बिहार

MicrofinanceRegulationBill – बिहार में सूदखोरी रोकने को सख्त कानून पारित

MicrofinanceRegulationBill – बिहार सरकार ने राज्य में सूदखोरी और जबरन वसूली की बढ़ती शिकायतों पर रोक लगाने के लिए एक नया कानून लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ‘बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं (धन उधार विनियमन एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण) विधेयक’ को पारित कर दिया गया। इस कानून का मकसद माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं की गतिविधियों को नियंत्रित करना और कर्जदारों को अनैतिक दबाव से बचाना है। सरकार का कहना है कि अब राज्य में कर्ज बांटने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होगी।

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हर जिले में बनेगी विशेष अदालत

नए प्रावधान के तहत उन मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालत गठित की जाएगी, जिनमें अत्यधिक ब्याज या दबाव के कारण लोगों को गंभीर मानसिक या आर्थिक संकट झेलना पड़ा हो। इन अदालतों की अध्यक्षता प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलेगा और अवैध वसूली करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसेगा।

विधानसभा में चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने कहा कि बीते वर्षों में कर्ज वसूली के तरीकों को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे मामलों में स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी।

लोन वितरण से पहले अनिवार्य अनुमति

विधेयक में यह साफ किया गया है कि कोई भी माइक्रो फाइनेंस संस्था बिहार में कर्ज वितरण शुरू करने से पहले राज्य सरकार के वित्त विभाग से अनुमति प्राप्त करेगी। इसके लिए वित्त निदेशक को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

कंपनियों को पहले भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस लेना होगा, उसके बाद राज्य स्तर पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। दस्तावेजों की जांच के बाद 90 दिनों के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बिना पंजीकरण के लोन बांटना आपराधिक अपराध माना जाएगा और संबंधित संस्था पर कार्रवाई हो सकती है।

पारदर्शिता और ब्याज दरों पर निगरानी

वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन में कहा कि इस कानून का उद्देश्य छोटे ऋण प्रदाताओं को विनियमित करना और अनुचित वसूली की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उचित ब्याज दर और पारदर्शी शर्तों के साथ ऋण वितरण सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

सरकार का तर्क है कि कई मामलों में उधारकर्ताओं को ब्याज और शर्तों की पूरी जानकारी नहीं मिलती थी, जिससे विवाद की स्थिति बनती थी। अब नई व्यवस्था में नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।

आंकड़े बताते हैं बढ़ता कर्ज

एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में माइक्रो फाइनेंस से जुड़े करीब दो करोड़ लोन अकाउंट सक्रिय हैं। राज्य के लोगों पर लगभग 57 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया कर्ज है। पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जैसे जिले इस मामले में अधिक प्रभावित बताए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय समावेशन के लिए छोटे ऋण महत्वपूर्ण हैं, लेकिन निगरानी की कमी से जोखिम भी बढ़ता है। ऐसे में संतुलित और सख्त नियमन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

शिक्षा क्षेत्र में भी घोषणा

विधान परिषद में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल स्कूल और एक डिग्री कॉलेज स्थापित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा और चरणबद्ध तरीके से एआई आधारित शिक्षा प्रणाली लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को समकालीन कौशल से लैस करना है।

सरकार का दावा है कि वित्तीय नियमन और शिक्षा सुधार जैसे कदम राज्य की सामाजिक और आर्थिक संरचना को मजबूत करेंगे। आने वाले समय में इस कानून के प्रभाव का आकलन जमीन पर लागू होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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