BiharEducation – इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई अब नि:शुल्क
BiharEducation – बिहार सरकार ने तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देने की पहल करते हुए इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई मुफ्त करने का निर्णय लिया है। इसके लिए नैसकॉम के साथ समझौता किया गया है। गुरुवार को विधानसभा में शिक्षा विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस पहल से छात्रों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान के साथ बेहतर प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे।

तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा
मंत्री ने बताया कि एआई जैसे उभरते क्षेत्र में दक्षता विकसित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उनका कहना था कि उद्योगों की बदलती जरूरतों को देखते हुए पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण और कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा। इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के साथ प्लेसमेंट सेल को भी सक्रिय किया जाएगा, ताकि छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
स्कूल शिक्षा में सुधार के दावे
विधानसभा में दिए गए वक्तव्य में शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य में स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या अब एक प्रतिशत से भी कम रह गई है, जबकि वर्ष 2005 से पहले यह आंकड़ा काफी अधिक था। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों तक शिक्षा की पहुंच नहीं है, उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। महिलाओं की साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख किया गया। उनके अनुसार, पिछले दो दशकों में महिला साक्षरता में बड़ा सुधार हुआ है।
बजट और राजनीतिक प्रतिक्रिया
मंत्री ने कहा कि राज्य अपने कुल बजट का लगभग 20 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र पर खर्च कर रहा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर उच्च अनुपात में गिना जाता है। बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने असंतोष जताते हुए सदन से वाकआउट किया। विपक्ष की अनुपस्थिति में शिक्षा विभाग के बजट को मंजूरी मिल गई।
शिक्षक नियुक्ति की योजना
सरकार ने 52 हजार नए शिक्षकों की भर्ती की भी घोषणा की है। इनमें से 45 हजार नियुक्तियां नियमित प्रक्रिया के तहत होंगी, जबकि सात हजार विशेष शिक्षक दिव्यांग बच्चों के लिए नियुक्त किए जाएंगे। अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग को भेजी जा चुकी है। इसके अलावा, प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के करोड़ों सेट उपलब्ध कराने की योजना भी साझा की गई।
स्मार्ट क्लास की निगरानी
राज्य के मध्य और उच्च विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की प्रभावी निगरानी के लिए एक डिजिटल ट्रैकर तैयार किया जा रहा है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन स्कूलों में उपकरण उपलब्ध हैं, वहां उनका नियमित उपयोग हो। कई स्थानों पर उपकरण खराब होने या शिक्षकों की कमी के कारण स्मार्ट क्लास का संचालन बाधित पाया गया। ट्रैकर के माध्यम से प्राचार्य और संबंधित शिक्षक नियमित रिपोर्ट दर्ज करेंगे। नए शैक्षणिक सत्र से यह व्यवस्था अनिवार्य होगी।
सरकार का कहना है कि तकनीकी शिक्षा, शिक्षक नियुक्ति और डिजिटल निगरानी की इन पहलों से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।



