स्वास्थ्य

Ayurvedic Way to Eat Curd in Winter: कड़कड़ाती ठंड में दही खाने से पहले जान लें आयुर्वेद के ये नियम, वरना फायदे की जगह होगा नुकसान

Ayurvedic Way to Eat Curd in Winter: सर्दियों के मौसम में अक्सर लोग ठंडी तासीर वाली चीजों से दूरी बना लेते हैं ताकि सर्दी-जुकाम और गले के संक्रमण से बचा जा सके। लेकिन जब बात दही की आती है, तो इसे लेकर हमेशा से एक असमंजस बना रहता है। आयुर्वेद में दही को पाचन और इम्युनिटी के लिए किसी अमृत से कम नहीं माना गया है, बशर्ते उसे सही समय और तरीके से खाया जाए। (Benefits of Curd in Winter Ayurveda) के अनुसार, यदि आप दही का मिजाज समझकर उसका सेवन करते हैं, तो यह कड़कड़ाती ठंड में भी आपके शरीर को अंदर से पोषण और मजबूती प्रदान कर सकता है।

Ayurvedic Way to Eat Curd in Winter
Ayurvedic Way to Eat Curd in Winter

समय का चुनाव: दोपहर है सबसे सटीक वक्त

आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में दही खाने का सबसे उत्तम समय दोपहर का होता है। इस समय सूरज की रोशनी और शरीर की जठराग्नि दोनों ही सक्रिय होती हैं, जो दही को आसानी से पचाने में मदद करती हैं। (Best Time for Eating Curd) का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि शाम को सूरज ढलने के बाद या रात के समय दही खाने से शरीर में ‘कफ’ दोष बढ़ सकता है। रात में दही का सेवन श्वसन तंत्र और गले की तकलीफों को न्योता दे सकता है, इसलिए इसे केवल लंच के समय ही प्राथमिकता दें।

फ्रिज के ठंडे दही से बना लें दूरी

सर्दियों में दही खाते समय सबसे बड़ी गलती उसे फ्रिज से निकालकर तुरंत खा लेना है। न्यूट्रिशनिस्ट और आयुर्वेद विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कभी भी सीधा फ्रिज वाला ठंडा दही न खाएं। (Curd Temperature Importance in Winter) को समझते हुए, दही खाने से कम से कम 1-2 घंटे पहले उसे फ्रिज से बाहर निकालकर रख देना चाहिए। जब दही सामान्य कमरे के तापमान (Room Temperature) पर आ जाए, तभी उसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और लाभकारी होता है।

तासीर संतुलित करने के लिए मसालों का प्रयोग

दही की तासीर को सर्दियों के अनुकूल बनाने के लिए उसमें कुछ खास मसालों का मिश्रण करना बहुत जरूरी है। सादे दही की जगह इसमें एक चुटकी भुना हुआ जीरा, काला नमक या सोंठ (अदरक का पाउडर) मिलाएं। (Herbs and Spices for Curd) का यह कॉम्बिनेशन न केवल दही के स्वाद को दोगुना कर देता है, बल्कि इसके शीतल प्रभाव को भी कम करता है। सोंठ और जीरा पाचन क्रिया को दुरुस्त रखते हैं और कफ बनने की संभावना को पूरी तरह समाप्त कर देते हैं।

ताजा दही: संक्रमण से बचने का एकमात्र उपाय

ठंड के मौसम में हमेशा घर पर जमाया हुआ ताजा दही ही खाना चाहिए। कई दिनों का रखा हुआ या अत्यधिक खट्टा दही बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ सकता है। (Importance of Fresh Curd in Winter) इसलिए भी अधिक है क्योंकि खट्टा दही गले में खराश और इन्फेक्शन पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है। आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में मीठा और ताजा दही ही शरीर को बल प्रदान करता है, इसलिए बासी दही के सेवन से परहेज करना ही बुद्धिमानी है।

चीनी नहीं, गुड़ के साथ बनाएं बेहतरीन कॉम्बिनेशन

यदि आप मीठा दही खाने के शौकीन हैं, तो सर्दियों में चीनी को पूरी तरह नजरअंदाज करें। इसकी जगह दही में गुड़ का इस्तेमाल करें। (Curd and Jaggery Health Benefits) का यह मेल सर्दियों के लिए सबसे ताकतवर माना जाता है। गुड़ की तासीर गर्म होती है जो दही के साथ मिलकर एक संतुलित आहार तैयार करती है। यह न केवल आपके खून को साफ करता है बल्कि आयरन की कमी को भी पूरा करता है और शरीर को अंदरूनी गर्माहट देता है।

इन गलतियों से बचें: आयुर्वेद की सख्त मनाही

दही खाते समय कुछ वर्जित मेल (Incompatible Foods) का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कभी भी दही और दूध को एक साथ न लें, क्योंकि यह त्वचा संबंधी रोग और पाचन विकार पैदा कर सकता है। साथ ही, बहुत अधिक खट्टा दही और मछली के साथ दही का सेवन आयुर्वेद में सख्त वर्जित है। सर्दियों में रात के समय दही का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है, क्योंकि यह साइनस और अस्थमा के मरीजों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

समझदारी से खाएं और स्वस्थ रहें

दही प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स का एक अद्भुत स्रोत है। आलू-मूली के पराठों के साथ दही का आनंद लेना सर्दियों का एक सुखद अनुभव है। यदि आप (Healthy Eating Habits in Winter) का पालन करते हुए ऊपर बताए गए ‘गोल्डन रूल्स’ को अपनाते हैं, तो दही आपकी हड्डियों को मजबूती देगा और आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाएगा। बस याद रखें, सही समय, सही तापमान और सही मसालों का साथ ही दही को सर्दियों का ‘सुपरफूड’ बनाता है।

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