Preserving Green Peas for Long Time: महंगे भाव से छुट्टी! अब साल भर उठाइए ताजी हरी मटर का लुत्फ
Preserving Green Peas for Long Time: सर्दियों का मौसम अपने साथ ताजी और मीठी हरी मटर की बहार लेकर आता है, लेकिन जैसे ही सर्दियां विदा होती हैं, बाजार से यह स्वाद भी गायब होने लगता है। ऑफ-सीजन में फ्रोजन मटर खरीदना न केवल जेब पर भारी पड़ता है, बल्कि उनमें वह ताजगी भी नहीं होती जो घर पर स्टोर की गई मटर में मिल सकती है। यदि आप (Fresh Green Peas Season) का आनंद पूरे साल उठाना चाहते हैं, तो मटर को स्टोर करने की सही तकनीक जानना बेहद जरूरी है। सही तरीके से स्टोर की गई मटर न केवल अपनी मिठास बरकरार रखती है, बल्कि पकने के बाद उसका रंग भी बिल्कुल कुदरती हरा बना रहता है।

मटर के चुनाव और शुरुआती तैयारी का खास तरीका
एक बेहतरीन स्टोरेज के लिए सबसे पहला कदम सही मटर का चुनाव करना है। कोशिश करें कि आप लगभग 2.5 से 3 किलो एकदम ताजी और भरी हुई फलियां लें। मटर छीलते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि (Sorting and Grading Peas) की प्रक्रिया सही से हो, यानी कोई भी सड़ा हुआ, पीला या बेहद छोटा दाना बाकी मटर के साथ न मिले। एक भी खराब दाना पूरे कंटेनर को खराब कर सकता है। छीलने के बाद मटर को एक बार साफ पानी से धो लें ताकि धूल और बाहरी गंदगी पूरी तरह साफ हो जाए।
चीनी और नमक के पानी का जादुई उबाल
मटर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे एक विशेष घोल में उबालना पड़ता है। एक बड़े पतीले में करीब 2 लीटर पानी लें और उसमें 2 बड़े चम्मच नमक और इतनी ही मात्रा में चीनी मिलाएं। यहाँ (Natural Color Preservation) के लिए चीनी का इस्तेमाल करना एक प्रो-टिप है, क्योंकि चीनी मटर के क्लोरोफिल को सुरक्षित रखती है जिससे वह महीनों बाद भी काली नहीं पड़ती। नमक एक नेचुरल प्रिजर्वेटिव के रूप में काम करता है जो बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोकने में मददगार साबित होता है।
ब्लांचिंग की वह सटीक टाइमिंग जो देगी फ्रेशनेस
जब पानी पूरी तरह उबलने लगे और उसमें बुलबुले उठने लगें, तब छिली हुई मटर को सावधानी से पानी में डाल दें। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको मटर को पूरी तरह पकाना नहीं है, बल्कि सिर्फ (Blanching Vegetables Technique) को फॉलो करना है। मटर को केवल 2 से 3 मिनट तक ही उबलते पानी में रहने दें। यह प्रक्रिया मटर के भीतर मौजूद उन एंजाइम्स को निष्क्रिय कर देती है जो समय के साथ उसे खराब या बेस्वाद बना सकते हैं। जैसे ही मटर के दाने पानी की सतह पर तैरने लगें, समझ जाइए कि वे अगले स्टेप के लिए तैयार हैं।
बर्फीले पानी का शॉक ट्रीटमेंट है सबसे जरूरी
गर्म पानी से निकालने के तुरंत बाद मटर को एक ऐसे कटोरे में डालें जिसमें बर्फ का एकदम ठंडा पानी भरा हो। इस प्रक्रिया को ‘शॉक ट्रीटमेंट’ कहा जाता है, जो (Stopping Cooking Process) के लिए अनिवार्य है। यदि मटर गर्म बनी रही, तो वह अपनी ही गर्मी से पक जाएगी और स्टोर करने पर गलने लगेगी। बर्फीला पानी मटर की बाहरी परत को सख्त कर देता है और उसके चटक हरे रंग को हमेशा के लिए ‘लॉक’ कर देता है। करीब एक मिनट तक ठंडे पानी में रहने के बाद, इसे छलनी से छानकर सारा अतिरिक्त पानी निकाल दें।
नमी को पूरी तरह खत्म करना है लंबी लाइफ का राज
ब्लांचिंग के बाद मटर को सुखाना वह हिस्सा है जहां अक्सर लोग जल्दबाजी कर जाते हैं। अगर मटर में थोड़ी भी नमी रह गई, तो फ्रीजर में रखने पर उसमें बर्फ के क्रिस्टल जम जाएंगे या फंगस लगने का डर रहेगा। (Drying Peas Before Freezing) के लिए एक साफ सूती कपड़े का इस्तेमाल करें और मटर को उस पर फैला दें। आप चाहें तो 30 मिनट के लिए पंखे की हवा में भी इसे रख सकते हैं ताकि ऊपरी सतह पूरी तरह ड्राई हो जाए। जब दाने छूने पर बिल्कुल सूखे महसूस हों, तभी उन्हें पैकेजिंग के लिए उठाएं।
स्मार्ट पैकेजिंग और फ्रीजर में स्टोर करने का तरीका
मटर जब पूरी तरह सूख जाए, तो उन्हें जिपलॉक बैग या किसी अच्छे एयरटाइट कंटेनर में भरें। पैकेट में मटर भरते समय यह ध्यान रखें कि उसमें (Airtight Food Storage) का सिद्धांत लागू हो, यानी जितनी संभव हो सके हवा बाहर निकाल दें। पैकेट को बहुत ज्यादा ऊपर तक न भरें ताकि दानों को फैलने की जगह मिल सके। अब इन पैकेट्स को फ्रीजर के सबसे ठंडे हिस्से में रख दें। इस तरीके से तैयार की गई मटर 8 से 10 महीनों तक बिल्कुल वैसी ही बनी रहती है जैसी आपने पहले दिन स्टोर की थी।
पुलाव से लेकर स्नैक्स तक हर डिश में आएगा वही स्वाद
इस घरेलू तकनीक से स्टोर की गई मटर का उपयोग आप कभी भी अपनी पसंदीदा डिशेज में कर सकते हैं। चाहे आपको अचानक मटर-पनीर बनाना हो या सुबह के नाश्ते में (Vegetable Pulao and Snacks) तैयार करना हो, बस फ्रीजर से एक मुट्ठी मटर निकालिए और सीधे इस्तेमाल कीजिए। आपको बाजार की केमिकल वाली फ्रोजन मटर लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। घर की स्टोर की गई यह मटर न केवल सस्ती पड़ती है, बल्कि सेहत और स्वच्छता के लिहाज से भी बाजार के विकल्पों से कहीं बेहतर और सुरक्षित है।



