HealthCheck – बढ़ता ट्राइग्लिसराइड स्तर दिल और लिवर के लिए खतरे की घंटी
HealthCheck – शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम जितने जरूरी हैं, उतना ही जरूरी है समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण कई बीमारियां चुपचाप शरीर में घर कर लेती हैं। शुरुआती दौर में इनके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, लेकिन अंदर ही अंदर नुकसान जारी रहता है। ऐसे में नियमित जांच कई गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान करने में मदद करती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग नियमित हेल्थ चेकअप की आदत डाल लें तो दिल से जुड़ी बीमारियों सहित कई जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बदलती जीवनशैली के बीच लिपिड प्रोफाइल जांच अब लगभग हर उम्र के लोगों के लिए अहम मानी जा रही है।
लिपिड प्रोफाइल क्यों है जरूरी
लिपिड प्रोफाइल एक साधारण रक्त परीक्षण है, लेकिन इससे शरीर की अंदरूनी स्थिति का अहम संकेत मिलता है। इस जांच के जरिए खून में मौजूद कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड जैसे वसा तत्वों का स्तर पता चलता है। जब ये स्तर सामान्य सीमा से ऊपर पहुंच जाते हैं तो हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।
अक्सर लोग केवल कुल कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान देते हैं, जबकि ट्राइग्लिसराइड की अनदेखी कर देते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यही लापरवाही आगे चलकर भारी पड़ सकती है। अगर ट्राइग्लिसराइड का स्तर 150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ऊपर बना रहता है तो इसे सतर्क संकेत माना जाता है।
ट्राइग्लिसराइड क्या होता है
ट्राइग्लिसराइड दरअसल एक प्रकार की वसा है, जो शरीर को ऊर्जा देने में भूमिका निभाती है। जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेते हैं, खासकर मीठे और तले-भुने खाद्य पदार्थ, तो अतिरिक्त ऊर्जा शरीर में ट्राइग्लिसराइड के रूप में जमा होने लगती है।
शराब का सेवन, अधिक शुगर, और अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट भी इसके स्तर को बढ़ा सकते हैं। शरीर इन अतिरिक्त कैलोरी को वसा में बदलकर रक्त में जमा करता है। धीरे-धीरे यही स्थिति स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन सकती है।
दिल की सेहत पर असर
कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि जब ट्राइग्लिसराइड का स्तर 200 से ऊपर पहुंचता है तो धमनियों में वसा जमने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। यदि कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड दोनों बढ़े हों तो स्थिति और गंभीर हो जाती है।
उच्च ट्राइग्लिसराइड बैड कोलेस्ट्रॉल के साथ मिलकर धमनियों को संकरा और कठोर बना सकता है। इससे हृदय तक रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। कई मामलों में मरीज को तब तक कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते, जब तक स्थिति गंभीर न हो जाए।
लिवर और पैंक्रियाज पर प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या केवल दिल तक सीमित नहीं रहती। लगातार उच्च ट्राइग्लिसराइड स्तर फैटी लिवर की समस्या को जन्म दे सकता है। लिवर में वसा जमा होने से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
डायबिटीज के मरीजों में यह जोखिम और अधिक देखा जाता है। यदि स्तर 500 से ऊपर पहुंच जाए तो पैंक्रियाटाइटिस जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसमें अग्न्याशय में सूजन आ जाती है। यह स्थिति जीवन के लिए खतरा बन सकती है और तत्काल चिकित्सा की जरूरत होती है।
शुरुआती लक्षण क्यों नहीं दिखते
इस समस्या की एक बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में स्पष्ट संकेत नहीं मिलते। अधिकतर लोगों को तब पता चलता है जब वे किसी नियमित जांच के दौरान रिपोर्ट देखते हैं या फिर कोई जटिलता सामने आती है। इसी वजह से डॉक्टर नियमित जांच की सलाह देते हैं।
कैसे रखें नियंत्रण में
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ सरल बदलाव अपनाकर ट्राइग्लिसराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। तला-भुना, ज्यादा मीठा, मक्खन, क्रीम और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए।
शराब और अतिरिक्त शुगर से दूरी बनाना भी अहम कदम है। इसके साथ ही नियमित व्यायाम बेहद लाभकारी साबित होता है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट शारीरिक गतिविधि करने से वजन नियंत्रित रहता है और रक्त में वसा का स्तर संतुलित बना रहता है।
साबुत अनाज, ताजी सब्जियां, फल और फाइबर से भरपूर भोजन को प्राथमिकता देना चाहिए। ओमेगा-3 फैटी एसिड से युक्त खाद्य पदार्थ जैसे मछली, अलसी और अखरोट भी लाभदायक माने जाते हैं।
नियमित जांच, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर ट्राइग्लिसराइड से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय रहते जागरूकता ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।



