उत्तर प्रदेश

Wildlife Human Conflict in Balrampur: आदमखोर का आतंक! आठ घंटे में दो महिलाओं का शिकार, मौत के साये में सरहद के गांव

Wildlife Human Conflict in Balrampur: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित भांभर रेंज इन दिनों दहशत का केंद्र बनी हुई है। नेपाल सीमा से सटे इस जंगली इलाके में एक ही तेंदुए ने महज आठ घंटे के भीतर दो महिलाओं को अपना निवाला बनाकर सनसनी फैला दी है। इस (Fatal Leopard Attack) के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग घर से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं। वन विभाग की शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि दोनों वारदातों को अंजाम देने वाला तेंदुआ एक ही है, जो अब इंसानी गंध का आदी हो चुका है।

Wildlife Human Conflict in Balrampur
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सुबह की पहली किरण के साथ बरपा कहर

गुरुवार की सुबह करीब नौ बजे जब विशुनपुर कोडर गांव की 25 वर्षीय कमला घर से निकली थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि वह कभी वापस नहीं लौटेगी। परिजनों के मुताबिक वह गांव से महज 300 मीटर की दूरी पर थी, तभी झाड़ियों में घात लगाकर बैठे (Predatory Animal Behavior) तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। तेंदुए ने सीधे कमला की गर्दन को अपने जबड़े में दबोच लिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों के शोर मचाने पर तेंदुआ शिकार को छोड़कर जंगल की गहराई में ओझल हो गया।

शाम ढलते ही दूसरी महिला पर जानलेवा हमला

अभी वन विभाग की टीम पहले हमले की जांच कर ही रही थी कि शाम करीब पांच बजे एक और दुखद खबर सामने आई। नेपाल के कपिलवस्तु जिले की रहने वाली 28 वर्षीय उर्मिला कोरी, जो जंगल के रास्ते सीमा पार कर रही थी, तेंदुए का दूसरा शिकार बनी। यह (Human Wildlife Interaction) घटना बेलभरिया बीट के पास घटी। तेंदुए ने ढाई किलोमीटर के दायरे में ही दूसरी हत्या को अंजाम देकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। पचपेड़वा पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और सीमा सुरक्षा बल (SSB) के माध्यम से नेपाल में सूचना भेज दी गई है।

आसमान से जमीन तक तेंदुए की तलाश

तेंदुए के लगातार बढ़ते हमलों को देखते हुए वन विभाग ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। प्रभावित क्षेत्रों में जमीन से लेकर आसमान तक कड़ी निगरानी रखी जा रही है। हमलावर जानवर को चिह्नित करने के लिए (Thermal Drone Surveillance) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे घने जंगलों के बीच छिपे तेंदुए की थर्मल इमेज ली जा सके। इसके साथ ही जंगल के मुख्य रास्तों और संभावित मूवमेंट वाले इलाकों में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं ताकि तेंदुए के पगचिह्नों और उसकी गतिविधियों का सटीक डेटा जुटाया जा सके।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव और बढ़ता जोखिम

जंगल के किनारे बसे गांवों में बिजली और संचार की व्यवस्था न होना ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। स्थानीय ग्राम प्रधानों का कहना है कि शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है, जिससे (Unsafe Living Conditions) और अधिक खतरनाक हो जाती हैं। पक्के रास्तों और रोशनी की कमी के कारण लोग जंगली जानवरों की आवाजाही को भांप नहीं पाते। संचार व्यवस्था न होने से आपात स्थिति में मदद मांगना भी मुश्किल हो जाता है, जिसका फायदा उठाकर जंगली जानवर अक्सर रिहायशी इलाकों के करीब पहुंच जाते हैं।

वन विभाग की तीन शिफ्टों में कांबिंग

घटना की गंभीरता को देखते हुए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और डीएफओ गौरव गर्ग ने खुद मौके का मुआयना किया है। अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए वन कर्मियों की विशेष टीमों का गठन किया है। अब (Forest Guard Patrolling) को तीन अलग-अलग शिफ्टों में विभाजित किया गया है, जो 24 घंटे कांबिंग ऑपरेशन चलाएंगे। सभी टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर पल की गतिविधि की रिपोर्ट एसडीओ को उपलब्ध कराएं ताकि तेंदुए की लोकेशन मिलते ही उसे ट्रेंकुलाइज करने या पकड़ने की कार्रवाई की जा सके।

ग्रामीणों को सतर्क रहने की कड़ी चेतावनी

वन विभाग ने फिलहाल ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी है कि वे जंगल के अंदर या उसके बेहद करीब न जाएं। डीएफओ ने स्पष्ट किया है कि दोनों हमले सेंचुरी क्षेत्र के भीतर हुए हैं, जो कि जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास है। इस (Awareness Campaign Strategy) के तहत वन विभाग गांवों में मुनादी करवा रहा है और लोगों को समूहों में रहने की सलाह दे रहा है। मृतक कमला के परिजनों को विभाग की ओर से 10 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है, जबकि मुआवजे की अगली प्रक्रिया पर भी काम चल रहा है।

सरहद पर मौत का खौफ और भविष्य की चुनौती

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित यह बेल्ट हमेशा से वन्यजीवों की आवाजाही के लिए जानी जाती रही है, लेकिन एक ही दिन में दो मौतों ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब तक (Man Eating Leopard) पकड़ा नहीं जाता, तब तक सरहद के इन गांवों में जिंदगी और मौत के बीच का संघर्ष जारी रहेगा। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस आदमखोर को जल्द से जल्द काबू करने की है ताकि मासूमों की जान बचाई जा सके और इलाके में शांति बहाल हो सके।

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