Naxal Free India Campaign 2026: क्या 2026 में सदा के लिए खामोश हो जाएंगी नक्सलियों की बंदूकें…
Naxal Free India Campaign 2026: भारत के नक्शे से नक्सलवाद के काले धब्बों को मिटाने के लिए सुरक्षा बलों ने अब अपने अभियान के सबसे निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है। नक्सल प्रभावित इलाकों को पूरी तरह हिंसा मुक्त करने की दिशा में (Strategic Intelligence Mapping) का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, ताकि जंगलों के छिपे हुए कोनों से भी दहशतगर्दों का नामोनिशान मिटाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियां अब गांव-गांव जाकर सघन तलाशी अभियान चला रही हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बस्ती या पहाड़ी इलाके में कोई भी नक्सली या उनके मददगार बचे न रह जाएं।

जनवरी का महीना और सुरक्षा बलों की चक्रव्यूह रचना
रणनीतिक दृष्टिकोण से सुरक्षा अधिकारियों ने जनवरी के इस महीने को बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील करार दिया है। सुरक्षा बलों की योजना है कि जहां कहीं भी नक्सलियों की मौजूदगी के रत्ती भर भी खुफिया इनपुट मिलते हैं, उनकी (Targeted Area Operations) के जरिए तत्काल घेराबंदी की जाए और इसी महीने के भीतर निर्णायक एक्शन लिया जाए। अधिकारियों का मानना है कि इस समय की गई सक्रियता नक्सलियों के बचे-कुचे हौसलों को पूरी तरह पस्त कर देगी, जिससे वे दोबारा संगठित होने की स्थिति में नहीं रहेंगे।
जीरो इंसिडेंट लक्ष्य और आईईडी की गहन छानबीन
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का एकमात्र लक्ष्य अब ‘जीरो इंसिडेंट’ यानी शून्य हिंसा की स्थिति हासिल करना है। इसके लिए केवल नक्सलियों को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि (Hidden Weapon Cache) और जमीन के नीचे दबे घातक आईईडी को ढूंढ निकालना भी प्राथमिकता बन गया है। जिन इलाकों को पहले ही नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है, वहां भी सुरक्षा बल दोबारा गहन छानबीन कर रहे हैं ताकि भविष्य में किसी भी निर्दोष नागरिक या जवान को किसी छिपी हुई बारूदी सुरंग का शिकार न होना पड़े।
बिखरता नेटवर्क और पस्त होते नक्सलियों के इरादे
पिछले कुछ समय में सुरक्षाबलों द्वारा की गई चौतरफा कार्रवाई का असर अब धरातल पर साफ दिखाई देने लगा है। सघन सर्च ऑपरेशन और एरिया डॉमिनेशन की वजह से (Naxal Logistics Network) पूरी तरह बिखर चुका है, जिससे उनकी रसद और सूचना तंत्र की कमर टूट गई है। यही कारण है कि हाल के दिनों में आईईडी ब्लास्ट और आम नागरिकों की हत्या जैसी कायराना घटनाओं में भारी कमी आई है। अपनी हार सामने देखकर अब कई नक्सली या तो पकड़े जा रहे हैं या फिर मुख्यधारा में लौटने के लिए आत्मसमर्पण का रास्ता चुन रहे हैं।
दिल्ली की पैनी नजर और साप्ताहिक रिपोर्टिंग का सिलसिला
नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे इस महा-अभियान की कमान अब सीधे तौर पर केंद्र सरकार के हाथों में है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हर सप्ताह एक विस्तृत (National Security Report) तैयार कर गृह मंत्रालय को भेजी जा रही है, ताकि जमीनी हकीकत का पल-पल का आकलन किया जा सके। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और माना जा रहा है कि वे इसी महीने छत्तीसगढ़ का दौरा कर सकते हैं, जहां वे आखिरी चरण के ऑपरेशन्स की समीक्षा करेंगे और आगे की रूपरेखा तय करेंगे।
आंकड़ों की जुबानी नक्सलियों की हार की कहानी
बीता साल नक्सलियों के लिए काल बनकर आया है और सुरक्षा बलों की सफलता के आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। वर्ष 2025 में अब तक की गई (Anti Naxal Combat) कार्यवाहियों में 317 नक्सलियों को ढेर किया जा चुका है, जो सुरक्षा बलों की वीरता का प्रमाण है। इसके अलावा 862 नक्सलियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है, जबकि 1,973 नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा पर भरोसा जताते हुए अपने हथियार डाल दिए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि अब नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और भारत एक नए शांतिपूर्ण युग की ओर बढ़ रहा है।
नक्सल मुक्त भारत के सपने को साकार करने की चुनौती
एक आला अधिकारी ने गर्व के साथ कहा है कि हम नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य के एकदम करीब खड़े हैं। हालांकि, बचे हुए संदिग्ध इलाकों को चिन्हित करना और वहां (Insurgent Infrastructure Dismantling) की प्रक्रिया को पूरा करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। हर तरह से संतुष्ट होने के बाद ही इन इलाकों को आधिकारिक रूप से मुक्त घोषित किया जाएगा। सरकार की मंशा साफ है कि इस बार प्रहार इतना गहरा हो कि दोबारा कभी इन शांत वादियों में बारूद की गंध न आए और विकास की बयार हर आदिवासी गांव तक पहुंच सके



