Gold and Silver Price Prediction: 2026 में चांदी छुएगी 3 लाख का जादुई आंकड़ा और सोना रचेगा नया इतिहास, तुरंत पढ़ें पूरी डिटेल…
Gold and Silver Price Prediction 2026: भारतीय सरजमीं पर निवेश करने वालों के लिए बीता साल किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ है। सोने और चांदी की कीमतों ने जिस तरह से आसमान छुआ है, उसने निवेशकों की झोली उम्मीद से कहीं ज्यादा खुशियों से भर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि (Indian Bullion Market) में छाई यह रौनक केवल एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि मजबूत वैश्विक संकेतों का परिणाम है। दोनों ही कीमती धातुएं अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे बाजार में उत्साह का माहौल बना हुआ है। अब हर किसी की नजरें अगले साल पर टिकी हैं, क्योंकि कयास लगाए जा रहे हैं कि यह तेजी का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है।

चांदी की आंधी में उड़े पुराने सारे रिकॉर्ड
साल 2025 में अगर किसी धातु ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरी हैं, तो वह निश्चित रूप से चांदी है। चांदी के प्रदर्शन ने बड़े-बड़े बाजार पंडितों को भी हैरान कर दिया है, क्योंकि इसने उम्मीदों से कहीं अधिक रिटर्न दिया है। घरेलू बाजार में चांदी (Silver Price Appreciation) की रफ्तार इतनी तेज रही कि यह 2,42,000 रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर गई। आपको जानकर हैरानी होगी कि साल की शुरुआत में इसकी कीमत महज 85,851 रुपये थी, जिसका अर्थ है कि एक साल के भीतर निवेशकों को लगभग 167 प्रतिशत का भारी-भरकम मुनाफा हुआ है।
मांग और आपूर्ति के बीच उलझता बाजार
पिछले एक सप्ताह के भीतर चांदी की कीमतों में करीब 28,000 रुपये प्रति किलो का जोरदार उछाल देखा गया है। इसके पीछे की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की बढ़ती मांग और घटती आपूर्ति को माना जा रहा है। दुनिया भर में (Industrial Silver Demand) तेजी से बढ़ रही है, लेकिन खनन और उत्पादन के मोर्चे पर वैसी प्रगति नहीं दिख रही है। आपूर्ति सीमित होने के कारण कीमतों में यह निरंतर उबाल देखा जा रहा है, जो फिलहाल रुकता हुआ नजर नहीं आता। यही कारण है कि चांदी अब आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का ऐतिहासिक प्रदर्शन
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सफेद धातु ने इतिहास के पन्ने पलट दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर पहली बार 75 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है। बाजार विश्लेषकों का दावा है कि अगर वैश्विक स्तर पर (Global Economic Trends) इसी तरह मजबूत बने रहे, तो चांदी जल्द ही 100 डॉलर प्रति औंस के जादुई आंकड़े को छू सकती है। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय बाजारों में चांदी की कीमत 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचना कोई बड़ी बात नहीं होगी।
सोने की धीमी लेकिन बेहद मजबूत बढ़त
चांदी के मुकाबले सोने की रफ्तार थोड़ी कम जरूर रही है, लेकिन इसने अपने निवेशकों का भरोसा कभी टूटने नहीं दिया। अनिश्चितता के दौर में सोना हमेशा से सबसे सुरक्षित विकल्प रहा है और इस साल भी इसने करीब 78 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है। साल के आरंभ में (Gold Investment Returns) का गणित समझने वाले जानते थे कि इसकी चमक फीकी नहीं पड़ेगी। 31 दिसंबर 2024 को सोना 78,950 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब 1.40 लाख रुपये के स्तर को पार कर चुका है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है।
क्या 2026 में सोना 1.60 लाख के पार जाएगा?
भविष्यवाणियों की मानें तो नया साल सोने के लिए और भी बड़ी खुशियां लेकर आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 5000 डॉलर प्रति औंस के पार जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। ऐसे में (Physical Gold Trading) के जानकारों का अनुमान है कि भारतीय बाजार में सोने की कीमतें 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं। यह उछाल उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होगा जिन्होंने लंबी अवधि के लिए सोने में पैसा लगाया है, हालांकि नए खरीदारों के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
दशकों का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों ने इस बात की पुष्टि की है कि पिछला एक साल सोने के लिए पिछले कई दशकों में सबसे अच्छा रहा है। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में 60 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण (Safe Haven Assets) की तलाश है। दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित किया है। जब-जब दुनिया में युद्ध या आर्थिक अस्थिरता का माहौल बनता है, तब-तब सोने की मांग में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी होती है।
केंद्रीय बैंकों की खरीद और स्थिरता का भरोसा
रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट में भी सोने को सबसे स्थिर कमोडिटी बताया गया है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में (Central Bank Gold Reserves) की अहमियत और बढ़ गई है। सोने की तुलना में चांदी भले ही थोड़ी अस्थिर हो, लेकिन औद्योगिक उपयोग और निवेश के लिहाज से इसमें भी सुरक्षित निवेश के गुण मौजूद हैं। यही वजह है कि बड़े संस्थान भी अब अपनी संपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा इन कीमती धातुओं में सुरक्षित रख रहे हैं।
निवेश के लिए सोना बेहतर या चांदी?
अक्सर निवेशकों के मन में यह सवाल उठता है कि उन्हें किस धातु पर दांव लगाना चाहिए। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह से आपकी (Risk Tolerance Level) पर निर्भर करता है। सोना उन लोगों के लिए है जो अपने पैसे की सुरक्षा और स्थिरता चाहते हैं, क्योंकि इसमें उतार-चढ़ाव कम होता है। वहीं, चांदी उन निवेशकों के लिए बेहतर है जो अधिक जोखिम लेकर बड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं। हालांकि, चांदी की कीमतें बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं, इसलिए इसमें निवेश करते समय अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
क्यों आ रहा है कीमतों में इतना उछाल?
सोने-चांदी की कीमतों में इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कई ठोस कारण जिम्मेदार हैं। वैश्विक स्तर पर व्यापारिक टैरिफ और युद्ध के तनाव ने निवेशकों को डरा दिया है, जिससे वे (Commodity Market Volatility) से बचने के लिए सोने-चांदी की शरण ले रहे हैं। इसके अलावा, सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के उत्पादन में चांदी का उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ गया है। औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति का यह बेमेल संतुलन ही है जो कीमतों को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।



