Thawe Durga Temple: थावे वाली मैया के दरबार में चोरों ने किया तांडव, भक्तों की आंखों में भर आए आँसू
Thawe Durga Temple : बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित सुप्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है। शक्ति की अधिष्ठात्री मां थावे वाली के पवित्र गर्भगृह में घुसकर बेखौफ चोरों ने जमकर उत्पात मचाया। चोरों ने मां दुर्गा की प्रतिमा पर सुशोभित (Golden Crown) और अन्य कीमती आभूषणों पर हाथ साफ कर दिया। इस घटना ने मंदिर प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है और भक्तों के मन में गहरी आस्था के साथ-साथ भारी आक्रोश भर दिया है।

सुरक्षा के दावों की खुली पोल: सीढ़ी और रस्सी के सहारे पहुंचे चोर
हैरानी की बात यह है कि जिस मंदिर को हाई-सिक्योरिटी जोन माना जाता था, वहां चोरों ने बेहद फिल्मी अंदाज में चोरी को अंजाम दिया। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि अपराधी मंदिर की दीवार फांदने के लिए सीढ़ी और रस्सी का सहारा लेकर अंदर दाखिल हुए। अपराधियों ने बड़ी ही चालाकी से कटर के जरिए (Temple Sanctuary) के तालों को काट दिया। यह पूरी प्रक्रिया तब हुई जब मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मी तैनात थे, लेकिन उनकी लापरवाही ने चोरों का काम आसान कर दिया और मां के जेवर लूट लिए गए।
दानपेटी और लॉकर पर भी हाथ साफ: मंदिर में मची अफरा-तफरी
चोरों का दुस्साहस यहीं नहीं रुका, उन्होंने मंदिर परिसर के भीतर रखे लॉकर को भी बेरहमी से तोड़ दिया। लॉकर में रखी नकदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के साथ-साथ अपराधी मंदिर की भारी-भरकम दानपेटी भी उठाकर रफूचक्कर हो गए। सुबह जब पुजारी और श्रद्धालु नित्य (Morning Prayer) के लिए मंदिर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मंदिर का सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा था और मां का श्रृंगार पूरी तरह गायब था, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
करोड़ों की श्रद्धा पर चोट: 51 लाख का मुकुट ले उड़े अपराधी
इस चोरी की घटना में सबसे बड़ा नुकसान मां के उस स्वर्ण मुकुट का हुआ है, जिसे पिछले साल झारखंड के एक भक्त ने बड़ी श्रद्धा के साथ अर्पित किया था। करीब 251 ग्राम वजन वाले इस सोने के मुकुट की कीमत लगभग 51 लाख रुपये आंकी गई थी। इस (Religious Jewelry) की चोरी ने भक्तों के दिल को छलनी कर दिया है। लोगों का कहना है कि यह केवल धन की चोरी नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास पर किया गया एक कायरतापूर्ण प्रहार है, जिसका बदला लेना कानून की जिम्मेदारी है।
सीसीटीवी फुटेज ने उजागर की सच्चाई: सोते रहे सुरक्षाकर्मी
घटना की सूचना मिलते ही थावे थाना पुलिस सक्रिय हुई और पूरे परिसर की नाकाबंदी कर दी गई। जब पुलिस ने मंदिर में लगे कैमरों की फुटेज जांची, तो वहां तैनात गार्डों की लापरवाही साफ उजागर हो गई। सीसीटीवी में स्पष्ट दिख रहा है कि चोर आराम से दानपेटी और आभूषण लेकर जा रहे हैं, जबकि (Security Personnel) वहां कहीं नजर नहीं आए या सो रहे थे। फुटेज में अपराधियों के चेहरे और उनकी गतिविधियों को चिन्हित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि उन्हें जल्द से जल्द दबोचा जा सके।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई: एसपी ने खुद संभाली कमान
वारदात की गंभीरता को देखते हुए गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अवधेश दीक्षित खुद घटनास्थल पर पहुंचे और बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर के कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों से लंबी पूछताछ की है। एसपी ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की (Criminal Investigation) के दौरान वहां तैनात गार्डों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि इसमें किसी भी अंदरूनी व्यक्ति की मिलीभगत पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जनप्रतिनिधियों का आक्रोश: सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग
गोपालगंज के सांसद आलोक कुमार सुमन ने इस पूरी घटना को सुरक्षा की एक बहुत बड़ी चूक करार दिया है। उन्होंने कहा कि मां थावे वाली का मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और यहां ऐसी घटना होना दुर्भाग्यपूर्ण है। सांसद ने मांग की है कि (Temple Security) के मानकों को दोबारा से निर्धारित किया जाए और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने पुलिस को अल्टीमेटम दिया है कि मां के गहने जल्द से जल्द बरामद किए जाएं ताकि भक्तों का आक्रोश शांत हो सके।
भक्तों में पसरा मातम और रोष: मंदिर के बाहर उमड़ी भीड़
जैसे ही चोरी की खबर गोपालगंज और आसपास के जिलों में फैली, हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर की ओर उमड़ पड़े। भक्तों की आंखों में आंसू थे और वे मंदिर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। लोगों का कहना है कि जहां (Devotional Faith) का केंद्र सुरक्षित नहीं है, वहां आम जनता खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगी। श्रद्धालुओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही चोरों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
निष्कर्ष: क्या भविष्य में सुरक्षित रहेंगे हमारे देवालय?
थावे मंदिर की यह घटना एक सबक है कि केवल सीसीटीवी कैमरे लगा देने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए सतर्क मानवीय निगरानी और कड़े अनुशासन की भी आवश्यकता है। मंदिर (Public Trust) की धरोहर होते हैं और उनकी सुरक्षा में लापरवाही अक्षम्य है। अब सबकी निगाहें पुलिस की जांच पर टिकी हैं कि क्या वह मां के उन गहनों को वापस ला पाएगी, जिनसे लाखों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इस घटना ने एक बार फिर मंदिरों के सुरक्षा ऑडिट की जरूरत को रेखांकित किया है।



