उत्तराखण्ड

Free Board Exam Coaching Haldwani: क्या छात्र भूल रहे हैं सफलता का शॉर्टकट, जानें हल्द्वानी की इस अनोखी पहल का सच…

Free Board Exam Coaching Haldwani: हल्द्वानी में शिक्षा के प्रति एक अनूठी और निस्वार्थ सेवा की शुरुआत हुई है, जहां बोर्ड परीक्षाओं की दहलीज पर खड़े छात्रों के लिए शिक्षकों ने अपने आराम का त्याग किया है। शुक्रवार को शिक्षकों ने बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए निशुल्क कक्षाओं का संचालन शुरू किया, लेकिन विडंबना यह रही कि बच्चों में इसके प्रति अपेक्षित उत्साह नजर नहीं आया। दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों और गांवों से (Educational Social Responsibility) के भाव के साथ लगभग 50 शिक्षक कड़ाके की ठंड के बावजूद पढ़ाने के लिए स्कूल पहुंचे। हालांकि, इन समर्पित गुरुओं के सामने केवल 20 छात्र ही उपस्थित हुए, जो शिक्षा के प्रति वर्तमान रुझान पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।

Free Board Exam Coaching Haldwani
Free Board Exam Coaching Haldwani

पीएमश्री स्कूल में सफलता की पाठशाला

कालाढूंगी रोड स्थित पीएमश्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज को इस ज्ञान अभियान का केंद्र बनाया गया है। राजकीय शिक्षक संघ द्वारा आयोजित इस अभियान का मकसद उन छात्रों की मदद करना है जो संसाधनों के अभाव में बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी ठीक से नहीं कर पाते हैं। आयोजक मंडल के डॉ. प्रमोद कुमार ने स्पष्ट किया कि (Academic Excellence Preparation) का यह अवसर केवल सरकारी स्कूल के बच्चों तक सीमित नहीं है। इसमें निजी स्कूलों के 10वीं और 12वीं के छात्र-छात्राएं भी आकर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। यह अभियान 13 जनवरी तक निरंतर चलेगा ताकि छात्रों को परीक्षा पूर्व का डर निकालने में मदद मिल सके।

कड़ाके की ठंड बनाम सुनहरे भविष्य की उम्मीद

हल्द्वानी और आसपास के इलाकों में इन दिनों जबरदस्त ठंड पड़ रही है, लेकिन यह मौसम उन 50 शिक्षकों के हौसलों को नहीं डिगा सका जो मिलों का सफर तय कर पढ़ाने पहुंचे थे। पहले दिन की उपस्थिति का आंकड़ा काफी निराशाजनक रहा, जहां (Student Enrollment Challenges) की वजह से केवल 20 बच्चे ही डेस्क पर नजर आए। इनमें से 12 छात्र हाईस्कूल के थे, जिन्हें शिक्षकों ने पूरी तन्मयता के साथ पढ़ाया। शिक्षकों ने न केवल उपस्थित छात्रों की शंकाओं का समाधान किया, बल्कि अनुपस्थित रहने वाले बच्चों को भी इस पहल से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही।

अभिभावकों और प्रधानाचार्यों के नाम विशेष संदेश

राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष गिरीश जोशी ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए समुदाय से सहयोग की अपील की है। उन्होंने जनपद के सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे (Board Exam Strategy Guidance) के इस दो सप्ताह के निशुल्क सत्र का लाभ बच्चों को जरूर दिलवाएं। विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही यह कोचिंग परीक्षाओं में न केवल बेहतर अंक दिलाने में सहायक होगी, बल्कि छात्रों का आत्मविश्वास भी बढ़ाएगी। सुबह नौ बजे से शुरू होने वाली ये कक्षाएं समय प्रबंधन और उत्तर लिखने की कला सीखने का एक बेहतरीन मंच हैं।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ ज्ञान यज्ञ का आगाज

इस महत्वपूर्ण शैक्षिक पहल का विधिवत शुभारंभ खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) तारा सिंह द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध जन और (Community Leadership Engagement) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत गौनिया, अमित रस्तोगी, रेंजर मुकुल शर्मा और आरके सक्सेना जैसी हस्तियों ने शिक्षकों के इस प्रयास की सराहना की। सभी उपस्थित अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा ही एकमात्र हथियार है और शिक्षकों द्वारा दी जा रही यह निशुल्क सेवा सराहनीय है।

परीक्षाओं के दबाव को कम करने का प्रयास

बोर्ड परीक्षाएं आते ही छात्रों और उनके परिवारों पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में शिक्षकों का यह समूह (Mental Stress Management) और विषय आधारित कठिन अवधारणाओं को सरल बनाने के लिए आगे आया है। नवीन कपिल, रवि शंकर लोशाली और अशोक कटारिया जैसे वरिष्ठ शिक्षकों का मानना है कि यदि छात्र इन कक्षाओं में नियमित रूप से आते हैं, तो वे अपनी कमजोरी वाले विषयों पर पकड़ मजबूत कर सकेंगे। शिक्षकों ने दूर-दराज के क्षेत्रों से आकर यह साबित किया है कि एक गुरु के लिए छात्र का भविष्य ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

क्या छात्र उठा पाएंगे इस अवसर का लाभ?

शिक्षण के इस महायज्ञ में शिक्षकों ने अपनी आहुति दे दी है, अब बारी छात्रों और उनके माता-पिता की है। 13 जनवरी तक चलने वाला यह (Student Learning Support) कार्यक्रम एक ऐसा अवसर है जो हर साल नहीं आता। यदि छात्र अब भी उदासीन बने रहते हैं, तो यह उन शिक्षकों के समर्पण का अपमान होगा जो केवल छात्रों की भलाई के लिए सर्द रातों और बर्फीली हवाओं के बीच सफर कर रहे हैं। हल्द्वानी के इस अभियान की सफलता अब सीधे तौर पर छात्रों की भागीदारी पर निर्भर करती है।

शिक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान

अंत में, यह समझना आवश्यक है कि शिक्षा केवल स्कूलों की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। हल्द्वानी के शिक्षकों ने एक मिसाल पेश की है, लेकिन इसकी पूर्ण सफलता (Collective Educational Initiative) के बिना संभव नहीं है। समाज के हर वर्ग को चाहिए कि वे अपने आसपास रहने वाले 10वीं और 12वीं के छात्रों को इन निशुल्क कक्षाओं के बारे में जानकारी दें। जब शिक्षक पढ़ाने के लिए तैयार हैं, तो छात्रों को भी अपनी सफलता की कहानी लिखने के लिए कदम बढ़ाना ही होगा।

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