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Gaza Ceasefire Phase Two Negotiations: दूसरे चरण के लिए अमेरिका ने बढ़ाया दबाव, नेतन्याहू से मिले ट्रंप के दूत

Gaza Ceasefire Phase Two Negotiations: गाजा पट्टी में जारी संघर्ष को स्थायी शांति में बदलने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। शनिवार को अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य गाजा में (Gaza Ceasefire Phase Two Negotiations) को प्रभावी ढंग से लागू करना और युद्ध की विभीषिका को समाप्त करना था। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर के साथ गहन चर्चा की। हालांकि, आधिकारिक तौर पर बातचीत के बारीक विवरण साझा नहीं किए गए हैं, लेकिन यह साफ है कि बाइडन प्रशासन के बाद अब ट्रंप की टीम इस क्षेत्रीय विवाद को सुलझाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

Gaza Ceasefire Phase Two Negotiations
Gaza Ceasefire Phase Two Negotiations

राफा बॉर्डर का खुलना और सेना की वापसी का मुद्दा

युद्धविराम के दूसरे चरण की सबसे बड़ी चुनौती राफा बॉर्डर को फिर से खोलना और वहां से इस्राइली सेना की वापसी सुनिश्चित करना है। गाजा की भावी सरकार के संभावित प्रमुख अली शाथ ने संकेत दिए हैं कि यह महत्वपूर्ण सीमा द्वार इसी सप्ताह खोला जा सकता है। वर्तमान में (Border Control Military Strategy) के तहत इस क्षेत्र पर इस्राइली रक्षा बलों का नियंत्रण है। इस्राइल की कैबिनेट रविवार को होने वाली अपनी बैठक में इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करेगी। राफा बॉर्डर का खुलना न केवल मानवीय सहायता के प्रवाह को सुगम बनाएगा, बल्कि यह गाजा के पुनर्निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हैं।

बंधकों के अवशेषों की खोज और हमास पर दबाव

इस पूरी शांति प्रक्रिया में सबसे संवेदनशील मुद्दा अभी भी उन बंधकों का है जिनके अवशेष गाजा में दबे हुए हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि दूत फिलहाल अंतिम बंधक के अवशेषों को खोजने और (Humanitarian Hostage Recovery Mission) को सफल बनाने पर काम कर रहे हैं। रान गविलि जैसे पीड़ितों के परिवारों ने राष्ट्रपति ट्रंप से हमास पर और कड़ा दबाव बनाने की गुहार लगाई है। परिवारों का आरोप है कि हमास जानबूझकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह कर रहा है और समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। दूसरी ओर, हमास ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इस्राइल पर ही तलाशी अभियान में बाधा डालने का पलटवार किया है।

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और क्षेत्रीय सहयोग की भूमिका

मिस्र और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देश भी इस संकट के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलट्टी ने ट्रंप के शांति बोर्ड के निदेशक निकोले म्लाडेनोव से फोन पर लंबी बातचीत की। इस चर्चा के दौरान (Regional Diplomatic Peace Efforts) को गति देने और इस्राइली सेना की चरणबद्ध वापसी पर जोर दिया गया। इसी बीच, हमास के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस्तांबुल में तुर्की के खुफिया प्रमुख के साथ बैठक की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पर्दे के पीछे कई स्तरों पर बातचीत चल रही है। मिस्र ने स्पष्ट कर दिया है कि गाजा का भविष्य पूरी तरह से वहां की स्वायत्तता और सीमाओं के प्रबंधन पर निर्भर करता है।

गाजा में बढ़ती हताहतों की संख्या और जमीनी हालात

भले ही आधिकारिक तौर पर युद्धविराम 10 अक्टूबर को लागू हुआ था, लेकिन जमीनी स्तर पर हिंसा की छिटपुट घटनाएं अब भी जारी हैं। शनिवार को गाजा में हुए एक इस्राइली हमले में दो फिलिस्तीनी किशोरों की मौत हो गई, जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच (Civilian Casualty Conflict Reports) पर विवाद छिड़ गया है। स्थानीय अस्पताल का दावा है कि बच्चे ईंधन के लिए लकड़ी बीन रहे थे, जबकि इस्राइली सेना ने उन्हें विस्फोटक लगाने वाले आतंकी बताया है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, युद्धविराम के प्रभावी होने के बाद से अब तक 480 से अधिक फिलिस्तीनी अपनी जान गंवा चुके हैं। यह बढ़ता हुआ मृत्यु दर दूसरे चरण की बातचीत को और भी अधिक जटिल बना रहा है।

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