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IranWar – ट्रंप के बयान से वैश्विक तेल बाजार में गिरावट, तनाव बरकरार

IranWar – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अचानक हलचल पैदा कर दी है। फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ दिनों से युद्ध की वजह से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका से निवेशकों में चिंता थी, लेकिन ताजा संकेतों ने बाजार को कुछ राहत दी है।

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कच्चे तेल की कीमतों में अचानक गिरावट

ट्रंप की टिप्पणी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। सोमवार को युद्ध से जुड़ी आशंकाओं के कारण तेल की कीमतें लगभग तीन वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। लेकिन मंगलवार को बाजार का रुख बदल गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 7.2 प्रतिशत घटकर लगभग 91.81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि इसमें करीब 7.15 डॉलर की गिरावट दर्ज की गई।

दूसरी ओर, WTI क्रूड की कीमत में भी तेज गिरावट देखने को मिली। इसमें 6.26 डॉलर की कमी आई और यह 88.51 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार अक्सर राजनीतिक संकेतों और संभावित कूटनीतिक कदमों पर तेजी से प्रतिक्रिया देता है। ट्रंप के बयान ने निवेशकों को यह संकेत दिया कि संघर्ष की तीव्रता शायद लंबे समय तक बनी नहीं रहेगी, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है।

ट्रंप और पुतिन के बीच हुई अहम बातचीत

तेल बाजार में आई नरमी का एक कारण रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई फोन पर बातचीत को भी माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच लगभग एक घंटे तक चर्चा हुई, जिसे क्रेमलिन ने स्पष्ट और रचनात्मक बताया है। इस वर्ष दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुतिन ने बातचीत के दौरान चेतावनी दी कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है तो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते होने वाला तेल परिवहन प्रभावित हो सकता है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि यहां से तेल की आवाजाही बाधित होती है तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।

वहीं ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका वैश्विक बाजार को स्थिर रखने के लिए तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील देने के विकल्प पर विचार कर सकता है। इस संभावना ने भी बाजार को सकारात्मक संकेत दिया।

युद्ध को लेकर ट्रंप का आकलन

मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने मौजूदा संघर्ष को सीमित अवधि का सैन्य अभियान बताया। उनका कहना था कि अमेरिकी सेना अपने निर्धारित लक्ष्यों के करीब पहुंच चुकी है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि युद्ध कब तक समाप्त हो सकता है।

ट्रंप ने ईरान को चेतावनी भी दी कि यदि उसने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की तो अमेरिका कड़े सैन्य कदम उठाएगा। उनका कहना था कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे बाधित करने की किसी भी कोशिश का सख्त जवाब दिया जाएगा।

ईरान ने खारिज किए अमेरिकी दावे

जहां एक ओर शांति की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है, वहीं युद्ध के मैदान से अलग तस्वीर सामने आ रही है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका के उन दावों को नकार दिया है जिनमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम लगभग खत्म कर दिया गया है।

ईरान की ओर से संकेत मिला है कि उसने भारी पेलोड और एक टन से अधिक वजन वाले वारहेड वाली मिसाइलों की तैनाती शुरू कर दी है। इस कदम को क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी चेतावनी दी है कि ईरान को अब तक के सबसे तीव्र सैन्य हमलों का सामना करना पड़ सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी नेतृत्व वाला अभियान और आक्रामक हो सकता है।

नेतृत्व परिवर्तन से बढ़ सकती हैं कूटनीतिक चुनौतियां

इस बीच ईरान में राजनीतिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले की खुलकर आलोचना की है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि नए नेतृत्व के साथ ईरान की नीतियां पहले की तुलना में अधिक कठोर हो सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो क्षेत्र में चल रहे तनाव को कम करने के कूटनीतिक प्रयास और जटिल हो सकते हैं।

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