Fatal Asphyxiation Incident: जिसे समझ रहे थे ठंड का सहारा वही बनी काल, सोते रह गए मासूम और बुझ गए घर के तीन चिराग
Fatal Asphyxiation Incident: पूरे बिहार में इन दिनों बर्फीली हवाओं और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लोग इस कड़ाके की ठंड से बचने के लिए अलाव और बोरसी का सहारा ले रहे हैं, लेकिन यही सहारा कभी-कभी जानलेवा साबित हो जाता है। गया जिले के वजीरगंज इलाके में एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला (tragic incident) सामने आया है, जहां एक ही परिवार के तीन सदस्यों की सोते समय मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में मातम पसरा दिया है और हर कोई इस अनहोनी से स्तब्ध है।

बंद कमरे में मौत बनकर घुसा धुआं
वजीरगंज के इस घर में रात को ठंड से बचने के इंतजाम किए गए थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि सुबह का सूरज वे नहीं देख पाएंगे। जानकारी के मुताबिक, कमरे के भीतर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस (carbon monoxide) के जमा होने के कारण दम घुटने से यह हादसा हुआ। 60 वर्षीय मीना देवी अपनी 6 साल की नातिन अंशी और 5 साल के नाती सुजीत के साथ कमरे में सो रही थीं। उन्होंने ठंड से राहत पाने के लिए बोरसी जलाई थी, जो बंद कमरे में काल बन गई (Fatal Asphyxiation Incident।
सुबह की वो चीख और उजड़ गया संसार
हादसे का पता तब चला जब सुबह बच्चों की मां काजल देवी उन्हें जगाने के लिए कमरे में पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, वहां का मंजर देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बिस्तर पर लेटे तीनों लोग (unresponsive state) में मिले। काजल देवी पिछले दो महीनों से अपने मायके में ही रह रही थीं और उन्हें क्या पता था कि जिस मायके में वह सुरक्षित महसूस कर रही थीं, वहीं उनकी आंखों के सामने उनका पूरा परिवार खत्म हो जाएगा।
नानी और मासूमों की दर्दनाक विदाई
मरने वालों में नानी मीना देवी और उनके दो छोटे नाती-नातिन शामिल हैं। बच्चों की उम्र महज 5 और 6 साल थी, जिन्होंने अभी जीवन की दहलीज पर कदम ही रखा था। वजीरगंज में इस (death toll) की खबर जैसे ही फैली, आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। यह घटना दर्शाती है कि सुरक्षा के प्रति थोड़ी सी लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है।
वजीरगंज में दोबारा दोहराई गई वही कहानी
हैरानी और दुख की बात यह है कि वजीरगंज इलाके में यह पहली ऐसी घटना नहीं है। महज 15 दिन पहले ही इसी थाना क्षेत्र के दखिनगांव में भी बोरसी के कारण दम घुटने से दो लोगों की जान चली गई थी। बार-बार हो रहे इन (winter hazards) के बावजूद लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। बंद कमरों में कोयला या लकड़ी जलाकर सोना सीधे तौर पर मौत को दावत देने जैसा साबित हो रहा है, जिससे प्रशासन भी चिंतित है।
बंद कमरों में बोरसी जलाने का विज्ञान और खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि जब बंद कमरे में कोयला या लकड़ी (incomplete combustion) की प्रक्रिया से गुजरती है, तो वह कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस छोड़ती है। यह गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, जिससे सो रहे व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि वह धीरे-धीरे मौत की आगोश में जा रहा है। ऑक्सीजन का स्तर कम होते ही दिमाग सुन्न हो जाता है और गहरी नींद में ही इंसान की सांसें थम जाती हैं।
प्रशासनिक सतर्कता और स्वास्थ्य विभाग की सलाह
इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मामले की जानकारी ली है। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि वे (safety precautions) का पालन करें। कभी भी बंद कमरे में अलाव या बोरसी जलाकर न सोएं। यदि कमरे में गर्माहट के लिए कोई साधन जलाया गया है, तो वेंटिलेशन के लिए खिड़की या दरवाजा थोड़ा खुला जरूर छोड़ें। प्रशासन अब गांवों में मुनादी करवाकर लोगों को जागरूक करने की योजना बना रहा है।
एक परिवार की खुशियों पर छाया मातम
काजल देवी के लिए यह क्षति अपूरणीय है, जिन्होंने एक ही झटके में अपनी मां और अपने दोनों बच्चों को खो दिया। बिहार की यह भीषण ठंड अब लोगों के लिए (deadly weather) साबित हो रही है। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं से ज्यादा खतरनाक हमारी छोटी सी असावधानी हो सकती है। फिलहाल, पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आगे की कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है।



