बिहार

HealthRecruitment – बिहार में एक वर्ष में 44 हजार एएनएम बहाली योजना

HealthRecruitment – बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। आने वाले एक वर्ष के भीतर 44 हजार 321 एएनएम की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन नियुक्तियों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत होने वाली बहाली भी शामिल है। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।

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बजट चर्चा में बड़ा ऐलान

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 7,468 एएनएम की नियुक्ति की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त विभिन्न संवर्गों में 39,095 नियमित पद और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 5,226 रिक्तियां प्रक्रियाधीन हैं। इन सभी को मिलाकर कुल 44,321 पदों पर बहाली की प्रक्रिया चल रही है, जिसे अगले एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। विधानसभा और परिषद में स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270 करोड़ 41 लाख रुपये के बजट को स्वीकृति मिली है। सरकार का दावा है कि यह बजट राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने में सहायक होगा।

निजी प्रैक्टिस पर नीति और निजी निवेश को प्रोत्साहन

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए नीति तैयार की जा रही है। इसके साथ ही निजी प्रतिष्ठित संस्थानों को राज्य में अस्पताल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना पर काम हो रहा है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार लाया जा सकता है। हालांकि, इस दिशा में अंतिम निर्णय नीति निर्माण के बाद ही सामने आएगा।

स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार का दावा

सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार का दावा भी किया है। जानकारी के अनुसार, शिशु मृत्यु दर घटकर प्रति एक लाख पर 23 तक पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर बताई जा रही है। मातृ मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है और यह 334 से घटकर 104 रह गई है। प्रजनन दर 4.2 से घटकर 2.8 पर आ गई है। संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 76.2 प्रतिशत तक पहुंचने को भी सरकार उपलब्धि के रूप में देख रही है। पिछले 16 महीनों से मुफ्त दवा वितरण में राज्य को अग्रणी बताया गया है। कालाजार, यक्ष्मा और चमकी बुखार जैसी बीमारियों के उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जबकि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों को टीकाकरण किया जा रहा है।

शिक्षा विभाग में भी नई नियुक्तियों की तैयारी

स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा विभाग में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज करने की बात कही गई है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधानसभा में बताया कि स्कूलों की निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हर 10 पंचायत पर एक सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए 935 नए पद सृजित किए गए हैं और इन पर बहाली की प्रक्रिया बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से आगे बढ़ रही है।

शिक्षकों की बहाली प्राथमिकता में

सरकार की प्राथमिकता 45 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति बताई गई है। मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की बहाली के बाद विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और फिर कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से परिचारी तथा लिपिक पदों पर नियुक्ति होगी। अनुकंपा के आधार पर अब तक पांच हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं। विशेष शिक्षकों की वरीयता उनकी सेवा प्रारंभ होने की तिथि से तय होगी। विशिष्ट शिक्षकों को राज्यकर्मियों के समान सुविधाएं देने की बात भी दोहराई गई और 90 प्रतिशत वेतन विसंगतियों को दूर करने का दावा किया गया।

मध्याह्न भोजन और जांच की व्यवस्था

मध्याह्न भोजन योजना पर उठे सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि राज्य में एक करोड़ से अधिक बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। केवल रसोइयों के भरोसे व्यवस्था संभालना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए कुछ स्थानों पर एनजीओ की सहायता ली जा रही है। साथ ही तीसरे पक्ष से जांच कराई जाती है और अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है। नालंदा में बेंच-डेस्क से जुड़ी शिकायतों की जांच अपर मुख्य सचिव स्तर पर कराने की बात भी कही गई है। सरकार का कहना है कि गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाएगा।

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