WildElephants – किशनगंज में हाथियों का आतंक, खेतों और घरों को भारी नुकसान
WildElephants – बिहार के किशनगंज जिले के सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों जंगली हाथियों की गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। दिघलबैंक प्रखंड के कई गांवों में हाथियों का एक झुंड पिछले कुछ दिनों से खेतों और बस्तियों के आसपास घूम रहा है। इससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है और गांवों में भय का माहौल बन गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार धनतोला पंचायत के बिहारटोला और डोरिया गांव के आसपास मक्के के खेतों में हाथियों का झुंड चार दिनों से देखा जा रहा है। दिन में ये हाथी खेतों में फसल रौंद देते हैं और रात के समय आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ जाते हैं।
रात में घर में घुसा हाथी, परिवार ने बचाई जान
गुरुवार देर रात बिहारटोला गांव में एक हाथी झुंड से अलग होकर गांव में घुस आया। ग्रामीण गोपी महतो के घर के आंगन में पहुंचे हाथी ने मकान की दीवार तोड़ दी और घर के अंदर रखे चावल व अन्य अनाज को नुकसान पहुंचाया।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि उस समय तेज हवा और बारिश हो रही थी, इसलिए उन्हें हाथी के आने का अंदाजा नहीं हुआ। अचानक दीवार टूटने की आवाज सुनकर जब वे बाहर आए तो सामने हाथी को देखकर घबरा गए।
स्थिति को देखते हुए परिवार के लोग तुरंत घर से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर चले गए। लगभग आधे घंटे तक हाथी घर के आसपास ही रहा। बाद में जब वह वहां से हट गया, तब ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
खेतों में मक्के की फसल को नुकसान
शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने हाथियों के झुंड को बूढ़ी कनकई नदी के पार नेपाल सीमा के नजदीक भारतीय इलाके में देखा। बताया जाता है कि यह झुंड नेपाल की ओर से आया है और आसपास के खेतों में लगी मक्के की फसल को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथियों का यह झुंड डोरिया, बिहारटोला, हाथीडुब्बा और करूवामनी पंचायत के कई खेतों में घूम रहा है। इससे किसानों की मेहनत पर असर पड़ रहा है।
किसानों के मुताबिक कई खेतों में फसल पूरी तरह रौंद दी गई है। इससे ग्रामीणों के सामने आर्थिक नुकसान की चिंता भी बढ़ गई है।
ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग से नाराजगी
हाथियों की लगातार मौजूदगी से गांवों में डर का माहौल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि दिन में खेतों में और रात में गांवों के आसपास हाथियों की आवाजाही बढ़ जाती है।
धनतोला पंचायत के मुखिया लखीराम हांसदा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग की सक्रियता को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पिछले दो दिनों में हाथियों ने दो घरों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन मौके पर विभाग की टीम नहीं पहुंची।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
वन विभाग ने टीम भेजने की बात कही
वन क्षेत्र पदाधिकारी राधेश्याम राय ने बताया कि विभागीय बैठक के कारण कर्मियों को अररिया बुलाया गया था, इसलिए गुरुवार को टीम क्षेत्र में नहीं पहुंच सकी।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार शाम से वन विभाग की टीम आवश्यक संसाधनों के साथ प्रभावित गांवों में मौजूद रहेगी और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखेगी।
सावधानी बरतने की सलाह
वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार इस समय खेतों में मक्के की फसल काफी ऊंची हो चुकी है, जिससे हाथियों को खेतों के बीच से खदेड़ना मुश्किल हो जाता है।
अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए स्थानीय स्तर पर कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर मिर्च पाउडर डालकर आग जलाने जैसी पारंपरिक विधियां हाथियों को दूर रखने में सहायक हो सकती हैं।
फसल और मुआवजे को लेकर जानकारी
वन विभाग के अनुसार जिन किसानों की फसल या संपत्ति को नुकसान हुआ है, उनकी रिपोर्ट की जांच की जा रही है। जांच में सही पाए गए मामलों में प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि करीब 88 प्रभावित लोगों को इस महीने लगभग 10 लाख रुपये से अधिक की मुआवजा राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
स्थायी समाधान पर भी विचार
वन विभाग का कहना है कि सीमा क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही को पूरी तरह रोकना आसान नहीं है। पहले भी कई तकनीकी उपाय अपनाए गए थे, लेकिन बड़े जंगली जानवरों को स्थायी रूप से रोकना चुनौतीपूर्ण होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा के पास कुछ विशेष फसलों की खेती कम करने और तीखी गंध वाले पौधों के रोपण से हाथियों को खेतों से दूर रखने में मदद मिल सकती है।



