Patna Girls Hostel Safety Regulations: पटना के हॉस्टलों में बेटियों की सुरक्षा पर चला महिला आयोग का हंटर, डीएम से मांगी पूरी कुंडली
Patna Girls Hostel Safety Regulations: बिहार की राजधानी पटना में छात्राओं के लिए चल रहे निजी हॉस्टलों की मनमानी अब ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाली है। बिहार राज्य महिला आयोग ने शहर के तमाम छात्रावासों की विस्तृत जानकारी खंगालने का मन बना लिया है और इस बाबत पटना जिलाधिकारी को कड़ा पत्र जारी किया गया है। आयोग की इस (Administrative Accountability in Bihar) वाली मुहिम का मकसद उन हॉस्टलोंको बेनकाब करना है जो बिना किसी नियम-कानून के धड़ल्ले से चल रहे हैं और छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं।

निबंधित और अनिबंधित हॉस्टलों का अब खुलेगा कच्चा चिट्ठा
महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम से जिले में संचालित सभी रजिस्टर्ड और नॉन-रजिस्टर्ड छात्रावासों की सूची मांगी है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर पटना में कुल कितने (Legal Hostel Registration Process) के तहत चल रहे हैं और कितने अवैध तरीके से रिहायशी इलाकों में फल-फूल रहे हैं। आयोग का मानना है कि जब तक डेटा स्पष्ट नहीं होगा, तब तक किसी भी अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होता है।
सुरक्षा मानकों और बुनियादी सुविधाओं पर उठे गंभीर सवाल
पत्र के जरिए डीएम से यह भी पूछा गया है कि छात्राओं के रहने के लिए इन हॉस्टलों में सुरक्षा के क्या मापदंड अपनाए जा रहे हैं। क्या वहां सीसीटीवी कैमरे, महिला गार्ड और (Women Safety Standards) का पालन किया जा रहा है या नहीं? इसके अलावा हॉस्टलों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और रहने के कमरों की स्वच्छता को लेकर भी रिपोर्ट मांगी गई है। अक्सर शिकायतें आती हैं कि हॉस्टल संचालक मोटी रकम तो वसूलते हैं, लेकिन सुविधाएं शून्य के बराबर होती हैं।
नीट छात्रा की संदिग्ध मौत ने झकझोर दिया सिस्टम
छात्रावासों के खिलाफ इस कड़ी कार्रवाई की सबसे बड़ी वजह हाल ही में घटी एक दुखद घटना है। जहानाबाद की एक छात्रा, जो पटना में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी, उसकी (Hostel Student Death Investigation) ने हॉस्टल प्रबंधन की कलई खोल कर रख दी है। इस संदिग्ध मौत के बाद अभिभावकों में डर का माहौल है और छात्रावासों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी घटना को संज्ञान में लेते हुए महिला आयोग ने मामले की गहराई तक जाने का फैसला किया है।
जिलाधिकारी को एक सप्ताह के भीतर देनी होगी रिपोर्ट
महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने साफ कर दिया है कि समय की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पटना जिलाधिकारी को एक सप्ताह के भीतर जिले के सभी गर्ल्स हॉस्टलों की विस्तृत (Government Reporting Guidelines) के अनुसार सूची उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया गया है। आयोग चाहता है कि अगले सात दिनों में प्रशासन उन सभी छात्रावासों की पहचान कर ले जो सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं, ताकि उन पर तत्काल ताला जड़ा जा सके।
राजधानी के हर गली-कूचे में बिना जांच के खुल रहे हॉस्टल
पटना शिक्षा का बड़ा केंद्र होने के नाते यहां हर इलाके में निजी छात्रावासों की बाढ़ सी आ गई है। मुनाफे के लालच में संचालक बिना किसी (Private Hostel Operational Guidelines) की परवाह किए छोटे-छोटे कमरों में कई छात्राओं को रहने पर मजबूर करते हैं। आयोग का मानना है कि इन हॉस्टलों की कोई मॉनिटरिंग न होने की वजह से यहां रहने वाली छात्राओं का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। उचित माहौल न मिलने के कारण कई बार छात्राएं डिप्रेशन का शिकार हो रही हैं।
सुरक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान न देना पड़ेगा भारी
हॉस्टल तो खुल रहे हैं, लेकिन छात्राओं की सुरक्षा और उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। आयोग ने अंदेशा जताया है कि सुविधाओं की कमी और सख्त (Student Well-being Monitoring) न होने के कारण छात्राएं गलत संगत या नशे की ओर भी रुख कर सकती हैं। महिला आयोग अब हॉस्टल संचालकों के लिए कड़े नियम बनाने की तैयारी में है, ताकि कोई भी संचालक अपनी मर्जी से सुरक्षा और स्वास्थ्य से समझौता न कर सके।
बिहार महिला आयोग का बेटियों के लिए सुरक्षा कवच
अध्यक्ष अप्सरा ने विश्वास दिलाया है कि पटना की सड़कों और हॉस्टलों में बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस करें, यह उनकी प्राथमिकता है। आयोग की यह (Women Rights Protection Action) केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिलाधिकारी की रिपोर्ट के बाद जमीनी स्तर पर औचक निरीक्षण भी किए जाएंगे। पटना के हॉस्टलों में चल रही अव्यवस्थाओं को जड़ से खत्म करने के लिए आयोग ने अब अपनी कमर कस ली है और प्रशासन को भी सख्त रुख अपनाने को कहा है।



