूनी प्रावधान भी किए गए हैं। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि एक प्राकृतिक जरूरत के लिए लिया गया ब्रेक किसी की नौकरी जाने का सबब बन सकता है? चीन के जियांग्सू प्रांत में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने ब्रेक के नियमों पर एक नई बहस छेड़ दी है।

Employment Termination Lawsuit
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एक घंटे से लेकर चार घंटे तक का लंबा इंतजार

पूर्वी चीन की एक कंपनी ने अपने एक कर्मचारी को अजीबोगरीब वजह से नौकरी से बर्खास्त कर दिया। कंपनी का आरोप था कि यह शख्स बार-बार और जरूरत से ज्यादा लंबे समय के लिए (Bathroom Break Policies) का उल्लंघन कर रहा था। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने दावा किया कि उक्त कर्मचारी कार्यालय समय के दौरान गायब हो जाता था। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कंपनी ने पाया कि कभी-कभी वह एक घंटे से भी अधिक समय तक अपनी सीट से नदारद रहता था, जिससे काम पर बुरा असर पड़ रहा था।

आंकड़ों में छिपी कर्मचारी की लापरवाही

कंपनी ने इस मामले को केवल मौखिक आरोपों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि बाकायदा रिकॉर्ड पेश किए। प्रबंधन ने बताया कि पिछले साल अप्रैल और मई के बीच महज एक महीने के भीतर इस कर्मचारी ने (Excessive Leave Records) की तर्ज पर 14 बार लंबे टॉयलेट ब्रेक लिए। इन ब्रेक्स की अवधि इतनी असामान्य थी कि सुनकर कोई भी दंग रह जाए। कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार, इसमें से सबसे लंबा ब्रेक लगभग चार घंटे तक का था। इतने लंबे समय तक दफ्तर से गायब रहने को कंपनी ने अनुशासनहीनता का गंभीर मामला माना।

बीमारी का तर्क और अदालत की चौखट

नौकरी से निकाले जाने के बाद इस शख्स ने चुप बैठने के बजाय कानूनी रास्ता चुना। उसने अपने पूर्व एम्प्लॉयर पर (Labor Contract Termination) को गैर-कानूनी बताते हुए अदालत में केस दायर कर दिया। कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए उसने एक भावनात्मक और चिकित्सकीय तर्क दिया। उसने दावा किया कि वह बवासीर (Piles) की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था, जिसकी वजह से उसे टॉयलेट में ज्यादा समय बिताना पड़ता था। उसने अपने इस दावे को सच साबित करने के लिए कोर्ट में दवाइयों की रसीदें और अपनी सर्जरी के दस्तावेज भी पेश किए।

सर्विलांस फुटेज ने खोली कर्मचारी की पोल

जब मामला अदालत की सुनवाई तक पहुंचा, तो कंपनी ने भी अपनी ओर से पुख्ता सबूत पेश किए। कंपनी ने अदालत में कार्यालय की (Surveillance Footage Evidence) दिखाई, जिसमें कर्मचारी बार-बार टॉयलेट की ओर जाते और घंटों तक वापस न लौटते हुए दिखाई दे रहा था। इस फुटेज ने यह साफ कर दिया कि कर्मचारी का व्यवहार कंपनी के नियमों के खिलाफ था। कंपनी का तर्क था कि बीमारी के बावजूद, कार्यालय समय के एक बड़े हिस्से को टॉयलेट में गुजारना किसी भी पेशेवर दृष्टिकोण से स्वीकार्य नहीं किया जा सकता।

शारीरिक जरूरत बनाम पेशेवर अनुशासन

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना रुख स्पष्ट किया। न्यायाधीश ने माना कि कर्मचारी को शारीरिक समस्या हो सकती है, लेकिन टॉयलेट में बिताया गया समय (Physical Health Requirements) की सामान्य सीमाओं से कहीं अधिक था। कोर्ट ने पाया कि कोई भी व्यक्ति चार घंटे तक महज शारीरिक आवश्यकता के लिए टॉयलेट में नहीं रह सकता। हालांकि, अदालत ने एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मध्यस्थता का रास्ता निकाला और कंपनी को एक निश्चित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया।

मुआवजे के साथ हुआ विवाद का अंत

इस कानूनी लड़ाई का अंत एक समझौते के साथ हुआ। अदालत ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह उस शख्स को उसके द्वारा किए गए काम के बदले लगभग 4,200 डॉलर का (Financial Compensation Amount) प्रदान करे। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि हालांकि बर्खास्तगी के पीछे कंपनी के तर्क मजबूत थे, लेकिन कर्मचारी के पिछले कार्य और स्थिति को देखते हुए मुआवजा दिया जाना उचित है। इस फैसले ने यह नजीर पेश की कि कर्मचारी के अधिकारों और कंपनी के अनुशासन के बीच एक बारीक रेखा होती है।

क्या कहता है वैश्विक कॉर्पोरेट कल्चर?

यह घटना पूरी दुनिया के कामकाजी लोगों के लिए एक सबक की तरह है। भले ही कई देशों में कर्मचारी हितैषी कानून मौजूद हैं, लेकिन (Corporate Disciplinary Action) की तलवार हमेशा सिर पर लटकी रहती है यदि आप नियमों का दुरुपयोग करते हैं। काम के दौरान ब्रेक लेना आपका अधिकार हो सकता है, लेकिन उसका दायरा और ईमानदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। चीन का यह मामला सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोर रहा है, जहाँ लोग दफ्तर की नैतिकता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के मुद्दों पर अपनी अलग-अलग राय रख रहे हैं।

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