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SudhaChandran – अनरिलीज़ फिल्म ‘सीता सलमा सूजी’ का खुलासा

SudhaChandran – अभिनेत्री और कथक नृत्यांगना सुधा चंद्रन ने हाल ही में अपने करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया, जिसने फिल्म प्रेमियों का ध्यान खींच लिया है। टीवी और सिनेमा दोनों में अपनी अलग पहचान बना चुकी सुधा ने बताया कि वह एक ऐसी फिल्म का हिस्सा रही हैं, जो बनकर तैयार तो हुई, लेकिन कभी पर्दे तक नहीं पहुंच सकी। यह प्रोजेक्ट कथित तौर पर चर्चित फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ के महिला प्रधान रूपांतरण के तौर पर तैयार किया गया था।

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फीमेल वर्जन का नाम था ‘सीता सलमा सूजी’

एक साक्षात्कार के दौरान सुधा चंद्रन ने खुलासा किया कि इस फिल्म का नाम ‘सीता सलमा सूजी’ था। इसे 1970 के दशक की लोकप्रिय फिल्म के महिला केंद्रित संस्करण के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, यह फिल्म रिलीज नहीं हो सकी। सुधा के अनुसार, उस समय पूरी टीम ने इस प्रोजेक्ट पर गंभीरता और उत्साह के साथ काम किया था।

उन्होंने बताया कि फिल्म में उनके साथ अर्चना पूरन सिंह और मुनमुन सेन भी प्रमुख भूमिकाओं में थीं। इसके अलावा जीत उपेंद्र, शेखर सुमन और एस.डी. बनर्जी जैसे कलाकार भी इस फिल्म का हिस्सा थे। निर्देशन की जिम्मेदारी कमर नरवी के पास थी। सुधा ने कहा कि उस दौर में सभी कलाकारों को भरोसा था कि वे एक सफल कहानी को नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

फिल्म के दौरान हुई जीवनसाथी से मुलाकात

इस अधूरी रह गई फिल्म से जुड़ी एक और खास बात यह है कि इसी प्रोजेक्ट के दौरान सुधा की मुलाकात उनके भावी पति रवि डांग से हुई। रवि इस फिल्म में एसोसिएट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। सुधा ने बताया कि शुरुआत में उनकी रवि को लेकर धारणा अलग थी। उन्हें लगता था कि शायद वह अभिनय में करियर बनाने आए होंगे और परिस्थितियों के चलते निर्देशन टीम का हिस्सा बने।

समय के साथ बातचीत बढ़ी और दोनों एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझने लगे। सुधा ने स्वीकार किया कि उनकी पहली छाप सकारात्मक नहीं थी। वह अक्सर उन्हें ‘गुड मॉर्निंग’ कहती थीं, लेकिन जवाब नहीं मिलता था। जब उन्होंने इस बारे में सीधे सवाल किया, तो रवि ने साफ कहा कि उन्हें काम के लिए भुगतान मिलता है, औपचारिक अभिवादन के लिए नहीं। इस जवाब ने सुधा को प्रभावित किया और उन्हें रवि के व्यक्तित्व में स्पष्टता और आत्मविश्वास नजर आया।

परिवार को मनाना रहा चुनौतीपूर्ण

रिश्ता आगे बढ़ने के साथ दोनों ने विवाह का निर्णय लिया। हालांकि, परिवार की सहमति आसान नहीं थी। सुधा ने बताया कि उनकी मां इंडस्ट्री से जुड़े व्यक्ति को दामाद के रूप में स्वीकार करने को लेकर सशंकित थीं। बाद में उन्होंने अपने पिता से खुलकर बात की। अंततः मां ने कहा कि उन्हें रवि के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन अपनी बेटी के फैसले पर भरोसा है। इस विश्वास ने दोनों के रिश्ते को मजबूती दी।

करियर और यादों का अहम हिस्सा

सुधा चंद्रन का यह खुलासा उन फिल्मों की ओर ध्यान खींचता है, जो बनकर भी दर्शकों तक नहीं पहुंच पातीं। ‘सीता सलमा सूजी’ भले ही रिलीज न हो सकी, लेकिन यह उनके जीवन और करियर का महत्वपूर्ण अध्याय रही। इसी प्रोजेक्ट ने उन्हें जीवनसाथी से मिलवाया और कई यादगार अनुभव दिए।

फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे प्रोजेक्ट्स होते हैं जो किसी कारणवश अधूरे रह जाते हैं, लेकिन उनसे जुड़े कलाकारों के लिए वे यादों का स्थायी हिस्सा बन जाते हैं। सुधा चंद्रन की यह कहानी भी उसी तरह का एक अनकहा अध्याय सामने लाती है।

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