Sanctions – ईरान समझौते पर फ्रांस ने रखीं नई शर्तें
Sanctions – फ्रांस ने ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी संभावित व्यवस्था पर अंतिम सहमति बनने से पहले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संतोषजनक प्रगति आवश्यक होगी। पेरिस का कहना है कि जब तक प्रस्तावित समझौते की शर्तें उसकी सुरक्षा और कूटनीतिक अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होतीं, तब तक ईरान पर लागू संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को हटाने का समर्थन नहीं किया जाएगा।

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने शुक्रवार को इस विषय पर अपनी सरकार की स्थिति सामने रखते हुए कहा कि ईरान के साथ चल रही वार्ताओं में फ्रांस सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है चिंता
फ्रांसीसी विदेश मंत्री के अनुसार, वार्ता का दायरा सिर्फ ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी व्यापक और टिकाऊ समझौते में उन अन्य मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता का कारण रहे हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा से जुड़े कई पहलुओं पर भी स्पष्ट प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता है। फ्रांस का मानना है कि इन विषयों पर पर्याप्त आश्वासन के बिना किसी समझौते को पूर्ण नहीं माना जा सकता।
मिसाइल कार्यक्रम भी बना प्रमुख मुद्दा
पेरिस ने विशेष रूप से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को वार्ता के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। फ्रांस का तर्क है कि क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में मिसाइल क्षमताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फ्रांसीसी नेतृत्व का कहना है कि यदि भविष्य में किसी समझौते को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करनी है, तो ऐसे सभी सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इसी कारण फ्रांस व्यापक दृष्टिकोण के साथ बातचीत आगे बढ़ाने की वकालत कर रहा है।
क्षेत्रीय गतिविधियों पर भी नजर
फ्रांस ने यह भी संकेत दिया कि मध्य पूर्व में सक्रिय विभिन्न सहयोगी समूहों को मिलने वाले समर्थन का मुद्दा भी चर्चा का हिस्सा होना चाहिए। पेरिस का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्षों और तनावों को कम करने के लिए इन पहलुओं पर भी गंभीर विचार-विमर्श आवश्यक है।
विदेश मंत्री बैरोट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसे समझौते की अपेक्षा करता है जो केवल एक क्षेत्र विशेष की चिंता दूर न करे, बल्कि व्यापक सुरक्षा वातावरण को भी मजबूत बनाए। इसी उद्देश्य से फ्रांस वार्ता में संतुलित और व्यापक समाधान की पैरवी कर रहा है।
प्रतिबंधों पर जल्दबाजी के पक्ष में नहीं फ्रांस
फ्रांसीसी सरकार ने संकेत दिया है कि प्रतिबंधों में किसी भी प्रकार की ढील केवल तब संभव होगी जब सभी संबंधित मुद्दों पर पर्याप्त प्रगति और स्पष्ट सहमति दिखाई दे। पेरिस का मानना है कि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी निर्णय भविष्य में नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी बातचीत पर दुनिया की नजर बनी हुई है। ऐसे समय में फ्रांस का यह बयान बताता है कि यूरोपीय देशों की प्राथमिकताएं केवल परमाणु गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी समान महत्व दे रहे हैं।