Jharkhand Sports Science Center Expansion: अब केवल पसीना नहीं, बल्कि विज्ञान जिताएगा मेडल…
Jharkhand Sports Science Center Expansion: झारखंड के खेल जगत में एक क्रांतिकारी युग की शुरुआत होने जा रही है। राज्य सरकार ने फैसला किया है कि अब खिलाड़ियों की जीत केवल उनकी कड़ी मेहनत पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित होगी। इसी विजन के साथ राज्य के चार प्रमुख प्रमंडलों—उत्तरी छोटानागपुर, कोल्हान, संताल और पलामू—में अत्याधुनिक (Sports Science Technology) केंद्रों की स्थापना की जाएगी। दक्षिण छोटानागपुर के रांची में पहले से ही एक हाई परफॉर्मेंस सेंटर सफलता के झंडे गाड़ रहा है, और अब इसी मॉडल को पूरे राज्य में विस्तार देने की तैयारी है।

चोट से सुरक्षा और मांसपेशियों का सही विकास
आधुनिक खेलों की दुनिया में एक छोटी सी चोट खिलाड़ी का पूरा करियर बर्बाद कर सकती है। इन केंद्रों का प्राथमिक उद्देश्य खिलाड़ियों को चोट से बचाना और उन्हें (Injury Prevention Techniques) में माहिर बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही उम्र में मांसपेशियों का विकास और ओवर-ट्रेनिंग से बचाव ही एक एथलीट को लंबी रेस का घोड़ा बनाता है। सरकार का लक्ष्य इसी सत्र से इन सुविधाओं को जमीन पर उतारना है, ताकि सीनियर स्तर पर झारखंड के खिलाड़ियों का दबदबा बढ़ सके।
विशेषज्ञों की टीम और खिलाड़ियों का फिटनेस असेसमेंट
इन केंद्रों की सबसे बड़ी खासियत यहाँ मौजूद रहने वाली तकनीकी टीम होगी। हर सेंटर पर प्रोफेशनल फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और (Athlete Strength and Conditioning) एक्सपर्ट्स की तैनाती की जाएगी। ये विशेषज्ञ न केवल खिलाड़ियों की डाइट और मेंटल स्ट्रेंथ पर काम करेंगे, बल्कि प्रशिक्षण से पहले और बाद में उनका फिटनेस असेसमेंट भी करेंगे। इससे खिलाड़ियों की शारीरिक कमजोरियों को पहचानना आसान होगा और उन्हें उसी अनुरूप विशेष अभ्यास कराया जा सकेगा।
घर के पास ही मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण
सरकार की योजना इन केंद्रों को खिलाड़ियों की पहुंच के भीतर रखने की है। सेंटर के विशेषज्ञ अपने आधुनिक उपकरणों के साथ समय-समय पर (Regional Training Hubs) का दौरा करेंगे। इससे खिलाड़ियों को दूर जाने की जरूरत नहीं होगी और उन्हें उनके अभ्यास स्थल पर ही वैज्ञानिक सुविधाएं मिल जाएंगी। हालांकि, अगर कोई गंभीर स्थिति या जटिल समस्या सामने आती है, तो खिलाड़ियों को तुरंत रांची स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर रेफर करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
खेल मंत्री का विजन और अंक तालिका में बढ़त की उम्मीद
खेल मंत्री सुदिव्य कुमार का मानना है कि झारखंड को पदक तालिका में शीर्ष पर ले जाने के लिए पुरानी प्रणालियों को छोड़ना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि (Scientific Coaching Methodology) को अपनाकर ही हम आज की प्रतिस्पर्धा में टिक सकते हैं। मंत्री के अनुसार, इन केंद्रों के माध्यम से ‘बैटरी टेस्ट’ जैसी परंपरागत विधियों के बजाय आधुनिक तकनीक का उपयोग होगा। इससे न केवल खिलाड़ियों का प्रदर्शन निखरेगा, बल्कि पदक तालिका में राज्य की स्थिति भी काफी मजबूत होगी।
उम्र की धोखाधड़ी और सही खेल के चुनाव में मदद
इन स्पोर्ट्स साइंस सेंटरों का एक बड़ा लाभ खिलाड़ियों के सही खेल के चुनाव में होगा। विशेषज्ञ डेटा के आधार पर यह पता लगाएंगे कि कौन सा खिलाड़ी (Athletic Talent Identification) के तहत किस विशेष खेल के लिए शारीरिक रूप से उपयुक्त है। इसके अतिरिक्त, साइंटिफिक टेस्टिंग से खिलाड़ियों के ‘ओवरएज’ होने की समस्या पर भी प्रभावी लगाम लगेगी। इससे सही उम्र के खिलाड़ियों को सही समय पर सही मंच और प्रशिक्षण मिल सकेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
ओलंपिक और साई सेंटर के मॉडल पर होगी निगरानी
झारखंड के ये प्रस्तावित केंद्र देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) के मॉडल पर काम करेंगे। यहाँ (Data Analytics in Sports) का उपयोग करके खिलाड़ियों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। बायोमैकेनिक्स और कस्टमाइज्ड न्यूट्रिशन प्लान के जरिए खिलाड़ियों की रिकवरी को तेज किया जाएगा। यह कदम झारखंड को देश का एक प्रमुख ‘स्पोर्ट्स हब’ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।



