RevenueStrike – बिहार में अंचल अधिकारियों की हड़ताल पर बढ़ा विवाद
RevenueStrike – बिहार में अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों की जारी हड़ताल को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव और गहरा गया है। सरकार की ओर से जहां यह दावा किया गया कि बड़ी संख्या में अधिकारी काम पर लौट आए हैं, वहीं संयुक्त मोर्चा ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। संघ के नेताओं का कहना है कि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है और अधिकांश अधिकारी अब भी सामूहिक अवकाश पर डटे हुए हैं।

संघ ने सरकार के दावे को बताया गलत
बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 300 अधिकारियों के काम पर लौटने की खबर वास्तविकता से परे है। महासंघ के महासचिव रजनीकांत और महामंत्री जितेन्द्र पांडेय ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि अंचलाधिकारी और राजस्व सेवा से जुड़े अधिकारी अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं। उनका कहना है कि अभी तक किसी भी बड़े स्तर पर काम पर वापसी नहीं हुई है और आंदोलन जारी है।
संघ के अनुसार, केवल कुछ ऐसे अधिकारी, जो सेवानिवृत्ति के करीब हैं या हाल ही में पदोन्नति के बाद नई भूमिका में आए हैं, उन्होंने सीमित रूप से काम शुरू किया है। लेकिन इसे व्यापक वापसी बताना भ्रामक है। उनका दावा है कि अधिकांश अधिकारी अब भी सामूहिक अवकाश पर हैं और अपनी मांगों से पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है।
डीसीएलआर पद को लेकर बना हुआ है गतिरोध
हड़ताल का मुख्य कारण डीसीएलआर (उप समाहर्ता भूमि सुधार) पद पर नियुक्तियों को लेकर विवाद है। संघ का कहना है कि जब तक इस पद पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका यह भी कहना है कि यह पद मूल रूप से बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के लिए होना चाहिए और इसे उसी संवर्ग में बहाल किया जाना चाहिए।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं कर रही है। इसी वजह से अधिकारियों में असंतोष बढ़ा है और वे आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर हैं। नेताओं ने साफ कहा है कि जब तक ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक सामूहिक अवकाश समाप्त नहीं होगा।
सरकार ने संवाद से समाधान की बात कही
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए संवाद और समन्वय का रास्ता अपनाने की बात कही है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जो अधिकारी काम पर लौटना चाहते हैं, उन्हें तत्काल योगदान देने का निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिया गया है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि हड़ताल की अवधि को समायोजित करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि अधिकारियों को किसी प्रकार की सेवा हानि न हो। उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार टकराव नहीं चाहती, बल्कि बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की इच्छुक है।
राजस्व कार्यों पर पड़ रहा असर
मार्च का महीना राजस्व विभाग के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान कई वित्तीय और प्रशासनिक कार्य पूरे किए जाते हैं। ऐसे में अधिकारियों की हड़ताल से कामकाज प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। आम लोगों को भी जमीन से जुड़े मामलों और प्रशासनिक सेवाओं में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर शत-प्रतिशत अधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।



