OldPensionScheme – संसद में फिर उठा OPS मुद्दा, सरकार ने रखा पक्ष
OldPensionScheme – देश में पुरानी पेंशन योजना को लेकर चल रही बहस एक बार फिर संसद में गूंजती दिखाई दी। कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार OPS बहाल करने की मांग उठाई जा रही है, वहीं केंद्र सरकार ने इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट किया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली को लेकर कई भ्रांतियां हैं, जबकि आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। इस मुद्दे पर सरकार और कर्मचारियों के बीच मतभेद अब भी कायम हैं।

सरकार ने दिए पेंशन से जुड़े ताजा आंकड़े
राज्यसभा में एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार में लगभग 50 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं, पेंशनभोगियों की संख्या देखें तो बड़ी संख्या अब भी पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत आती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 69 लाख लोग OPS के तहत पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
इसके मुकाबले राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत पेंशन लेने वालों की संख्या अभी काफी कम है। जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 50 हजार के आसपास ही ऐसे पेंशनभोगी हैं जो NPS के दायरे में आते हैं। यह अंतर स्वाभाविक माना जा रहा है क्योंकि दोनों योजनाएं अलग-अलग समय में लागू हुई हैं।
OPS और NPS के बीच अंतर की वजह
सरकार के मुताबिक, यह अंतर मुख्य रूप से लागू होने की तिथि के कारण है। 1 जनवरी 2004 से पहले सरकारी सेवा में आए कर्मचारियों को OPS का लाभ मिलता है, जबकि इसके बाद नियुक्त कर्मचारियों को NPS के तहत लाया गया। यही वजह है कि पुराने कर्मचारियों की संख्या अधिक होने से OPS के लाभार्थियों की संख्या भी ज्यादा दिखाई देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय के साथ NPS के लाभार्थियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ेगी, क्योंकि नए कर्मचारी इसी प्रणाली के तहत शामिल हो रहे हैं।
NPS भुगतान को लेकर सरकार का दावा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत पेंशन भुगतान में किसी तरह की देरी की शिकायत सामने नहीं आई है। पिछले तीन वर्षों में इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण को भी इस तरह की कोई समस्या रिपोर्ट नहीं हुई है।
इस बयान के जरिए सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि NPS व्यवस्था तकनीकी और प्रशासनिक रूप से स्थिर है और समय पर भुगतान सुनिश्चित कर रही है।
OPS बहाली पर केंद्र का स्पष्ट रुख
पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग पर केंद्र सरकार ने कहा कि यह निर्णय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों के लिए किस प्रकार की पेंशन व्यवस्था अपनाएं, यह उनका अपना विषय है।
हालांकि, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने इस पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, OPS में वापसी करने से राज्यों पर भविष्य में वित्तीय बोझ बढ़ सकता है, क्योंकि इसमें सरकार को पूरी पेंशन की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है।
कई राज्यों ने OPS को अपनाया
इन चिंताओं के बावजूद कुछ राज्य सरकारों ने कर्मचारी संगठनों के दबाव और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए OPS को फिर से लागू किया है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और झारखंड जैसे राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं।
इन फैसलों ने देशभर में इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या OPS वास्तव में कर्मचारियों के लिए बेहतर विकल्प है या दीर्घकाल में यह आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।
तीनों पेंशन योजनाओं का स्वरूप
अगर तीनों प्रमुख पेंशन व्यवस्थाओं की बात करें तो OPS एक निश्चित लाभ वाली योजना है, जिसमें रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन मिलती है। NPS इसके विपरीत योगदान आधारित प्रणाली है, जिसमें अंतिम पेंशन बाजार से जुड़े रिटर्न पर निर्भर करती है।
वहीं, हाल में पेश की गई एकीकृत पेंशन योजना का उद्देश्य इन दोनों के बीच संतुलन बनाने का है, ताकि कर्मचारियों को कुछ हद तक निश्चितता भी मिल सके और प्रणाली टिकाऊ भी बनी रहे।
डिजिटल सेवाओं से आसान हुई प्रक्रिया
सरकार ने पेंशन से जुड़ी सेवाओं को सरल बनाने के लिए डिजिटल पहल भी तेज की है। ‘भविष्य’ जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन प्रक्रिया को आसान किया गया है। साथ ही डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, ऑनलाइन निकासी और एसएमएस व ईमेल अलर्ट जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं।
इन कदमों का उद्देश्य पेंशनभोगियों के लिए प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाना है, ताकि उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।



