CorruptionCase – किशनगंज थानाध्यक्ष पर आय से अधिक संपत्ति की जांच तेज
CorruptionCase – बिहार के किशनगंज में तैनात रहे नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच अब तेज हो गई है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) इस मामले में उनसे जल्द ही पूछताछ करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें पटना स्थित ईओयू कार्यालय में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा, जहां उनसे आरोपों से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे और उन्हें अपने पक्ष में दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया जाएगा।

जांच के दायरे में आए करोड़ों की संपत्ति के आरोप
अभिषेक कुमार रंजन पर अपने कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह संपत्ति करीब 50 करोड़ रुपये तक आंकी जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि यह संपत्ति उनकी वैध आय के अनुपात में है या नहीं। इस पूरे मामले ने पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है।
अन्य मामले की जांच से खुला नया लिंक
यह मामला उस समय सामने आया जब किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार के खिलाफ चल रही जांच के दौरान कुछ अहम जानकारियां मिलीं। जांच में संकेत मिले कि अभिषेक रंजन उनके करीबी सहयोगी रहे हैं। इसके बाद ईओयू ने उनके वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की अलग से जांच शुरू की। अधिकारियों को शक है कि विभिन्न अवैध गतिविधियों से जुड़ी कमाई का निवेश संपत्तियों में किया गया।
अवैध नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका
जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर सक्रिय कई अवैध कारोबार से उनके संबंध रहे हैं। इनमें बालू, शराब और अन्य तस्करी से जुड़े नेटवर्क शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन गतिविधियों को संरक्षण देने के बदले नियमित रूप से धन प्राप्त होता था, जिसे जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों में लगाया गया।
विभिन्न राज्यों में संपत्तियों का सत्यापन जारी
ईओयू को बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल, दिल्ली एनसीआर और अन्य स्थानों पर भी संपत्तियों की जानकारी मिली है। इन संपत्तियों के सत्यापन के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया गया है। सिलीगुड़ी में फ्लैट और दार्जिलिंग रोड पर खरीदी गई जमीन जैसे मामलों में भुगतान के स्रोत की जांच की जा रही है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन निवेशों के पीछे धन कहां से आया।
छापेमारी के दौरान सीमित सफलता
जांच के क्रम में ईओयू की एक टीम पश्चिम चंपारण जिले के सिकटा स्थित उनके ससुराल भी पहुंची थी। हालांकि, कार्रवाई की जानकारी पहले ही लीक हो जाने की आशंका के कारण टीम को वहां से विशेष सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद जांच एजेंसियां अन्य स्रोतों से साक्ष्य जुटाने में लगी हैं।
पुलिस महकमे की छवि पर असर
इस तरह के मामलों का असर पूरे पुलिस तंत्र की छवि पर पड़ता है। जहां एक ओर कई अधिकारी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, वहीं कुछ मामलों में सामने आने वाले आरोप पूरे विभाग की साख को प्रभावित करते हैं। किशनगंज में भी इस मामले को लेकर आम लोगों के बीच चर्चा तेज है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे की कार्रवाई पर टिकी नजरें
फिलहाल ईओयू की जांच जारी है और आने वाले दिनों में पूछताछ के बाद कई और तथ्य सामने आ सकते हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई संभव है। इस पूरे मामले पर राज्य स्तर पर भी नजर रखी जा रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि जांच को गंभीरता से लिया जा रहा है।