Perfume Chemicals Thyroid Risk: सावधान! आपकी खुशबू बन सकती है थायराइड की दुश्मन…
Perfume Chemicals Thyroid Risk: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अच्छी खुशबू व्यक्तित्व का हिस्सा बन गई है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी पसंदीदा फ्रेग्रेंस फूलों से नहीं बल्कि घातक रसायनों से तैयार होती है? आधुनिक परफ्यूम और डियो में मौजूद सिंथेटिक तत्व केवल महक ही नहीं देते, बल्कि शरीर के नाजुक हार्मोनल सिस्टम में भी दखल देते हैं। मेडिकल साइंस की भाषा में इन्हें (Endocrine Disrupting Chemicals) कहा जाता है, जो शरीर के प्राकृतिक हार्मोन संतुलन को बुरी तरह बिगाड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन रसायनों का सीधा प्रभाव हमारे थायराइड ग्लैंड पर पड़ता है, जो शरीर की ऊर्जा और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है।

त्वचा पर सीधे परफ्यूम लगाने के गंभीर दुष्परिणाम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि परफ्यूम का इस्तेमाल कपड़ों पर हल्की मात्रा में करना ही सुरक्षित है। इसे सीधे त्वचा पर छिड़कना, खासकर गर्दन के पास, सेहत के लिए (Skin Chemical Absorption) का बड़ा जरिया बन सकता है। डॉक्टर गर्दन के हिस्से को एक बेहद संवेदनशील क्षेत्र मानते हैं क्योंकि यहीं पर थायराइड ग्लैंड स्थित होता है। जब रसायनों से भरपूर परफ्यूम सीधे इस हिस्से के संपर्क में आता है, तो यह त्वचा के जरिए सोख लिया जाता है और थायराइड फंक्शन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, खुशबू का चुनाव करते समय सावधानी बरतना और फ्रेग्रेंस-फ्री कॉस्मेटिक उत्पादों को प्राथमिकता देना एक बेहतर कदम हो सकता है।
थायराइड ग्लैंड: शरीर का एनर्जी पावरहाउस
थायराइड ग्लैंड हमारे गले के निचले हिस्से में स्थित होता है और इसका मुख्य कार्य थायरोक्सिन हार्मोन बनाना है। यह हार्मोन शरीर में ऊर्जा का संचार करता है और (Metabolic Rate Regulation) के जरिए शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है। जब इस ग्रंथि में असंतुलन पैदा होता है, तो ऊर्जा का स्तर गिर जाता है और व्यक्ति को ठंड बर्दाश्त करने की क्षमता कम हो जाती है। भारत में लगभग 4.2 करोड़ लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, जिसका मतलब है कि हर 10 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी रूप में थायराइड विकार की चपेट में है।
इन लक्षणों को पहचानकर शुरू करें सही उपचार
थायराइड की समस्या होने पर शरीर कई तरह के संकेत देना शुरू कर देता है। इनमें बेवजह की थकान, घबराहट, अत्यधिक चिड़चिड़ापन और हाथों में कंपन महसूस होना प्रमुख हैं। (Thyroid Symptoms Awareness) इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके प्रभाव से नींद की कमी, तेजी से बालों का झड़ना और मांसपेशियों में दर्द जैसी शिकायतें भी होने लगती हैं। यदि समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए, तो यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जीवनशैली में बदलाव और प्राकृतिक उपचार ही सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं।
योग और प्राणायाम: थायराइड का अचूक इलाज
योग गुरु स्वामी रामदेव के अनुसार, योग के जरिए थायराइड को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार के साथ पवनमुक्तासन, सर्वांगासन और हलासन का अभ्यास (Yoga for Thyroid) में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अलावा उष्ट्रासन, मत्स्यासन और भुजंगासन जैसे आसन गले की मांसपेशियों पर दबाव डालते हैं, जिससे हार्मोन का रिसाव संतुलित होता है। नियमित योग न केवल ग्रंथि की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, बल्कि तनाव को कम करके शरीर को आंतरिक रूप से मजबूती प्रदान करता है।
आयुर्वेद की शरण में: रामबाण घरेलू नुस्खे
आयुर्वेद में थायराइड के लिए कई प्रभावी जड़ी-बूटियों का वर्णन मिलता है। मुलेठी का सेवन गले के लिए वरदान है, वहीं तुलसी और एलोवेरा जूस (Natural Ayurvedic Treatment) के तौर पर शरीर की शुद्धि करते हैं। रात में गर्म दूध के साथ एक चम्मच अश्वगंधा लेना और रोजाना त्रिफला का सेवन करना पाचन और हार्मोनल हेल्थ के लिए उत्तम है। इसके अतिरिक्त, धनिया के बीजों को पीसकर उनके पानी का सेवन करना थायराइड रोगियों के लिए एक परखा हुआ नुस्खा है। इन प्राकृतिक उपायों को अपनाकर आप केमिकल्स के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।



