बिज़नेस

AutoIndustry – मुनाफा घटने के दबाव में फॉक्सवैगन 2030 तक घटाएगी 50 हजार नौकरियां

AutoIndustry – दुनिया के ऑटोमोबाइल सेक्टर में बदलते हालात का असर अब बड़ी कंपनियों पर साफ दिखाई देने लगा है। जर्मनी की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन ने संकेत दिया है कि वह आने वाले वर्षों में अपने कार्यबल में बड़ी कटौती करने जा रही है। कंपनी की योजना है कि 2030 तक जर्मनी में लगभग 50,000 नौकरियां कम की जाएंगी। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब कंपनी का मुनाफा पिछले करीब एक दशक के सबसे निचले स्तर के आसपास पहुंच गया है और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

volkswagen job cuts plan by 2030

फॉक्सवैगन समूह के सामने कई चुनौतियां एक साथ खड़ी हैं। बढ़ती उत्पादन लागत, इलेक्ट्रिक वाहनों में भारी निवेश, चीन की कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा और अमेरिकी टैरिफ जैसे कारकों ने कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ाया है। इन परिस्थितियों के बीच कंपनी लागत कम करने और कारोबार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

कर्मचारियों में कटौती की बड़ी योजना

समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, फॉक्सवैगन ने 2024 के अंत में श्रमिक संगठनों के साथ एक समझौता किया था। इस समझौते के तहत कंपनी अपने मुख्य ब्रांड में लगभग 35,000 पदों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की योजना पर सहमत हुई थी। यह कदम कंपनी की उस व्यापक योजना का हिस्सा है जिसके जरिए हर साल लगभग 15 अरब यूरो की बचत करने का लक्ष्य रखा गया है।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर ब्लूम ने बताया कि यह पुनर्गठन केवल फॉक्सवैगन ब्रांड तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव समूह के अन्य प्रमुख ब्रांडों और सहयोगी इकाइयों पर भी पड़ सकता है। इसमें प्रीमियम कार ब्रांड ऑडी और पोर्श के कुछ कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं, जबकि समूह की सॉफ्टवेयर इकाई कैरियड में भी बदलाव किए जाने की संभावना जताई गई है।

चीन और वैश्विक बाजार में बढ़ता दबाव

फॉक्सवैगन लंबे समय तक चीन के ऑटो बाजार में मजबूत स्थिति रखने वाली कंपनियों में गिनी जाती रही है। हालांकि हाल के वर्षों में स्थानीय कंपनियों ने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में चीनी ब्रांड जैसे BYD और गीली तेजी से आगे बढ़े हैं, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो गई है।

इसके अलावा यूरोप में वाहनों की मांग अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। दूसरी ओर इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास और उत्पादन पर बढ़ती लागत भी कंपनियों के लिए चुनौती बन रही है। इन परिस्थितियों में कई पारंपरिक वाहन निर्माता कंपनियों को अपने कारोबारी मॉडल और खर्चों की समीक्षा करनी पड़ रही है।

यूरोप में बढ़ सकती है कीमतों की प्रतिस्पर्धा

कंपनी के शीर्ष प्रबंधन का मानना है कि आने वाले समय में यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन की कई वाहन कंपनियां अपने घरेलू बाजार में जारी मूल्य युद्ध से बाहर निकलने के लिए यूरोप जैसे बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

फॉक्सवैगन के सीईओ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि चीनी कंपनियां बड़े पैमाने पर यूरोपीय बाजार में प्रवेश करती हैं तो कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे हालात में लागत को नियंत्रित करना और उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बनाना कंपनियों के लिए जरूरी हो जाएगा। कंपनी इसी दिशा में अपनी रणनीति को तेज करने की कोशिश कर रही है।

कंपनी के वित्तीय नतीजों में गिरावट

वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो फॉक्सवैगन का प्रदर्शन भी दबाव में दिखाई देता है। कंपनी ने 2025 के लिए लगभग 8.9 अरब यूरो का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज किया है, जो विश्लेषकों के अनुमान से कम है। बाजार विशेषज्ञों ने करीब 9.4 अरब यूरो के आसपास लाभ की उम्मीद जताई थी।

पूरे वर्ष के दौरान कंपनी का कुल राजस्व भी मामूली गिरावट के साथ करीब 322 अरब यूरो रहा, जबकि इससे पहले के वर्ष में यह 324.7 अरब यूरो था। कंपनी ने आने वाले समय के लिए भी सतर्क अनुमान पेश किए हैं। फॉक्सवैगन के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस वर्ष राजस्व वृद्धि 0 से 3 प्रतिशत के बीच रह सकती है।

शेयर बाजार और भविष्य की चुनौतियां

कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि मौजूदा वर्ष ऑटो उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। इसके बावजूद प्रबंधन का कहना है कि यूरोप में कंपनी की स्थिति अभी भी मजबूत है और आने वाले समय में सुधार की संभावनाएं मौजूद हैं।

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में फॉक्सवैगन के शेयरों में लगभग 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, हालांकि इस साल की शुरुआत से अब तक कंपनी के शेयरों में कुल मिलाकर 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव, व्यापार नीतियों में बदलाव और बढ़ती प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में कई ऑटो कंपनियों की कमाई को प्रभावित कर सकती है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.