स्वास्थ्य

Air Purifier Side Effects: शुद्ध हवा का शॉक दे सकता है फेफड़ों को धोखा, एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने वाले हो जाएं सावधान

Air Purifier Side Effects: सर्दियों के आते ही जब शहरों की आबोहवा दमघोंटू होने लगती है, तब एयर प्यूरीफायर एक जीवन रक्षक मशीन की तरह महसूस होता है। यह सच है कि ये उपकरण घर के भीतर जहरीले एक्यूआई (AQI) को तेजी से घटाकर सुरक्षित स्तर पर ले आते हैं, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने (Respiratory Health) को लेकर एक चौंकाने वाली चेतावनी दी है। घंटों तक घर की बिल्कुल शुद्ध हवा में रहने के कारण हमारे फेफड़ों को एक ऐसी आदत लग जाती है जो भविष्य में खतरनाक साबित हो सकती है।

Air Purifier Side Effects
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घर से बाहर निकलते ही शरीर को लगता है जबरदस्त झटका

असली खतरा तब पैदा होता है जब आप घर के शुद्ध वातावरण से निकलकर अचानक सड़क की प्रदूषित हवा के संपर्क में आते हैं। हवा की गुणवत्ता में आने वाला यह तीव्र उतार-चढ़ाव शरीर के लिए (Systemic Shock) की तरह काम करता है। हमारा श्वसन तंत्र इस भारी अंतर को झेलने के लिए तैयार नहीं होता, जिसके कारण फेफड़ों में अचानक सूजन आ सकती है। जब आप 50 के AQI से सीधे 500 के AQI में जाते हैं, तो हृदय और श्वसन नलिकाओं पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है।

‘क्लीन एयर टॉलरेंस’ और शरीर की कमजोर पड़ती ढाल

लगातार कृत्रिम रूप से शुद्ध की गई हवा में रहने से हमारे शरीर की ‘प्रदूषण सहने की क्षमता’ कम होने लगती है। चिकित्सा की भाषा में इसे क्लीन एयर टॉलरेंस कहा जाता है, जहाँ (Immune System) बाहरी कणों के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील हो जाता है। जब कोई व्यक्ति अचानक जहरीली हवा में सांस लेता है, तो उसके वायुमार्ग तेजी से संकुचित होने लगते हैं। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा हो सकती है क्योंकि उनका शरीर इस तीव्र बदलाव को नियंत्रित करने में विफल रहता है।

फिल्टर की अनदेखी बना सकती है प्यूरीफायर को जहरीला

एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसकी नियमित सर्विसिंग भी उतनी ही जरूरी है। यदि आप समय पर इसके HEPA और कार्बन फिल्टर को नहीं बदलते, तो यह मशीन हवा साफ करने के बजाय (Bacterial Growth) का केंद्र बन जाती है। गंदे फिल्टर से निकलने वाली हवा में सूक्ष्म जीवाणु और जहरीली गैसें हो सकती हैं जो सीधे खून में मिल जाती हैं। इसके अलावा, खिड़की-दरवाजे खोलकर मशीन चलाने से प्यूरीफायर पर दबाव बढ़ता है और वह छोटे हानिकारक कणों को रोकने में नाकाम रहता है।

मानसिक स्वास्थ्य और एकाग्रता पर प्रदूषण का प्रहार

प्रदूषित और शुद्ध हवा के बीच बार-बार आने-जाने का प्रभाव केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे दिमाग को भी प्रभावित करता है। अचानक प्रदूषित वातावरण में जाने से सिरदर्द, चक्कर आना और मानसिक धुंधलापन महसूस हो सकता है। यह ‘शॉक’ शरीर में (Stress Hormones) को सक्रिय कर देता है, जिससे व्यक्ति के व्यवहार में चिड़चिड़ापन और काम में एकाग्रता की कमी साफ दिखने लगती है। मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला यह असर लंबे समय में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

श्वसन तंत्र को ‘शॉक’ से बचाने के प्रभावी उपाय

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल बंद कर दें, बल्कि आपको इसके उपयोग का सही तरीका सीखना होगा। घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क का अनिवार्य उपयोग करें ताकि (Lung Function) पर अचानक दबाव न पड़े। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर के अंदर की हवा को बिल्कुल 0 के बजाय 100-150 के मध्यम स्तर पर रखें। ऐसा करने से आपका शरीर पूरी तरह कृत्रिम हवा पर निर्भर नहीं होगा और बाहर जाने पर उसे बहुत बड़ा झटका महसूस नहीं होगा।

आंतरिक मजबूती के लिए सही आहार का चुनाव

बाहरी सुरक्षा के साथ-साथ शरीर को अंदर से मजबूत बनाना भी बेहद जरूरी है। अपनी डाइट में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें ताकि (Cellular Repair) की प्रक्रिया तेज हो सके। भरपूर पानी पीने से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और म्यूकस झिल्ली नम रहती है, जो प्रदूषण के कणों को रोकने में मदद करती है। याद रखिए, तकनीक केवल आपकी सहायता कर सकती है, लेकिन शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता ही आपको प्रदूषण के खिलाफ लंबी जंग जिताएगी।

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