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Milk Guide – पैकेट के रंग से समझें कौन सा दूध आपके लिए बेहतर…

Milk Guide – शहरों में पैकेट वाला दूध रोजमर्रा की खरीदारी का हिस्सा बन चुका है। बाजार में एक ही कंपनी के दूध के पैकेट अलग-अलग रंगों में दिखाई देते हैं, लेकिन इन रंगों का मतलब हर उपभोक्ता को पता हो, यह जरूरी नहीं है। पोषण विशेषज्ञ श्वेता पांचाल के अनुसार, कई बड़े ब्रांड अपने दूध के अलग-अलग प्रकार को पहचानने के लिए रंगों की कोडिंग का इस्तेमाल करते हैं और इसमें दूध की वसा मात्रा एक अहम आधार हो सकती है। हालांकि पैकेट के रंगों का कोई एक सार्वभौमिक नियम नहीं है, इसलिए खरीदारी करते समय केवल रंग देखने के बजाय पैकेट पर लिखी वसा प्रतिशत, पोषण संबंधी जानकारी और उत्पाद का प्रकार जरूर पढ़ना चाहिए।

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मैजेंटा या बैंगनी पैकेट में मिल सकता है कम वसा वाला दूध

कई ब्रांडों में मैजेंटा या बैंगनी रंग का पैकेट डबल टोंड दूध की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें सामान्य तौर पर करीब 1.5 प्रतिशत वसा हो सकती है, हालांकि वास्तविक मात्रा ब्रांड और उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है। कम वसा वाला दूध उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है जो अपने कुल आहार में वसा की मात्रा सीमित रखना चाहते हैं। दूसरी तरफ, दूध से मिलने वाले वसा-घुलनशील विटामिनों के संदर्भ में कम वसा वाले विकल्पों की पोषण संरचना अलग हो सकती है। इसलिए वजन कम करने के उद्देश्य से दूध चुनते समय केवल दूध की वसा नहीं, बल्कि पूरे दिन के भोजन और कुल कैलोरी सेवन को ध्यान में रखना अधिक जरूरी है।

नीला पैकेट अक्सर टोंड दूध की पहचान हो सकता है

नीले रंग के पैकेट में कई कंपनियां टोंड दूध बेचती हैं, जिसमें करीब 3 प्रतिशत वसा हो सकती है। भारतीय घरों में इस तरह का दूध काफी आम है और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए इसे कई परिवार पसंद करते हैं। चाय, कॉफी, दही या सामान्य भोजन में इस्तेमाल के लिहाज से यह उन लोगों के लिए व्यावहारिक विकल्प हो सकता है जिन्हें बहुत कम या बहुत अधिक वसा वाला दूध नहीं चाहिए। फिर भी रंग को अंतिम संकेत मानने के बजाय पैकेट पर दिए गए पोषण विवरण को देखना बेहतर है, क्योंकि अलग-अलग कंपनियों में रंगों की व्यवस्था बदल सकती है।

हरे पैकेट में हो सकता है स्टैंडर्ड दूध

हरे रंग का पैकेट कुछ ब्रांडों में स्टैंडर्ड दूध के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करीब 4.5 प्रतिशत वसा हो सकती है और कम वसा वाले दूध की तुलना में इसका स्वाद तथा बनावट अधिक गाढ़ी महसूस हो सकती है। वसा शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है और संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है, लेकिन किसी एक दूध को हार्मोनल स्वास्थ्य या पीसीओएस के लिए सीधे बेहतर बताना सही नहीं होगा। पीसीओएस जैसी स्थिति में खान-पान का चुनाव व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, वजन, रक्त शर्करा और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।

लाल या नारंगी पैकेट में मिल सकता है फुल क्रीम दूध

लाल या नारंगी रंग का पैकेट कई ब्रांडों में फुल क्रीम दूध के लिए देखा जाता है। ऐसे दूध में करीब 6 प्रतिशत तक वसा हो सकती है और इसकी बनावट अन्य कम वसा वाले विकल्पों की तुलना में अधिक मलाईदार होती है। अधिक वसा वाला दूध बच्चों और बढ़ती उम्र में पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार उपयोगी हो सकता है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इसकी मात्रा समान नहीं होनी चाहिए। मुंहासों से जूझ रहे लोगों में डेयरी और एक्ने के बीच संभावित संबंध पर शोध उपलब्ध है, लेकिन हर व्यक्ति में दूध से मुंहासे बढ़ेंगे, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।

अपनी जरूरत के अनुसार ऐसे चुनें दूध

दूध का चुनाव केवल पैकेट के रंग से करना सही तरीका नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह, इंसुलिन प्रतिरोध, पीसीओएस, अधिक वजन या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो उसकी व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार दूध का प्रकार तय होना चाहिए। दूध में मौजूद लैक्टोज रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकता है और वसा की मात्रा इस प्रक्रिया की गति पर असर डाल सकती है, लेकिन इससे फुल क्रीम दूध को मधुमेह के लिए स्वतः बेहतर विकल्प नहीं माना जा सकता। बच्चों, बुजुर्गों या किसी विशेष चिकित्सकीय स्थिति वाले व्यक्ति के लिए भी डॉक्टर या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह अधिक भरोसेमंद आधार है।

दुकान पर दूध खरीदते समय पैकेट का रंग केवल पहचान के लिए देखें और असली जानकारी के लिए लेबल पढ़ें। वसा प्रतिशत, प्रोटीन, ऊर्जा, अतिरिक्त सामग्री, पैकेजिंग की तारीख और उपयोग की अंतिम तारीख जैसी जानकारी देखकर फैसला करना अधिक सुरक्षित तरीका है। इस तरह पसंद, स्वास्थ्य जरूरत और आहार की कुल संरचना के आधार पर सही विकल्प चुना जा सकता है।

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