Indian Stock Market Recovery: हाहाकार के बीच बाजार में लौटी रौनक, क्या निवेशकों की होने वाली है चांदी…
Indian Stock Market Recovery: भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट के दौर पर शुक्रवार, 19 दिसंबर को विराम लगता नजर आया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट में निवेशकों के चेहरे खिल उठे जब बाजार ने (Bullish Opening) के साथ शानदार शुरुआत की। बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 274 अंकों की एक बड़ी छलांग लगाते हुए 84,756 के स्तर पर खुला, जिसने बाजार में उत्साह का संचार कर दिया। यह रिकवरी न केवल तकनीकी सुधार है, बल्कि निवेशकों के बीच वापस लौटते भरोसे का एक मजबूत संकेत भी मानी जा रही है।

निफ्टी ने पार किया 25,900 का मनोवैज्ञानिक स्तर
सेंसेक्स की तर्ज पर ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 ने भी अपनी ताकत दिखाई। निफ्टी 95 अंकों की बढ़त के साथ 25,911 के स्तर पर खुलने में सफल रहा, जिससे (Market Sentiment Improvement) साफ तौर पर दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि 25,900 के ऊपर की यह शुरुआत शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए एक सकारात्मक संकेत है। बाजार के जानकारों के अनुसार, अगर निफ्टी इस स्तर को बरकरार रखने में सफल रहता है, तो आने वाले सत्रों में हमें और भी बेहतर आंकड़े देखने को मिल सकते हैं।
ग्लोबल संकेतों ने फूंकी भारतीय बाजार में जान
घरेलू बाजार में आई इस तेजी के पीछे वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों का बड़ा हाथ है। वॉल स्ट्रीट पर हुए लाभ के बाद एशियाई बाजारों में भी खरीदारी का माहौल देखा गया, जिसका सीधा असर (Global Market Trends) के रूप में भारतीय बेंचमार्क पर पड़ा। गिफ्ट निफ्टी ने सुबह से ही मजबूती के संकेत देने शुरू कर दिए थे, जो पिछले बंद स्तर से लगभग 60 अंक ऊपर कारोबार कर रहा था। इस वैश्विक तालमेल ने भारतीय निवेशकों को खरीदारी का साहस दिया है, जिससे चार दिनों के नुकसान की भरपाई की उम्मीद जगी है।
वॉल स्ट्रीट में फेडरल रिजर्व की नीतियों का असर
अमेरिकी बाजार यानी वॉल स्ट्रीट में गुरुवार को आई तेजी ने दुनिया भर के बाजारों के लिए एक उत्प्रेरक का काम किया है। अमेरिका में मुद्रास्फीति के आंकड़ों में आई नरमी के बाद अब (Interest Rate Cuts) की संभावना प्रबल हो गई है, जिससे अमेरिकी सूचकांकों में उछाल देखा गया। नैस्डैक कंपोजिट में 1.38% की भारी बढ़त दर्ज की गई, जबकि डॉऊ जोन्स और एसएंडपी 500 भी हरे निशान के साथ बंद हुए। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की यह उम्मीद इमर्जिंग मार्केट्स जैसे भारत के लिए हमेशा से ही विदेशी निवेश लाने वाली खबर रही है।
एशियाई बाजारों में भी दिखा खरीदारी का जोश
केवल भारत और अमेरिका ही नहीं, बल्कि समूचे एशिया में आज सुबह से ही रौनक बनी हुई है। जापान के टॉपिक्स इंडेक्स और ऑस्ट्रेलिया के एएसएक्स 200 में 0.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि (Asian Equity Gains) को देखते हुए हांगकांग के हैंग सेंग फ्यूचर्स में भी 0.6% की मजबूती देखी गई। यूरोपीय बाजारों के फ्यूचर्स भी 1% तक की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे। वैश्विक स्तर पर फैला यह सकारात्मक माहौल इस बात की पुष्टि करता है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक अब जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं, जिसका लाभ सीधे तौर पर इक्विटी मार्केट्स को मिल रहा है।
सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी
एक तरफ जहां शेयर बाजार में रिकवरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर बुलियन मार्केट यानी कीमती धातुओं में भी ऐतिहासिक हलचल देखी जा रही है। सोने की कीमतें अपने (All Time High) के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं, जहां वैश्विक बाजार में सोना 4,335 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। चांदी भी 65.55 डॉलर के स्तर पर है, जो अपने रिकॉर्ड स्तरों के काफी पास है। निवेशकों का एक वर्ग अभी भी सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की ओर आकर्षित हो रहा है, जिससे कीमतों में लगातार मजबूती बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक राहत भरी खबर कच्चे तेल के मोर्चे से आ रही है। कच्चा तेल अपनी दूसरी साप्ताहिक गिरावट की ओर अग्रसर है, जहां ब्रेंट क्रूड (Crude Oil Prices) के मामले में 60 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है। इस साल अब तक तेल की कीमतों में लगभग 20% की कमी आई है। तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए राजकोषीय घाटे को कम करने और महंगाई पर लगाम लगाने में मददगार साबित होती है, जो अंततः शेयर बाजार के लिए एक बड़ा सपोर्ट फैक्टर है।
निवेशकों के लिए आगे की रणनीति और सावधानी
बाजार की इस शानदार शुरुआत के बाद भी विश्लेषकों ने निवेशकों को पूरी तरह से सतर्क रहने की सलाह दी है। हालांकि (Volatility Management) वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि कल तक बाजार सपाट और नकारात्मक मोड में था। गुरुवार को सेंसेक्स 78 अंक गिरकर बंद हुआ था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में अभी भी उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। ऐसे में रिटेल निवेशकों को किसी भी बड़े निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए ताकि वे अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रख सकें।



