Fake Police Call Mystery: आगरा सीओ बनकर आईजी को फोन करने पर मचा हड़कंप, महंगी पड़ी किशोर की नादानी
Fake Police Call Mystery: कानपुर की गलियों से उठी एक आवाज ने उत्तर प्रदेश के होमगार्ड विभाग के आला अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए। जब आईजी होमगार्ड के मोबाइल की घंटी बजी, तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि (Identity Theft) का यह मामला कितना पेचीदा होगा। खुद को आगरा के लोहामंडी सर्किल का सीओ बताकर कॉल करने वाले ने जिस दबंगई से बात की, उसने कुछ समय के लिए पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया और अधिकारियों को आपातकालीन जांच के लिए मजबूर कर दिया।

मेरिट लिस्ट में सेंधमारी और रिश्वत की पेशकश
फोन करने वाले का इरादा नेक नहीं था। उसने सीधे तौर पर होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया की शुचिता को चुनौती दी। उसने आईजी से कहा कि उसके दो करीबियों को हर हाल में भर्ती कराना है और इसके लिए (Recruitment List Tampering) करने से भी पीछे न हटें। इतना ही नहीं, उसने इस अवैध काम के लिए उचित कीमत यानी रिश्वत देने की भी पेशकश की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वह विभाग के भीतर चल रही प्रक्रियाओं से वाकिफ था।
कानपुर से जुड़ा तार और आईजी की सक्रियता
आईजी होमगार्ड धर्मवीर सिंह ने इस कॉल को हल्के में नहीं लिया। उन्होंने तुरंत सर्विलांस टीम को सक्रिय किया और कॉल की लोकेशन ट्रेस करने के निर्देश दिए। जांच में जब यह पता चला कि कॉल आगरा से नहीं बल्कि कानपुर के (Digital Surveillance Tracking) के जरिए यशोदा नगर से की गई है, तो मामला और भी संदिग्ध हो गया। लखनऊ से मिले आदेशों के बाद स्थानीय पुलिस और होमगार्ड कमांडेंट ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।
पिता होमगार्ड और बेटा निकला मास्टरमाइंड
जब पुलिस यशोदा नगर पहुंची, तो सच्चाई सामने आने पर हर कोई दंग रह गया। इस पूरे ड्रामे के पीछे कोई शातिर अपराधी नहीं, बल्कि विभाग के ही एक होमगार्ड का 17 वर्षीय नाबालिग बेटा था। किशोर ने अपने पिता के (Home Guard Department) के कनेक्शन का फायदा उठाते हुए विभाग के बड़े अधिकारियों के नंबर हासिल किए थे। उसने मौज-मस्ती या शायद किसी लालच में आकर इतनी बड़ी हिमाकत कर दी कि सीधे आईजी को ही चूना लगाने की कोशिश की।
जीरो क्राइम नंबर से एफआईआर तक का सफर
होमगार्ड के कमांडेंट ने आईजी के आदेश पर गोविंदनगर थाने में जीरो क्राइम नंबर पर केस दर्ज कराया। चूंकि मामला कानपुर का था, इसलिए बुधवार को इसे नौबस्ता थाना क्षेत्र में (Jurisdiction Transfer) कर दिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उस किशोर को किसी और ने ऐसा करने के लिए उकसाया था या यह केवल उसकी एक बचकानी लेकिन गंभीर हरकत थी।
सरकारी तंत्र के साथ खिलवाड़ की सजा
यह घटना दिखाती है कि कैसे तकनीकी सुविधाओं का दुरुपयोग करके सरकारी व्यवस्था को ठप किया जा सकता है। पुलिस ने आरोपी के पिता से भी पूछताछ की है ताकि यह पता चल सके कि (Official Contact Information) आखिर एक नाबालिग तक कैसे पहुंची। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी है कि पुलिस अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
हालांकि यह कॉल फर्जी थी, लेकिन इसने भर्ती प्रक्रिया के दौरान होने वाली संभावित धांधलियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। विभाग अब अपनी (Security Protocols) की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में कोई भी बाहरी व्यक्ति भर्ती की चयन सूची को प्रभावित करने का साहस न कर सके। आरोपी किशोर के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड के नियमों के तहत कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।



