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MusicIndustry – ओडिया गायिका गीता पटनायक का निधन, शोक की लहर

MusicIndustry – ओडिया संगीत जगत की जानी-मानी आवाज गीता पटनायक अब हमारे बीच नहीं रहीं। 73 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। परिवार के अनुसार, कुछ दिन पहले एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। बाद में उन्हें कटक के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि की। उपचार के दौरान उनकी स्थिति गंभीर बनी रही और रविवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही ओडिशा के कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

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अस्पताल में चला इलाज, नहीं बच सकीं

परिजनों ने बताया कि कार्यक्रम से लौटने के बाद उनकी सेहत तेजी से गिरने लगी थी। अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। चिकित्सकीय जांच के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। परिवार ने बताया कि सोमवार को उनका पार्थिव शरीर कटक स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

ओडिया संगीत की पहचान थीं गीता पटनायक

गीता पटनायक ने अपने लंबे करियर में ओडिया संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी आवाज में एक अलग मिठास और गहराई थी, जिसने श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाई। उन्होंने कई प्रसिद्ध संगीतकारों और गायकों के साथ काम किया, लेकिन विशेष रूप से अक्षय मोहंती के साथ गाए गए गीतों के कारण उन्हें व्यापक पहचान मिली। फिल्म ‘जजबार’ का लोकप्रिय गीत ‘फुर किना उदिगाला बानी’ आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद पसंद किया जाता है।

उनकी गायकी में पारंपरिक ओडिया लोकधुनों की आत्मा और आधुनिक संगीत की लय का सुंदर मेल देखने को मिलता था। यही वजह रही कि उनके गीत पीढ़ियों तक गुनगुनाए जाते रहे।

राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत ने जताया शोक

गीता पटनायक के निधन पर राज्य के प्रमुख नेताओं और कला क्षेत्र से जुड़े लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि उनका जाना ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने कहा कि गीता पटनायक की सुरीली आवाज ने ओडिया संगीत को घर-घर तक पहुंचाया और उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

एक युग का अंत

करीब पांच दशकों तक सक्रिय रहीं गीता पटनायक ने संगीत को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि साधना की तरह जिया। रेडियो से लेकर मंचीय प्रस्तुतियों तक, उन्होंने अपनी पहचान मेहनत और समर्पण से बनाई। उनके गीतों में भावनाओं की ऐसी सादगी होती थी, जो सीधे दिल को छू जाती थी।

संगीत समीक्षकों का मानना है कि उन्होंने ओडिया संगीत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी आवाज ने पारंपरिक गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया।

प्रशंसकों में शोक

उनके निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई। प्रशंसकों ने लिखा कि उनकी आवाज हमेशा यादों में जीवित रहेगी। कई कलाकारों ने कहा कि गीता पटनायक उनके लिए प्रेरणा स्रोत थीं।

ओडिया संगीत जगत में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा। उनकी गायकी ने जिस सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

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