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Stock Market: भारतीय शेयर बाजार आज फिर सँभलकर चला, निवेशक आरबीआई की बैठक पर टकटकी लगाए बैठे हैं

Stock Market: गुरुवार सुबह घरेलू शेयर बाजार ने लगभग सपाट शुरुआत की। निफ्टी 50 में महज चार अंक की मामूली गिरावट के साथ 25,981 के करीब खुला, जबकि सेंसेक्स भी 85 हजार के नीचे 84,987 पर आकर ठहर गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये में कमजोरी का दबाव तो बना हुआ है, लेकिन घरेलू स्तर पर मजबूत आर्थिक आधार और कंपनियों के अच्छे नतीजों ने बाजार को ज्यादा नीचे नहीं गिरने दिया। फिलहाल पूरा ध्यान भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर है, जिसकी घोषणा जल्द ही होने वाली है।

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आरबीआई की नीति से बाजार को मिलेगी नई दिशा

बाजार के जानकार मानते हैं कि अभी शेयर बाजार एक छोटे सुधार के दौर से गुजर रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले कुछ दिनों में भारी बिकवाली की है, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है। साथ ही रुपया भी 85 के पार चला गया है, जो आयात महंगा कर मुद्रास्फीति को बढ़ाने का खतरा पैदा कर रहा है। लेकिन देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद अभी भी मजबूत है। इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकारी खर्च, कंपनियों के बढ़ते मुनाफे, स्थिर खपत और नीतिगत स्थिरता लंबे समय तक बाजार को सहारा देती रहेगी।

अगर आरबीआई ब्याज दरों में कटौती या तरलता बढ़ाने का कोई संकेत देता है, तो बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं अगर महंगाई पर सख्ती दिखाई गई, तो बिकवाली और बढ़ सकती है। यही वजह है कि निवेशक हर खबर पर नजर बनाए हुए हैं।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मिला-जुला कारोबार

बड़े शेयरों के मुकाबले मध्यम और छोटी कंपनियों के सूचकांक थोड़े अलग व्यवहार दिखा रहे हैं। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में मामूली गिरावट रही। इसका मतलब साफ है कि बड़े निवेशक अभी सतर्क हैं, लेकिन खुदरा और घरेलू निवेशक मिडकैप-स्मॉलकैप क्षेत्र में मौके तलाश रहे हैं। लंबे समय के लिए निवेश करने वालों के लिए यह सेगमेंट अभी भी आकर्षक लग रहा है।

किन सेक्टरों ने दिखाई मजबूती, किनमें रही सुस्ती

सेक्टर्स की बात करें तो सुबह के कारोबार में ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर हरे निशान में रहे। कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजे और वैश्विक मांग में सुधार इन सेक्टरों को सहारा दे रहा है। दूसरी तरफ एफएमसीजी, फार्मा और मीडिया शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखा। महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता इन सेक्टरों पर ज्यादा असर डाल रही है। बैंकिंग शेयर भी सतर्क कारोबार कर रहे हैं क्योंकि सबकी निगाहें आरबीआई के रुख पर टिकी हैं।

वैश्विक बाजारों का असर अब भी बना हुआ है

दुनिया भर के बाजारों में भी मिला-जुला माहौल है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित संपत्तियों की ओर जा रहा है, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी हो रही है। एशियाई बाजार हल्की गिरावट में कारोबार कर रहे हैं। कच्चा तेल 74-75 डॉलर के दायरे में बना हुआ है, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए राहत की बात है। अगर तेल और मजबूत हुआ तो महंगाई फिर सिर उठा सकती है, जिसका सीधा असर आरबीआई के फैसले पर पड़ेगा।

अगले कुछ दिन रहेंगे उतार-चढ़ाव भरे

आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणा तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। ट्रेडर और अल्पकालिक निवेशक सावधानी से काम लेंगे, जबकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट में अच्छी कंपनियों को खरीदने का मौका भी हो सकता है। कुल मिलाकर भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत अच्छी है, बस कुछ बाहरी और आंतरिक दबावों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

जो निवेशक धैर्य रखेंगे और मजबूत कंपनियों पर दांव लगाएंगे, उनके लिए आने वाला समय फायदेमंद साबित हो सकता है। बाजार हमेशा उतार-चढ़ाव में ही आगे बढ़ता है, और यही उसकी खूबसूरती भी है।

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