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Google Glass Failure Sergey Brin: स्टीव जॉब्स बनने के जुनून में गूगल के दिग्गज ने गंवा दिए अरबों रुपये, सर्गेई ब्रिन ने खुद सुनाई अपनी सबसे बड़ी नाकामी

Google Glass Failure Sergey Brin: गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर अपनी जिंदगी के उस दौर का जिक्र किया, जब उन्हें अपनी सफलता का इतना अधिक गुमान था कि वे वास्तविकता से दूर हो गए थे। स्टैनफोर्ड के इंजीनियरिंग स्कूल में छात्रों को संबोधित करते हुए ब्रिन ने (Alphabet Co Founder Sergey Brin) के रूप में अपनी यात्रा के सबसे चुनौतीपूर्ण और असफल प्रोजेक्ट्स पर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि सफलता की चमक कभी-कभी इंसान की निर्णय लेने की क्षमता को धुंधला कर देती है। उनकी यह बातें न केवल तकनीकी जगत के लिए बल्कि नए उद्यमियों के लिए भी एक बहुत बड़ा सबक है कि कैसे अति-आत्मविश्वास बड़े-बड़े साम्राज्यों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

Google Glass Failure Sergey Brin
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जब सर्गेई ब्रिन को लगने लगा कि वो ही ‘अगले स्टीव जॉब्स’ हैं

एक समय ऐसा था जब तकनीक की दुनिया में सर्गेई ब्रिन का नाम हर किसी की जुबान पर था, और उसी दौर में उन्हें एक नया क्रांतिकारी आइडिया सूझा। उन्होंने अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि गूगल ग्लास प्रोजेक्ट के दौरान वे इतने उत्साहित थे कि (Tech Visionary Ambitions) ने उन्हें यह यकीन दिला दिया कि वे एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स के उत्तराधिकारी हैं। ब्रिन को लगा कि वे एक ऐसा उत्पाद बना रहे हैं जो दुनिया के संवाद करने के तरीके को बदल देगा। इसी जुनून में उन्होंने प्रोजेक्ट की बारीकियों और बाजार की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया, जिसका नतीजा कंपनी के लिए काफी महंगा साबित हुआ।

शानदार आइडिया और कूल स्टंट के बीच की वो बड़ी गलती

स्टैनफोर्ड में एक छात्र ने जब उनसे पूछा कि पुरानी गलतियों को दोहराने से बचने के लिए किस तरह का माइंडसेट होना चाहिए, तो ब्रिन ने बहुत ही सटीक उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि अगर आपके पास कोई (Innovative Startup Business Idea) है, तो पहले उसे तकनीकी और व्यावहारिक रूप से पूरी तरह तैयार कर लें। ब्रिन ने अपनी गलती मानते हुए सलाह दी कि उत्पाद के पूरी तरह तैयार होने से पहले ही उसकी मार्केटिंग के लिए ‘कूल स्टंट’ या बड़े दावे नहीं करने चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि गूगल ग्लास के साथ उन्होंने वही किया, जिससे लोगों की उम्मीदें आसमान पर पहुंच गईं लेकिन उत्पाद उन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।

कंज्यूमर के नजरिए को समझने में हुई भारी चूक

सर्गेई ब्रिन ने अपनी विफलता का सबसे बड़ा कारण उत्पाद को बाजार में लाने की जल्दबाजी को बताया। उन्होंने कहा कि उस वक्त हम (Consumer Market Research Analysis) को गहराई से समझने में असफल रहे थे। अगर हमने ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और उनकी जेब का ख्याल रखा होता, तो शायद हम इसे एक कम खर्चीला और उपयोगी प्रोडक्ट बना पाते। ब्रिन का मानना है कि किसी भी उत्पाद को ‘कॉमर्शियलाइज’ करने से पहले यह देखना जरूरी है कि क्या वह आम आदमी की जिंदगी में कोई वास्तविक मूल्य जोड़ रहा है या वह महज एक महंगा खिलौना बनकर रह जाएगा।

गूगल ग्लास का उदय और 1500 डॉलर का वो भारी बोझ

गूगल ने साल 2013 में बड़े शोर-शराबे के साथ ‘गूगल ग्लास’ को दुनिया के सामने पेश किया था। यह एक ऐसी डिवाइस थी जो (Wearable Tech Gadgets History) में मील का पत्थर साबित हो सकती थी। यह ग्लास स्मार्टफोन के नोटिफिकेशन को यूजर की आंखों के सामने प्रोजेक्ट करता था और दिशा-निर्देश देने में भी सक्षम था। लेकिन इसकी सबसे बड़ी बाधा इसकी कीमत और डिजाइन थी। 1500 डॉलर प्रति पीस की कीमत ने इसे आम जनता की पहुंच से कोसों दूर कर दिया था। साथ ही, इसके अजीबोगरीब डिजाइन को लोगों ने फैशन या उपयोगिता के पैमाने पर कुछ खास पसंद नहीं किया, जिससे इसकी बिक्री के आंकड़े गिरते चले गए।

2015 में थम गया गूगल का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट

तमाम कोशिशों और भारी निवेश के बावजूद, गूगल ग्लास बाजार में अपनी जगह बनाने में बुरी तरह नाकाम रहा। गूगल के इतिहास में इसे एक बड़े (Failed Tech Projects Case Study) के रूप में दर्ज किया गया। कंपनी को अंततः अपनी गलती का एहसास हुआ और साल 2015 में गूगल ने इस प्रोडक्ट का उत्पादन पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया। यह फैसला कठिन था, लेकिन इसने कंपनी को यह सिखाया कि केवल तकनीक का उन्नत होना काफी नहीं है, बल्कि उसका सामाजिक और आर्थिक रूप से स्वीकार्य होना भी अनिवार्य है। इस असफलता ने गूगल को अपने भविष्य के हार्डवेयर प्रोजेक्ट्स के प्रति अधिक सतर्क बना दिया।

हार के बाद नई शुरुआत: क्या फिर लौटेगा चश्मा?

हालांकि सर्गेई ब्रिन ने अपनी पुरानी गलतियों को स्वीकार किया है, लेकिन गूगल ने हार नहीं मानी है। कंपनी ने हाल ही में घोषणा की है कि वह एक बार फिर (Smart Glasses Future Strategy) पर काम कर रही है। इस साल मई में गूगल ने दो बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी की है ताकि वे गूगल ग्लास को एक नए अवतार में पेश कर सकें। इस बार कंपनी का ध्यान एआई (AI) और अधिक सहज डिजाइन पर है। ब्रिन के अनुभव और पिछली गलतियों से सीख लेते हुए, उम्मीद की जा रही है कि इस बार गूगल का यह प्रोजेक्ट केवल एक स्टंट नहीं, बल्कि एक उपयोगी उत्पाद साबित होगा।

भविष्य के उद्यमियों के लिए ब्रिन का सबसे बड़ा मंत्र

सर्गेई ब्रिन की यह कहानी हमें सिखाती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सीखने का एक जरिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि (Entrepreneurial Mindset and Growth) के लिए यह जरूरी है कि आप अपनी गलतियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करें और उनसे सीखें। ब्रिन आज भी गूगल और अल्फाबेट में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं और उनकी यह ईमानदारी यह दर्शाती है कि दुनिया के सबसे बड़े लीडर भी गलतियां करते हैं। उनका यह संबोधन आने वाली पीढ़ी को यह याद दिलाता रहेगा कि ‘कूल’ दिखने से ज्यादा जरूरी ‘काम का होना’ है।

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