उत्तराखण्ड

Dehradun Youth Suicide Case 2026: डिप्रेशन की आग में जलकर राख हुआ 30 साल का युवक, अपनों के सामने ही ली आखिरी सांस

Dehradun Youth Suicide Case 2026: उत्तराखंड की शांत वादियों के बीच देहरादून से एक ऐसी विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। शहर के गल्जवाड़ी इलाके में एक 30 वर्षीय युवक ने बंद कमरे में खुद को आग के हवाले कर जीवन लीला समाप्त कर ली। यह (Tragic Dehradun Incident) उस समय सामने आया जब रविवार की रात घर के बाकी सदस्य अपने कामों में व्यस्त थे। मौत का यह तरीका इतना खौफनाक था कि आसपास के लोग भी इस घटना के बारे में सुनकर दहल उठे हैं।

Dehradun Youth Suicide Case 2026
Dehradun Youth Suicide Case 2026

धुएं के गुबार ने खोला मौत का राज

घटनाक्रम के अनुसार, सिद्धांत ममगईं ने रविवार की रात खुद को अपने कमरे के भीतर कैद कर लिया था। परिजनों को शुरुआत में लगा कि वह सोने गया है, लेकिन कुछ ही देर बाद (Fire Accident Suspicion) की स्थिति तब पैदा हुई जब कमरे के दरवाजों और खिड़कियों से काला धुआं बाहर निकलने लगा। परिवार वालों ने अनहोनी की आशंका में तुरंत शोर मचाया और दरवाजा तोड़ने का प्रयास शुरू किया। चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी भी मदद के लिए दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।


परिजनों के सामने ही दम तोड़ गया सिद्धांत

जैसे ही परिजनों ने कड़ी मशक्कत के बाद कमरे का दरवाजा तोड़ा, अंदर का नजारा रूह कंपा देने वाला था। 30 साल का सिद्धांत आग की लपटों से घिरा हुआ था और कमरा धुएं से भरा था। हालांकि (Immediate Rescue Attempt) के तहत आग बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन आग इतनी भयावह थी कि वह बुरी तरह झुलस चुका था। मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया और परिवार के सदस्य बेबस होकर उसे अपनी आंखों के सामने खत्म होते देखते रह गए।


पिता के साये के बिना अधूरा था संसार

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि सिद्धांत के पिता का निधन काफी समय पहले ही हो चुका था। वह घर में अपनी मां और भाई के साथ रहता था। परिवार की (Emotional Family Support) के बावजूद सिद्धांत खुद को अकेला महसूस कर रहा था। घर के मुखिया के चले जाने के बाद शायद वह खुद को आर्थिक या मानसिक रूप से असुरक्षित महसूस करने लगा था, जिसका असर उसके व्यवहार पर भी पड़ रहा था।


डिप्रेशन की काली छाया और मानसिक तनाव

सिद्धांत अभी अविवाहित था और पिछले कुछ समय से वह गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा था। परिजनों ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि (Clinical Depression Struggle) के कारण वह अक्सर शांत रहता था और किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। समाज और भविष्य की चिंताओं ने उसे भीतर ही भीतर इतना तोड़ दिया था कि उसने अपनी परेशानी साझा करने के बजाय मौत को गले लगाना ज्यादा आसान समझा।


पुलिस ने कब्जे में लिया शव

घटना की सूचना मिलते ही कैंट कोतवाली के इंस्पेक्टर केके लुंठी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने रविवार रात को ही घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और (Forensic Evidence Collection) के बाद शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी भिजवाया। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कमरे के अंदर आग लगाने के लिए ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। मौके से सुसाइड नोट की भी तलाश की गई है ताकि स्पष्ट वजह सामने आ सके।


पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्यवाही

सोमवार की सुबह पुलिस ने सिद्धांत के शव का पंचनामा भरा और फिर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। (Official Post Mortem Report) आने के बाद ही मौत के सही कारणों और आग लगने की तीव्रता का तकनीकी खुलासा हो पाएगा। पुलिस का प्राथमिक तौर पर यही मानना है कि यह आत्महत्या का मामला है, जिसका एकमात्र कारण युवक की बिगड़ती हुई मानसिक स्थिति थी। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।


कैंट पुलिस की विस्तृत जांच जारी

इंस्पेक्टर केके लुंठी के नेतृत्व में पुलिस की टीम अब परिवार के अन्य सदस्यों और पड़ोसियों के बयान दर्ज कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या (Mental Health Counseling) के लिए सिद्धांत ने कभी किसी डॉक्टर से सलाह ली थी या वह किसी खास वजह से परेशान था। पुलिस उसके मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर सकती है ताकि डिप्रेशन के ट्रिगर पॉइंट का पता लगाया जा सके।


बढ़ते सुसाइड केस और सामाजिक सरोकार

देहरादून जैसी जगहों पर युवाओं में बढ़ते आत्महत्या के मामले एक गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि (Suicide Prevention Awareness) की कमी और मानसिक रोगों को लेकर समाज में फैली झिझक के कारण युवा समय पर मदद नहीं ले पाते। सिद्धांत के मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिप्रेशन को नजरअंदाज करना कितना जानलेवा साबित हो सकता है। समाज को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।


परिवार में छाया मातम का सन्नाटा

जवान बेटे की इस तरह दर्दनाक मौत से मां और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में शोक की लहर है और हर कोई (Grieving Family Members) के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहा है। सिद्धांत की मौत ने कई सवाल पीछे छोड़ दिए हैं कि क्या वक्त रहते उसे तनाव से बाहर निकाला जा सकता था? फिलहाल पुलिस अपनी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर रही है और परिवार अब अपने घर के चिराग के बुझने के गम में डूबा हुआ है।

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