Hydration – क्या दिनभर आठ गिलास पानी सच में है जरूरी…
Hydration – अक्सर हम यह मान लेते हैं कि दिन में आठ गिलास पानी पी लेना ही अच्छी सेहत की गारंटी है। कई लोग तो बिना प्यास लगे भी सिर्फ घड़ी या मोबाइल रिमाइंडर देखकर पानी पीते रहते हैं। लेकिन पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि हाइड्रेशन केवल मात्रा का खेल नहीं है। यदि शरीर में जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन नहीं है, तो केवल सादा पानी पीना हमेशा फायदेमंद साबित नहीं होता। कुछ मामलों में यह थकान, सूजन या ध्यान की कमी जैसी परेशानियों को बढ़ा भी सकता है।

शरीर में पानी का संतुलन कैसे काम करता है
पानी शरीर में सीधे कोशिकाओं में जमा नहीं हो जाता। यह सोडियम और अन्य मिनरल्स के संतुलन के आधार पर अंदर-बाहर होता रहता है। जब कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा सादा पानी पी लेता है, तो खून में सोडियम का स्तर कम हो सकता है। इस स्थिति में शरीर अतिरिक्त पानी और मिनरल्स को पेशाब के जरिए बाहर निकालने लगता है। परिणामस्वरूप कोशिकाएं पानी को सही तरह से रोक नहीं पातीं। इस हल्के असंतुलन को माइल्ड हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है, जो अब पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहा है।
हल्के सोडियम असंतुलन के संकेत
विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ सामान्य लक्षण इस असंतुलन की ओर इशारा कर सकते हैं। पूरी नींद के बाद भी सुबह भारीपन या थकान महसूस होना इसका संकेत हो सकता है। दोपहर के समय अचानक ऊर्जा में गिरावट भी केवल काम का दबाव नहीं, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का परिणाम हो सकता है।
रात में पैरों में ऐंठन, बार-बार सिरदर्द या सुबह चेहरे और हाथों में सूजन भी ऐसे संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, याददाश्त में कमी या ब्रेन फॉग जैसा अनुभव भी शरीर के अंदर मिनरल संतुलन बिगड़ने से जुड़ा हो सकता है। कई बार मीठा या नमकीन खाने की तीव्र इच्छा भी शरीर की इसी जरूरत का संकेत होती है।
पोषण विशेषज्ञ की सलाह
न्यूट्रिशनिस्ट निकिता बार्डिया का कहना है कि उन्होंने अपने अनुभव में कुछ छोटे बदलाव किए, जिनसे सकारात्मक परिणाम मिले। उन्होंने तय मात्रा के बजाय प्यास के अनुसार पानी पीना शुरू किया। सुबह के गुनगुने पानी में थोड़ा सेंधा नमक और नींबू मिलाना शामिल किया। साथ ही, भोजन में पोटैशियम युक्त चीजें जैसे नारियल पानी, केला और दही को प्राथमिकता दी।
उनका कहना है कि शरीर के संकेतों को समझना अधिक जरूरी है, बजाय इसके कि केवल गिलास गिने जाएं। दो सप्ताह के भीतर उन्होंने ऊर्जा में सुधार और सूजन में कमी महसूस की। हालांकि, हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है और किसी भी बदलाव से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहता है।
सही हाइड्रेशन का अर्थ
विशेषज्ञों के अनुसार, सही हाइड्रेशन का मतलब केवल पानी पीना नहीं, बल्कि पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखना है। मौसम, शारीरिक गतिविधि और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पानी की जरूरत बदल सकती है। प्यास लगना शरीर का स्वाभाविक संकेत है, जिसे समझना जरूरी है।
स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना बेहतर है, ताकि व्यक्तिगत स्थिति के अनुरूप सही मार्गदर्शन मिल सके।



