GoldPrice – सोने में गिरावट, शुरुआती कारोबार में एक प्रतिशत से ज्यादा फिसले दाम…
GoldPrice – सोने की कीमतों में सोमवार 16 मार्च को शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। बाजार में एक प्रतिशत से अधिक की कमी देखी गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों से जुड़ी आशंकाएं बताई जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर पड़ती दिख रही है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल ने भी बाजार की दिशा को प्रभावित किया है। इन परिस्थितियों का असर घरेलू बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर देखा गया।

घरेलू बाजार में सोना और चांदी दोनों में गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान इसकी कीमत करीब 1,800 रुपये घटकर लगभग 1,56,655 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। इसी तरह चांदी की कीमतों में भी कमी देखी गई। मई डिलीवरी वाली चांदी के वायदा भाव में करीब 4,300 रुपये से अधिक की गिरावट आई और यह लगभग 2,55,101 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक संकेतों और निवेशकों की सतर्कता के कारण कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोर रुख
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं के दाम दबाव में दिखाई दिए। सिंगापुर में सुबह के कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड में लगभग 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 4,986 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया। चांदी के दाम में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली और इसका भाव करीब 80 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य धातुओं में भी गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं।
भू-राजनीतिक तनाव का भी असर
मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी तनाव भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है। हाल के दिनों में हुए हमलों के कारण तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से वैश्विक महंगाई के बढ़ने की आशंका भी पैदा हो रही है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि ऊर्जा कीमतों में लगातार वृद्धि होती है तो इसका असर वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर पर भी पड़ सकता है।
ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदें
बाजार में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू ब्याज दरों से जुड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती नहीं करते हैं तो सोने जैसे निवेश विकल्पों पर दबाव बन सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता, जबकि अन्य निवेश साधन ब्याज के माध्यम से आय दे सकते हैं। इस कारण निवेशकों की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं। हालांकि लंबी अवधि में कई निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं।
आयात आधार कीमत में बदलाव
इसी बीच केंद्र सरकार ने सोने की आयात आधार कीमत में मामूली कमी की है। नई व्यवस्था के अनुसार सोने की आधार आयात कीमत को 1664 डॉलर प्रति 10 ग्राम से घटाकर 1652 डॉलर प्रति 10 ग्राम कर दिया गया है। इस निर्णय से सोने के आयात से जुड़े व्यापारियों और ज्वैलर्स को कुछ राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
घरेलू बाजार पर संभावित असर
आयात कीमत में कमी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है। पिछले कुछ समय से वैश्विक कीमतों और मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के कारण सोने का आयात अपेक्षाकृत महंगा हो गया था। कीमत कम होने से आयातकों की लागत में कमी आ सकती है। इसके बाद ज्वैलर्स और व्यापारी अपने स्तर पर कीमतों में समायोजन कर सकते हैं।
चांदी की आयात कीमत में बढ़ोतरी
जहां सोने की आयात कीमत में कमी की गई है, वहीं चांदी के मामले में विपरीत स्थिति देखने को मिली है। सरकार ने चांदी की आयात आधार कीमत को बढ़ाकर 2,820 डॉलर प्रति किलोग्राम कर दिया है, जो पहले 2,800 डॉलर प्रति किलोग्राम थी। इस बदलाव से चांदी के आयात की लागत में थोड़ा इजाफा हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वृद्धि सीमित होने के कारण इसका प्रभाव भी सीमित ही रह सकता है।



