StockMarket – विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में बढ़ी अस्थिरता
StockMarket – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। पिछले कुछ हफ्तों में घरेलू बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली गई है, जिससे निवेशकों की चिंता भी बढ़ी है।

16 कारोबारी दिनों में भारी निकासी
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 26 फरवरी से 20 मार्च के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। यह आंकड़ा बाजार के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।
अगर इस अवधि को देखें तो औसतन हर घंटे बड़ी मात्रा में शेयरों की बिक्री की गई है, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। इस साल के शुरुआती कारोबारी सत्रों में भी अधिकतर दिनों में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली का रुख बनाए रखा है।
वैश्विक परिस्थितियों का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में जोखिम लेने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे विदेशी निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
इसके अलावा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी एक बड़ा कारण है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता को लेकर सवाल उठते हैं, तो निवेशक उभरते बाजारों से दूरी बनाना शुरू कर देते हैं।
घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा
जहां एक ओर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को सहारा देने का काम किया है। इसी अवधि में घरेलू निवेशकों ने बड़ी मात्रा में शेयरों की खरीदारी की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, म्यूचुअल फंड निवेश, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड के लगातार निवेश की वजह से बाजार में संतुलन बना हुआ है। इससे गिरावट की रफ्तार कुछ हद तक नियंत्रित रही है।
प्रमुख सूचकांकों में गिरावट
बिकवाली के दबाव का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी देखा गया है। हाल के दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली है, जिससे व्यापक बाजार प्रभावित हुआ है। यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर हुआ है और वे सतर्क रुख अपना रहे हैं।
वैश्विक बाजारों में भी दबाव
भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिल रहा है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है। इससे साफ है कि मौजूदा परिस्थितियां केवल एक देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर वैश्विक स्तर पर है।
आगे की स्थिति पर नजर
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक स्थिति स्थिर होती है, तो बाजार में सुधार की संभावना बन सकती है।
फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।



