Chief Minister Mass Marriage Scheme Issues: बेबस पिता के दर्द और सरकारी सिस्टम की सुस्ती ने रुलाया, अधूरी रह गई सामूहिक विवाह की आस
Chief Minister Mass Marriage Scheme Issues: एक पिता के लिए उसकी बेटी की शादी जीवन का सबसे बड़ा सपना और जिम्मेदारी होती है। लेकिन जब यह सपना सरकारी तंत्र की लापरवाही की भेंट चढ़ जाए, तो दर्द और गहरा हो जाता है। चने और मुरमुरे बेचकर जैसे-तैसे घर चलाने वाले दीपक कुमार की कहानी आज उन सैकड़ों परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रही है, जिन्हें (Financial Hardship Challenges) के कारण अपनी बेटियों के हाथ पीले करने के लिए भारी कर्ज के दलदल में डूबना पड़ा। सामूहिक विवाह योजना के भरोसे बैठे इन लोगों को विकास भवन से कोरा जवाब मिला कि अगले साल आना, जिससे उनकी उम्मीदें धराशायी हो गईं।

बजट में इजाफा पर धरातल पर सन्नाटा
इस वर्ष सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि को 51 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधा एक लाख रुपये कर दिया था। इस फैसले से गरीब परिवारों में खुशी की लहर थी कि अब (Government Welfare Grants) के माध्यम से वे अपनी बेटियों की विदाई सम्मान के साथ कर सकेंगे। लेकिन विडंबना देखिए कि वित्तीय वर्ष के नौ महीने बीत जाने के बाद भी जिले में एक भी सामूहिक विवाह का आयोजन नहीं हो सका है। पिछले साल जहां 921 जोड़ों का निकाह और फेरे हुए थे, वहीं इस बार आंकड़ा शून्य पर टिका है।
टेंडर की उलझन में फंसा शादियों का शुभ मुहूर्त
विभागीय लापरवाही का आलम यह रहा कि टेंडर प्रक्रिया को लेकर साल भर खींचतान चलती रही। पहले शासन स्तर से केंद्रीय टेंडर कराने का विचार हुआ, फिर इसे जिला स्तर पर टाल दिया गया। इस (Administrative Policy Changes) के कारण कीमती वक्त बर्बाद होता गया। एक बार टेंडर प्रक्रिया तकनीकी खामियों की वजह से रद्द हुई, तो दूसरी बार उसे फिर से शुरू करने में महीनों बीत गए। नतीजा यह हुआ कि गरीब परिवार दफ्तरों के चक्कर काटते रहे और फाइलें धूल फांकती रहीं।
देवोत्थान से लेकर दिसंबर तक के मुहूर्त हुए बेकार
भारतीय संस्कृति में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। मई, जून से लेकर नवंबर और दिसंबर तक करीब 12 से ज्यादा बड़े मुहूर्त निकल चुके हैं, लेकिन प्रशासन की सुस्ती नहीं टूटी। सामूहिक विवाह के (Religious Wedding Dates) का इंतजार करते-करते कई लोगों ने मजबूरन साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लिया। दीपक जैसे कई बेबस लोग अब समाज कल्याण विभाग के उन कर्मचारियों को कोस रहे हैं जिन्होंने लंबित आवेदनों का बहाना बनाकर उन्हें वापस लौटा दिया था।
लक्ष्य और आवेदनों के बीच गहराता अंतर
इस वित्तीय वर्ष के लिए जिले को कुल 802 जोड़ों के सामूहिक विवाह का लक्ष्य दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 500 से अधिक (Application Processing Delay) के बावजूद समाज कल्याण विभाग को आवेदन मिल चुके हैं। हालांकि, विभागीय सुस्ती और कोई भी तारीख तय न होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन ही नहीं किया। उन्हें डर था कि अगर तारीख तय नहीं हुई, तो वे अपनी सामाजिक मर्यादा और परंपराओं का निर्वाह कैसे करेंगे।
विभाग की अब जनवरी के मकर संक्रांति पर टिकी आस
जिला समाज कल्याण अधिकारी विनीत मलिक ने सफाई देते हुए कहा है कि अब विभाग की पूरी तैयारी 14 जनवरी के बाद आने वाले शुभ मुहूर्त को लेकर है। उन्होंने दावा किया कि (Social Welfare Department) के पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया अभी भी खुली हुई है और लोग पंजीकरण करा सकते हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि जनवरी से मार्च के बीच शेष लक्ष्य को पूरा किया जाए, लेकिन सवाल वही है कि जो मुहूर्त निकल गए और जिन्होंने कर्ज ले लिया, उनकी भरपाई कौन करेगा?
गरीब की लाचारी पर भारी पड़ती लालफीताशाही
यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि उस गरीब की लाचारी का मजाक है जो एक-एक पैसे के लिए संघर्ष करता है। जब सरकार बजट आवंटित करती है और (Public Service Delivery) के लिए नीतियां बनाती है, तो उसे लागू करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे समयबद्ध तरीके से काम करें। दीपक कुमार जैसे पिता की आंखों के आंसू इस बात की गवाही दे रहे हैं कि भ्रष्टाचार और लापरवाही केवल आंकड़ों को प्रभावित नहीं करती, बल्कि जिंदगियों को कर्ज के बोझ तले दबा देती है।
क्या नए साल में बेटियों को मिलेगी उनकी विदाई की सौगात
अब जब साल का अंत करीब है और नया साल दस्तक दे रहा है, उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन अपनी नींद से जागेगा। सामूहिक विवाह योजना (Social Justice Empowerment) का एक सशक्त माध्यम है, जिसे केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिले के सैकड़ों परिवार अब भी उम्मीद भरी नजरों से जनवरी की ओर देख रहे हैं, ताकि उनकी बेटियों के अरमान सरकारी फाइलों से निकलकर विवाह मंडप तक पहुंच सकें और उन्हें साहूकारों के चंगुल में न फंसना पड़े।



