Indian Army Rocket and Missile Force: जनरल द्विवेदी ने भरी हुंकार, अब भारत बनाएगा अपनी खूंखार रॉकेट फोर्स
Indian Army Rocket and Missile Force: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की रक्षा तैयारियों को लेकर एक ऐसी रणनीति साझा की है, जिसने दुश्मनों की नींद उड़ा दी है। सेना दिवस से पहले आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अब एक समर्पित रॉकेट और मिसाइल फोर्स की सख्त जरूरत है। सेना प्रमुख के अनुसार, चूंकि चीन और पाकिस्तान (Strategic missile force development) को पहले ही धरातल पर उतार चुके हैं, इसलिए भारत के लिए भी यह समय की मांग बन चुकी है। यह बल न केवल लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता रखेगा, बल्कि युद्ध के मैदान में भारत को वह मनोवैज्ञानिक और सामरिक बढ़त दिलाएगा जो आधुनिक दौर की लड़ाइयों के लिए अनिवार्य है।

पिनाका और प्रलय से बढ़ेगी प्रहार क्षमता
भारत की मारक क्षमता को धार देने के लिए पिनाका रॉकेट सिस्टम और प्रलय जैसी मिसाइलें मील का पत्थर साबित हो रही हैं। जनरल द्विवेदी ने बताया कि पिनाका की रेंज को बढ़ाकर अब 120 किलोमीटर तक कर दिया गया है, जो सीमा पार बैठे दुश्मनों के ठिकानों को तबाह करने के लिए काफी है। इस (Modern artillery precision strikes) तकनीक पर सरकार भी पूरी तरह सहमत है और जल्द ही इस बात पर अंतिम मुहर लगेगी कि यह फोर्स सेना के सीधे अधीन होगी या रक्षा मंत्रालय इसे नियंत्रित करेगा। स्वदेशी तकनीक से लैस ये प्रणालियां भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ एक आक्रामक प्रतिरोधक शक्ति के रूप में स्थापित कर रही हैं।
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स का ऐतिहासिक गठन
सेना ने अपनी संगठनात्मक संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स यानी आईबीजी के गठन को हरी झंडी दे दी है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों के आधार पर सेना अब छोटी लेकिन बेहद घातक यूनिट्स के माध्यम से जंग लड़ने की तैयारी में है। मेजर जनरल स्तर के अधिकारी की कमान में (Military combat effectiveness) बढ़ाने वाली इन 16 विशेष यूनिटों को मिलाकर समूह बनाए जाएंगे। यह प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई थी, लेकिन अब इसे तेजी से लागू किया जा रहा है। ये ग्रुप्स किसी भी आपात स्थिति में बहुत कम समय के भीतर अपनी तैनाती और प्रहार करने की क्षमता रखते हैं।
लंबी लड़ाई और नई ब्रिगेडों का उदय
भारतीय सेना प्रमुख ने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की तैयारियां किसी अल्पकालिक ऑपरेशन के लिए नहीं, बल्कि लंबी चलने वाली जंग के लिए भी पुख्ता हैं। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए (Army structure reorganisation) के तहत भैरव, शक्तिमान, दिव्यास्त्र और रुद्र जैसी नई ब्रिगेडों का गठन किया जा रहा है। इन इकाइयों को विशेष युद्ध कौशल और अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया जाएगा। इसके साथ ही सेना के ट्रेनिंग कमांड का विस्तार किया जा रहा है ताकि हमारे जवान आने वाली तकनीकी और रणनीतिक चुनौतियों का सामना वैश्विक मानकों के अनुसार कर सकें।
ड्रोन का बढ़ता खतरा और टेक्नो-कमांडर्स की फौज
सीमा पार से होने वाली ड्रोन घुसपैठ भारत के लिए एक नई और जटिल चुनौती बनकर उभरी है। जनरल द्विवेदी ने खुलासा किया कि पाकिस्तान की सीमा पर फिलहाल करीब 10 हजार ड्रोन सक्रिय हैं, जिनकी संख्या भविष्य में एक लाख तक पहुंच सकती है। इस खतरे से निपटने के लिए भारतीय सेना अब (Anti drone defense systems) को मजबूत कर रही है और छोटे व आधुनिक रडार तैनात किए जा रहे हैं। सेना के भीतर अब विशेष ‘टेक्नो-कमांडर’ तैयार किए जा रहे हैं जो तकनीकी युद्ध में माहिर होंगे। हाल ही में सेना ने 100 किलोमीटर तक मार करने वाले स्वदेशी ड्रोन का सफल परीक्षण भी किया है।
पाकिस्तान को डीजीएमओ स्तर की दो टूक चेतावनी
ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। मंगलवार को दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हुई बातचीत में भारत ने ड्रोन घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं पर सख्त ऐतराज जताया। जनरल द्विवेदी के अनुसार, हाल ही में (Border surveillance and security) के दौरान जम्मू क्षेत्र में कई ड्रोन देखे गए हैं, जिनका मकसद घुसपैठ के रास्ते तलाशना था। सेना ने एक मुठभेड़ स्थल से पाकिस्तानी ड्रोन द्वारा गिराए गए हथियार भी बरामद किए हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमा पर ऐसी नापाक गतिविधियां किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं और पाकिस्तान को इन पर तुरंत लगाम लगानी होगी।
घाटी में आतंक का सफाया और विदेशी कनेक्शन
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति पर बात करते हुए सेना प्रमुख ने बताया कि घाटी में सेना का दबदबा कायम है और आतंकवाद अपनी अंतिम सांसें ले रहा है। साल 2025 में अब तक 36 आतंकियों को मौत के घाट उतारा जा चुका है, जिनमें से 65 प्रतिशत विदेशी यानी पाकिस्तानी मूल के थे। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि (Terrorism in Jammu Kashmir) को हवा देने में पड़ोसी देश का हाथ आज भी पूरी तरह सक्रिय है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घाटी में तैनात सैनिकों की संख्या में कोई कमी नहीं की जाएगी ताकि शांति का माहौल बना रहे।
पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों पर पैनी नजर
पड़ोस में बदलती राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों पर भारत की गहरी नजर है, विशेषकर पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकी को लेकर। पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश को हथियार सप्लाई करने की खबरों पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत हर स्थिति की निगरानी कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि (India Bangladesh defense relations) आज भी मजबूत हैं और बांग्लादेश की सेना भारत के खिलाफ नहीं है। सेना प्रमुख का मानना है कि वर्तमान में बांग्लादेश में लिए जा रहे कुछ निर्णय अस्थायी हो सकते हैं और वहां की स्थायी सरकार के आने पर स्थितियां और भी स्पष्ट होंगी।
सेना में ‘काली माता’ के स्वरूप वाली महिला अफसर
लैंगिक समानता के बजाय लैंगिक तटस्थता की बात करते हुए सेना प्रमुख ने महिला अधिकारियों की भूमिका पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सेना को ऐसी महिला अफसरों की जरूरत है जो शौर्य और शक्ति में ‘काली माता’ का प्रतीक हों। सेना का मुख्य उद्देश्य (Women in combat roles) को बढ़ावा देना है, जहां योग्यता ही एकमात्र पैमाना हो। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि युद्धक शाखाओं में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी के लिए कुछ व्यावहारिक और शारीरिक मानकों की चुनौतियों को समझना होगा। सेना का लक्ष्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां महिला और पुरुष अधिकारी कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मन का मुकाबला कर सकें।



