Plastic Rice Identification: सावधान! कहीं आपकी थाली में परोसा जा रहा ‘सफेद जहर’ तो नहीं…
Plastic Rice Identification: आज के दौर में मुनाफाखोरी की हवस इस कदर बढ़ गई है कि इंसान की सेहत से खिलवाड़ करना एक नया बिजनेस मॉडल बन चुका है। दाल, मसालों और दूध के बाद अब हमारे मुख्य आहार ‘चावल’ पर भी मिलावटखोरों की काली नजर पड़ चुकी है। बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा नकली चावल न केवल आपकी जेब काट रहा है, बल्कि (food adulteration) के इस भयावह खेल में आपकी और आपके परिवार की जान भी जोखिम में डाल रहा है। सफेद और चमकदार दिखने वाला हर दाना सेहतमंद नहीं होता, क्योंकि इनमें से कई दाने जहरीले प्लास्टिक से बने हो सकते हैं।

क्यों खतरनाक है प्लास्टिक की यह कोटिंग
चावल के नाम पर बेचे जा रहे प्लास्टिक के दाने सीधे हमारे पाचन तंत्र पर प्रहार करते हैं। जब हम अनजाने में इन नकली चावलों का सेवन करते हैं, तो हमारे शरीर के भीतर प्लास्टिक के सूक्ष्म कण जमा होने लगते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक (synthetic rice consumption) के कारण पेट में संक्रमण, हार्मोनल असंतुलन और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां पनप सकती हैं। इसलिए, यह बेहद जरूरी है कि हम अपने भोजन को थाली में सजाने से पहले उसकी शुद्धता की गहनता से जांच कर लें ताकि भविष्य की मुसीबतों को टाला जा सके।
पानी का कटोरा खोल देगा शुद्धता का राज
असली और नकली चावल के बीच फर्क करने का सबसे आसान और सटीक तरीका पानी का परीक्षण है। जब आप खाना बनाने के लिए चावल धोती हैं, तो उन्हें एक गहरे कटोरे में पानी भरकर डाल दें। यदि चावल के दाने पानी की सतह पर तैरने लगते हैं, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है। असल में (buoyancy test) यह बताता है कि असली चावल घनत्व में भारी होने के कारण हमेशा नीचे बैठता है, जबकि हल्का प्लास्टिक पानी के ऊपर तैरने लगता है।
आग की लपटों से बाहर आएगा सच
अगर आपको चावल की शुद्धता पर जरा भी संदेह है, तो माचिस की एक तीली आपकी शंका दूर कर सकती है। मुट्ठी भर चावल लें और उन्हें सीधे गैस की आंच या मोमबत्ती पर जलाकर देखें। जलते समय यदि चावल से प्लास्टिक पिघलने जैसी तीखी गंध आती है या दाने काले होकर चिपक जाते हैं, तो यह (fake rice detection) का सबसे बड़ा सबूत है। असली चावल जलने पर कभी भी प्लास्टिक जैसी दुर्गंध नहीं देता, बल्कि वह केवल काला होकर राख बनने लगता है।
समय की मार और फंगस का परीक्षण
प्रकृति का नियम है कि असली भोजन समय के साथ खराब होता है, लेकिन सिंथेटिक चीजें वैसी ही बनी रहती हैं। थोड़े से चावल पकाकर उन्हें एक डब्बे में बंद करके 4 से 5 दिनों के लिए किसी गरम जगह पर छोड़ दें। अगर चावल जस का तस बना रहता है और उसमें कोई बदलाव नहीं आता, तो वह पूरी तरह नकली है। असली चावल की पहचान उसकी (shelf life) से होती है, क्योंकि दो-तीन दिनों में ही असली चावल में फंगस लगनी शुरू हो जाती है और उससे खराब गंध आने लगती है।
गर्म तेल की कड़ाही में होगा फैसला
रसोई में इस्तेमाल होने वाला कुकिंग ऑयल भी चावल की असलियत बताने में आपकी मदद कर सकता है। एक कड़ाही में तेल को बहुत तेज गर्म करें और उसमें थोड़े से सूखे चावल डाल दें। प्लास्टिक से बना चावल तेल की प्रचंड गर्मी को सहन नहीं कर पाएगा और पिघलकर कड़ाही के तलवे से चिपक जाएगा। यह (hot oil test) उन मिलावटखोरों की पोल खोलने के लिए काफी है जो प्लास्टिक को अनाज की शक्ल देकर बेच रहे हैं। असली चावल तेल में डालने पर कभी नहीं चिपकेगा।
चूने का पानी और रंग बदलने का विज्ञान
केमिकल और रंगों की मिलावट को पकड़ने के लिए चूने का घोल एक बेहतरीन हथियार साबित हो सकता है। थोड़ा सा चूना पानी में घोलें और उसमें संदिग्ध चावल के कुछ दाने डाल दें। अगर चावल का रंग पीला या किसी अन्य शेड में बदलने लगे, तो समझ लीजिए कि उस पर हानिकारक रसायनों की परत चढ़ाई गई है। साधारण और शुद्ध चावल में (chemical reaction) की वजह से रंग परिवर्तन नहीं होता। यह तरीका बाजार से लाए गए पॉलिश वाले चावलों की सच्चाई सामने लाने में बहुत मददगार है।
जागरूकता ही है सबसे बड़ी सुरक्षा
नकली चावल की पहचान करना अब कोई रॉकेट साइंस नहीं रह गया है, बस थोड़ी सी सतर्कता की जरूरत है। अगर हम जागरूक नहीं हुए, तो हमारी थाली में परोसा जाने वाला यह जहर धीरे-धीरे हमारी अगली पीढ़ी को खोखला कर देगा। जब भी आप बाजार से राशन खरीदें, तो ब्रांड और चमक के बजाय (consumer awareness) को प्राथमिकता दें। याद रखें, आपकी दो मिनट की जांच आपके पूरे परिवार को एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन का उपहार दे सकती है। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है, इसे मिलावट की भेंट न चढ़ने दें



