Safe Cars in India: क्या आपकी सपनों की कार भी है मौत का चलता-फिरता ताबूत, ANCAP रेटिंग ने चौंकाया…
Safe Cars in India: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इन दिनों मारुति सुजुकी फ्रोंक्स अपनी स्टाइलिश लुक और बेहतरीन परफॉरमेंस के लिए (best selling cars) युवाओं की पहली पसंद बनी हुई है। लेकिन हाल ही में ANCAP क्रैश टेस्ट के नतीजों ने इस गाड़ी की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। भारत में बनी और विदेशों में एक्सपोर्ट की जाने वाली इस कार को जब अंतरराष्ट्रीय मानकों पर परखा गया, तो परिणाम उम्मीद से कहीं ज्यादा डरावने निकले। यह खबर उन लाखों ग्राहकों के लिए एक बड़ा झटका है जो मारुति के भरोसे पर अपनी मेहनत की कमाई निवेश करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली महज 1-स्टार रेटिंग ने बढ़ाई ग्राहकों की चिंता
जब सुजुकी फ्रोंक्स का साल 2025 में कड़ा सुरक्षा परीक्षण किया गया, तो इसे केवल 1-स्टार रेटिंग (Global NCAP safety standards) देकर संतुष्ट होना पड़ा। यह आंकड़ा इसलिए भी डराने वाला है क्योंकि इसमें एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन के लिए मात्र 48% और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन के लिए सिर्फ 40% अंक ही मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि वल्नरबल रोड यूजर प्रोटेक्शन में भी यह गाड़ी 65% पर ही सिमट गई। जब सुरक्षा के पैमानों पर गाड़ी इतनी कमजोर साबित हो, तो सड़क पर चलते समय परिवार की सलामती को लेकर डर बैठना स्वाभाविक है।
करोड़ों की लग्जरी भी फेल, जीप रैंगलर की रेटिंग देख रह जाएंगे दंग
सिर्फ बजट गाड़ियां ही नहीं, बल्कि लग्जरी सेगमेंट की धुरंधर मानी जाने वाली कारें भी इस सुरक्षा जाल में फंसती नजर आ रही हैं। करीब 64 लाख रुपये की भारी-भरकम कीमत वाली (off-roading SUV) जीप रैंगलर को भी ANCAP टेस्ट में महज 1-स्टार रेटिंग से ही संतोष करना पड़ा है। सुरक्षा के इतने बड़े-बड़े दावे करने वाली इस कंपनी के लिए यह परिणाम किसी कड़वे सबक से कम नहीं है। एडल्ट प्रोटेक्शन में इसे 50% और सेफ्टी असिस्ट फीचर्स में तो यह महज 32% अंकों तक ही पहुंच पाई, जो इसकी प्रीमियम इमेज पर एक बड़ा दाग है।
आखिर क्यों एक ही कार की सुरक्षा रेटिंग अलग-अलग देशों में बदल जाती है?
यह एक बड़ा विरोधाभास है कि जो फ्रोंक्स भारत में सुरक्षित मानी जाती है, वही ग्लोबल मार्केट में असुरक्षित (automobile export quality) घोषित कर दी जाती है। दरअसल, भारत में तैयार होकर एक्सपोर्ट होने वाली इन गाड़ियों के स्ट्रक्चर और सेफ्टी फीचर्स में अक्सर देशों के मानकों के हिसाब से बदलाव किए जाते हैं। यही कारण है कि भारतीय बाजार में जहां कुछ NCAP टेस्ट में इसे 4 या 5 स्टार तक मिल जाते हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कड़े सुरक्षा मानकों पर यह खरी नहीं उतर पाती। यह अंतर कहीं न कहीं विनिर्माण प्रक्रिया और सुरक्षा के दोहरे मापदंडों की ओर इशारा करता है।
महिंद्रा और टाटा जैसे दिग्गजों के बीच सुरक्षा की ये जंग हुई तेज
वर्तमान में भारतीय ग्राहक अब माइलेज के साथ-साथ मजबूती को भी प्राथमिकता देने लगा है, यही वजह है कि (upcoming car launches) में सुरक्षा फीचर्स पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। महिंद्रा की XUV 7XO और टाटा की सिएरा जैसी गाड़ियां अब बाजार में आने वाली हैं, जिनसे लोगों को काफी उम्मीदें हैं। सुरक्षा के प्रति बढ़ती इसी जागरूकता ने बड़ी कंपनियों को अपने पुराने मॉडल्स की मजबूती पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। जब तक हर ग्राहक अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देगा, तब तक कंपनियां ऐसे कमजोर ढांचे वाली गाड़ियां पेश करती रहेंगी।
पुराने खिलाड़ियों का भी रहा है सुरक्षा के मोर्चे पर बेहद खराब प्रदर्शन
ANCAP की इस ‘हॉल ऑफ शेम’ लिस्ट में सिर्फ फ्रोंक्स या रैंगलर ही शामिल नहीं हैं, बल्कि इतिहास में कई और नाम भी दर्ज हैं। निसान उर्वान, प्रोटोन जमबक और मित्सुबिशी एक्सप्रेस जैसे (vehicle safety ratings) मॉडल्स को भी अतीत में 1-स्टार रेटिंग मिल चुकी है। हालांकि उनके टेस्ट काफी साल पहले हुए थे, लेकिन आज के आधुनिक युग में भी जब नई गाड़ियां सुरक्षा के न्यूनतम स्तर को पार नहीं कर पातीं, तो यह ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग की प्रगति पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। सड़क पर सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है।
कार खरीदने से पहले विज्ञापन नहीं बल्कि इन सुरक्षा मानकों को जरूर परखें
एक आम आदमी के लिए कार सिर्फ लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि उसके परिवार के सपनों की सवारी होती है। विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले (latest car features) और चमक-धमक वाले फीचर्स अक्सर ग्राहकों का ध्यान असली मुद्दे यानी मजबूती से भटका देते हैं। फ्रोंक्स की 1-स्टार रेटिंग हमें यह सिखाती है कि कार के इंटीरियर और टचस्क्रीन से ज्यादा जरूरी उसकी बॉडी शेल की मजबूती और एयरबैग्स की कार्यक्षमता है। अगली बार शोरूम जाने से पहले अपनी पसंदीदा कार की क्रैश टेस्ट रिपोर्ट पढ़ना बिल्कुल न भूलें।



