Bihar land news: बिहार में भूमि मामलों में देरी पर 58 अंचलाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
Bihar land news: बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में लगातार हो रही देरी को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के 58 अंचलाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई आम लोगों के जमीन संबंधी कार्य समय पर पूरा नहीं होने की शिकायतों और राज्यस्तरीय समीक्षा में सामने आई गंभीर लापरवाहियों के बाद की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

तय समय में काम नहीं करने पर कार्रवाई के संकेत
विभागीय सूत्रों के अनुसार यह कदम उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर उठाया गया है। नियमों के तहत कार्रवाई में प्रपत्र क का गठन, वेतन वृद्धि पर रोक और पदोन्नति पर रोक जैसे प्रावधान शामिल हैं। सरकार का मानना है कि समयबद्ध सेवा न मिलने से आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है।
म्यूटेशन मामलों की समीक्षा में उजागर हुई लापरवाही
हाल ही में हुई राज्यस्तरीय समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई अंचलों में दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन के मामलों का निपटारा बेहद धीमी गति से हो रहा है। अनेक अंचल कार्यालयों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं, जबकि कुछ मामलों में बिना ठोस कारण के आवेदन रद्द कर दिए गए हैं। नियमों के अनुसार म्यूटेशन का निपटारा 90 दिनों के भीतर होना चाहिए, लेकिन कई अंचलों में यह समयसीमा पार हो चुकी है।
राज्य औसत से पीछे रहे कई अंचल
रिपोर्ट के अनुसार म्यूटेशन मामलों के निपटारे का राज्य औसत 44 दिन है, जबकि कई अंचल इस औसत से काफी पीछे हैं। बारसोई, पूर्णिया ईस्ट, उदाकिशुनगंज, आरा, रानीगंज, शाहपुर, फारबिसगंज, गोरौल और दीदारगंज जैसे अंचलों में देरी की स्थिति गंभीर पाई गई। इन्हीं कारणों से संबंधित अंचलाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
विभागीय बैठकों में अनुपस्थिति भी बनी कारण
सिर्फ काम में देरी ही नहीं, बल्कि विभागीय बैठकों में अनुपस्थित रहना भी अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। हाल ही में आयोजित राज्यस्तरीय बैठक में 537 में से 529 अंचलाधिकारी उपस्थित हुए, जबकि आठ बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहे। इसे प्रशासनिक अनुशासन के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है और ऐसे अधिकारियों से भी जवाब-तलब किया गया है।
अभियान बसेरा योजना में भी सुस्ती
भूमिहीन गरीबों को घर के लिए जमीन उपलब्ध कराने वाली अभियान बसेरा योजना में भी कई अंचलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। जांच में सामने आया कि योग्य आवेदकों को नॉट फिट फॉर अलॉटमेंट बताकर अयोग्य घोषित किया जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में तो अधिकांश आवेदन इसी आधार पर रद्द कर दिए गए, जिसे विभाग ने गंभीर अनियमितता माना है।
परिमार्जन और मापी कार्यों में देरी
जमाबंदी में त्रुटि सुधार यानी परिमार्जन के मामलों में भी लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। नियमों के अनुसार यह प्रक्रिया 75 दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए, लेकिन कई अंचलों में इसमें अनावश्यक देरी हो रही है। इसके अलावा जमीन की मापी से जुड़े मामलों में भी लापरवाही सामने आई है, जिस पर विभाग ने सख्त नाराजगी जताई है।
जांच और सुधार की दिशा में कदम
विभाग ने साफ किया है कि जहां-जहां अनियमितताएं पाई गई हैं, वहां विस्तृत जांच कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।



