Iran Protest Attack Los Angeles: सात समंदर पार भी सुरक्षित नहीं है ईरान के बागियों की आवाज, किसने की भीड़ को कुचलने की कोशिश…
Iran Protest Attack Los Angeles: अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रविवार का दिन उस वक्त खौफ के साये में सिमट गया, जब ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में उतरी एक भीड़ को बेरहमी से कुचलने की कोशिश की गई। वेस्टवुड के विल्शायर फेडरल बिल्डिंग के बाहर हजारों लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे, तभी एक यू-हॉल ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर भीड़ में घुस गया। इस (violent vehicle ramming) की घटना ने वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों के बीच भगदड़ मचा दी, जिसमें कई लोग बुरी तरह घायल हो गए। जो लोग अपने वतन की आजादी के लिए नारेबाजी कर रहे थे, उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि अमेरिका की धरती पर उन पर इस तरह का जानलेवा हमला होगा।

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी और भीड़ का गुस्सा
घटनास्थल पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई की और ट्रक चालक को मौके से ही धर दबोचा। जैसे ही पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया, वहां मौजूद आक्रोशित भीड़ ने कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश की। कई प्रदर्शनकारी ट्रक से बाहर खींचे गए शख्स पर टूट पड़े और उसे (Iran Protest Attack Los Angeles) का शिकार बनाने ही वाले थे कि पुलिस ने बीच-बचाव कर उसे सुरक्षित निकाला। फिलहाल आरोपी पुलिस की कस्टडी में है और उससे पूछताछ की जा रही है कि इस जघन्य कृत्य के पीछे उसका असली मकसद और किसी संगठन का हाथ तो नहीं था।
ट्रक पर लिखे नारों ने खोला साजिश का राज
इस हमले में इस्तेमाल किए गए ट्रक ने जांचकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि उसकी बॉडी पर ईरान की राजनीति से जुड़े विवादित संदेश लिखे हुए थे। ट्रक के एक हिस्से पर साफ तौर पर लिखा था कि शाह के बिना कोई सरकार संभव नहीं है और अमेरिका को 1953 की गलती नहीं दोहरानी चाहिए। यह (political message analysis) सीधे तौर पर 1953 के उस अमेरिकी तख्तापलट की ओर इशारा करता है, जिसने ईरान के तत्कालीन प्रधानमंत्री को हटाकर शाह को सत्ता सौंपी थी। नारों से स्पष्ट होता है कि यह हमला महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गहरी वैचारिक नफरत और सोची-समझी साजिश का नतीजा था।
ईरान में मौत का तांडव और इंटरनेट पर पाबंदी
ईरान की धरती पर पिछले दो हफ्तों से जो संग्राम छिड़ा हुआ है, उसने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। राजधानी तेहरान समेत देश के तमाम बड़े शहरों में लोग सड़कों पर हैं, जहाँ सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहां की सरकार ने विरोध की आवाज को दबाने के लिए (internet communication blackout) लागू कर दिया है, जिससे दुनिया को जमीनी हकीकत का सही अंदाजा नहीं लग पा रहा है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि मरने वालों का आंकड़ा 116 पार कर चुका है और हजारों युवाओं को जेलों में ठूंस दिया गया है।
डोनाल्ड ट्रंप की धमकी और अमेरिका का रुख
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालातों पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया पर अपना समर्थन जाहिर किया है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि (international humanitarian support) के तहत अमेरिका उन लोगों के साथ खड़ा है जो अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है और इसे ईरान के आंतरिक मामलों में अमेरिका के सीधे हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान की दोटूक चेतावनी: इजरायल भी होगा निशाना
अमेरिका की धमकियों पर पलटवार करते हुए ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने बेहद आक्रामक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान की संप्रभुता पर हमला करने की हिमाकत की, तो मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सेना और इजरायल उनके (legitimate military targets) बन जाएंगे। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में झुकने वाला नहीं है। तेहरान के इस तेवर ने इजरायल की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं, क्योंकि क्षेत्र में युद्ध के बादल अब और गहरे होते जा रहे हैं।
मानवाधिकारों का हनन और वैश्विक खामोशी पर सवाल
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में अब तक 2,600 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। जिस तरह से निहत्थे लोगों पर बल प्रयोग किया जा रहा है, वह (human rights violations) की श्रेणी में आता है। लॉस एंजिल्स की रैली इसी दमन के खिलाफ एक वैश्विक एकजुटता का प्रतीक थी, जिसे ट्रक हमले के जरिए कुचलने का प्रयास किया गया। सवाल यह उठता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा या इन मासूमों की जान बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा?
क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट है?
ईरान में जारी आंतरिक विद्रोह अब एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक युद्ध में बदल चुका है। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपनी आजादी के लिए जान दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच (global geopolitical tension) अपने चरम पर है। लॉस एंजिल्स की घटना ने यह साबित कर दिया है कि यह आग अब ईरान की सीमाओं को पार कर पश्चिमी देशों के आंगन तक पहुंच गई है। यदि संवाद के रास्ते जल्द नहीं खुले, तो यह क्षेत्रीय तनाव एक बड़े वैश्विक संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसकी कीमत पूरी इंसानियत को चुकानी पड़ेगी।



